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Shamli News: देखरेख के अभाव में 200 साल पुराना डाक बंगला खंडहर में तब्दील

Mon, 29 Jan 2024 01:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jan 2024 01:03 AM IST
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200 year old post office turned into ruins due to lack of maintenance
कांधला। कस्बे के पूर्वी यमुना नहर स्थित 200 साल पुराना ब्रिटिश कालीन सिंचाई विभाग का डाक बंगला खंडहर में तब्दील है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी डाक बंगले की सुंदरीकरण की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। डाक बंगले में ब्रिटिश सरकार के अधिकारी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर कई बड़े राजनेता तक रुक चुके हैं। कस्बे के लोगों ने प्रदेश सरकार से डाक बंगले के सुंदरीकरण की मांग की है।
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अंग्रेजी शासन काल में करीब 200 वर्ष पूर्व यमुना नहर पर डाक बंगला का निर्माण हुआ था। कस्बे में कोठी के नाम से मशहूर इस डाक बंगले पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधि के लिए पूर्व में आरामदायक कमरे, सुंदर बगीचे थे। ब्रिटिश शासन काल में जब अंग्रेज अधिकारी यहां से गुजरते थे तो इस डाक बंगले पर ही विश्राम किया करते थे। कस्बे के लोगों ने बताया कि नहर पटरी पर उस समय केवल ब्रिटिश सरकार का काफिला ही निकलता था। बाद में जब सिंचाई मंत्री वीरेंद्र वर्मा बने तो उनके द्वारा नहर पटरी का रास्ता आमजन लोगों के लिए खोला गया।
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-पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर कई नेता डाक बंगले में रुकते थे
देश की आजादी के बाद जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस डाक बंगले में रुकते थे। 1976 में संजय गांधी यूथ कांग्रेस ऑल इंडिया के संरक्षक ने अपने काफिले के साथ यहां पर विश्राम किया था। इसके बाद 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चमन सिंह एमएलए की चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए यहां पहुंचीं थीं। 1984 के दौरान कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी राजीव गांधी ने एक दौरे के साथ अपने काफिले को लेकर यहां पर विश्राम किया था। 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राम नरेश यादव ने बंगले पर पहुंचकर जन समस्या को सुना था। धीरे-धीरे डाक बंगला अपने अस्तित्व को खोता चला गया। एक बार शरारती तत्वों ने यहां पर लगे दरवाजों और खिड़कियाें को तोड़ दिया था। वर्तमान में डाक बंगला खंडहर में तब्दील हो चुका है। 1984 में राजीव गांधी ने मंच साझा कर लोगों को संबोधित किया था।
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-यह बोले लोग
लोकतंत्र सेनानी गौरी शंकर मित्तल ने बताया कि एक समय था कि यहां का वातावरण शुद्ध रहता था। सुबह-शाम यहां पर लोग घूमने के लिए आते थे, लेकिन अब उदासीनता के चलते यह अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। तत्कालीन कई मुख्यमंत्री और राजनेता यहां पर रुक चुके हैं। लोगों ने बंगले के सुंदरीकरण की मांग की है।
डाक बंगले के इतिहास के बारे में बताते हुए सुबोध भारतीय का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की देखरेख के अभाव में ब्रिटिश कालीन डाक बंगला खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा इसका सुंदरीकरण करना चाहिए।

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सुंदरीकरण की मांग
डॉ़ नफीस अहमद ने बताया कि ब्रिटिश काल में यहां अंग्रेज अधिकारी रुकते थे। कुछ समय यहां अधिकारी व जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याएं भी सुनते थे, लेकिन अब इसकी हालत खराब होने के कारण यहां कोई नहीं ठहरता है। जिलाधिकारी से सुंदरीकरण की मांग की है।
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धरोहर को बचाने पर दिया जाए ध्यान
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष ईश्वर दयाल कंसल ने बताया कि जुलाई 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने डाक बंगले पर जनसभा को संबोधित किया था, उसे समय कस्बे के लोगों ने डाक बंगले का पूर्ण रूप से विस्तार कर इसको विशाल रूप देने की मांग की थी। जल्द से जल्द धरोहर को बचाने पर ध्यान दिया जाए।


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इन्होंने कहा
डाक बंगले के सुंदरीकरण का प्रयास कराया जाएगा। अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। प्रयास रहेगा कि लोगों को डाक बंगले के इतिहास के बारे में भी बताया जाए।
रविंद्र राणा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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