{"_id":"59f7760a4f1c1bd1538b9f72","slug":"201509389834-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एकादशी व्रत और पूजन से मिलता है पुण्य लाभ - अवनीश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एकादशी व्रत और पूजन से मिलता है पुण्य लाभ - अवनीश
Updated Tue, 31 Oct 2017 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलालाबाद।
कथा व्यास अवनीश भगत ने कहा कि कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
कस्बा जलालाबाद के सनातन सत्संग भवन में चल रही कार्तिक महात्म व्रत कथा में कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी व्रत का महत्व समझाया। अवनीश भगत ने बताया कि जब भगवान विष्णु नारायण चार मास के शयन के पश्चात उठते है, इसीलिए शुक्ल पक्ष एकादशी को हरिप्रवोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। एकादशी से पूर्णिमा तक व्रत करना पंचक व्रत कहलाता है, जो पूर्णिमा को पूरे हो जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने के बाद ऋषि और पितृ तर्पण करना चाहिए। भीष्म पंचक व्रत में गंगा के पुत्र ब्रह्मचारी भीष्म पितामह का तर्पण से वर्षभर के पाप स्वत: नष्ट हो जाते हैं।
कथा में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान राजकुमार रुहेला, रामदत्त, मदनलाल, पंडित राधेश्याम, पंडित राजेंद्र प्रसाद, इंदु आहुजा, नीलम शर्मा, पंडित सुभाष शर्मा, कोमल रानी आदि का व्यवस्था में सहयोग रहा। उधर, कार्तिक मास कथा समिति के राजकुमार रुहेला ने बताया कि मंगलवार को ब्रह्म मुहूर्त में नगर में भजन कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली जाएगी।
विज्ञापन
कथा व्यास अवनीश भगत ने कहा कि कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
कस्बा जलालाबाद के सनातन सत्संग भवन में चल रही कार्तिक महात्म व्रत कथा में कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी व्रत का महत्व समझाया। अवनीश भगत ने बताया कि जब भगवान विष्णु नारायण चार मास के शयन के पश्चात उठते है, इसीलिए शुक्ल पक्ष एकादशी को हरिप्रवोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। एकादशी से पूर्णिमा तक व्रत करना पंचक व्रत कहलाता है, जो पूर्णिमा को पूरे हो जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने के बाद ऋषि और पितृ तर्पण करना चाहिए। भीष्म पंचक व्रत में गंगा के पुत्र ब्रह्मचारी भीष्म पितामह का तर्पण से वर्षभर के पाप स्वत: नष्ट हो जाते हैं।
कथा में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान राजकुमार रुहेला, रामदत्त, मदनलाल, पंडित राधेश्याम, पंडित राजेंद्र प्रसाद, इंदु आहुजा, नीलम शर्मा, पंडित सुभाष शर्मा, कोमल रानी आदि का व्यवस्था में सहयोग रहा। उधर, कार्तिक मास कथा समिति के राजकुमार रुहेला ने बताया कि मंगलवार को ब्रह्म मुहूर्त में नगर में भजन कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली जाएगी।
विज्ञापन