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सावधानी, जागरुकता और व्यायाम, मधुमेह का कारगर इलाज
Updated Wed, 27 Jun 2018 01:01 AM IST
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शामली।
आज मधुमेह जागृति दिवस है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी जो जानलेवा है, लेकिन लाइलाज नहीं। समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता, व्यायाम और डाइट कंट्रोल के नियम इस बीमारी का असली इलाज है।
शामली के सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं। डाक्टरों का मानना है कि पांच प्रतिशत से अधिक मरीज डायबिटीज से पीड़ित आते हैं। एसीएमओ डॉ. केपी सिंह का कहना है कि मधुमेह एक खतरनाक बीमारी है। यह दो तरह की होती है। एक टाईप वन और दूसरी टाईप टू। टाईप वन के बारे में वह बताते हैं कि इंसुलन एक हार्मोन होता है। जो खाना खाने के बाद ग्लूकोज को नियंत्रित रखता है और उसकी लेवल को कंट्रोल रखता है। यदि यह इंसुलन कम हो गया तो ग्लूकोज यानी शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और व्यक्ति मधुमेह की चपेट में आ जाता है। वहीं, टाईप टू के बारे में वह बताते है कि यह अक्सर 40 वर्ष उम्र पार के लोगों होती है। इस उम्र के लोगों की कोशिकाएं कम होने लगती हैं। जिस कारण इंसुलन कम हो जाता है। टाईप टू उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी तोंद बढ़ी होती है। यह अक्सर वंशानुगत भी होता है।
मधुमेह का सामान्य स्तर खून में शर्करा (शुगर) का सामान्य स्तर निम्न प्रकार है। भूखे पेट (व्रत के दौरान) 126 मिग्रा से कम होना चाहिए। खाना खाने से पहले 70 से 130 मिग्रा के बीच होना चाहिए। खाना खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 200 मिग्रा से कम होनी चाहिए। सोते समय खून में शर्करा की सामान्य मात्रा 100 से 140 मिग्रा होती है। ये संतुलन बिगड़ना ही बीमारी है।
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मधुमेह के मुख्य लक्षण
डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता। पैर का घाव ठीक न होना या गैंग्रीन का रूप ले लेना। अधिक पेशाब और भूख लगना। वजन कम होना। बार-बार चश्मे का नंबर बदलना। खुजली और संक्रमण होना। दिल या मानसिक समस्याएं इस बीमारी के लक्षण है।
आहार के साथ जरूरी सावधानियां
डाक्टरों का कहना है कि टाइप वन की डायबिटीज में केवल इंसान को निश्चित मात्रा में इंसुलन देना ही इसका इलाज है। टाईप टू के मामले में किसी भी तरह के घाव को खुला ना छोड़ें। फलों का रस लेने के बजाय, फल खाएं। व्यायाम करें और अपना वजन नियंत्रित रखें। योग भी डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छा है। हमेशा जागरूक रहे और नियमित शुगर स्तर की जांच कराए।
सरकारी अस्पताल में है पर्याप्त दवाएं
सरकारी अस्पताल में मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए पर्याप्त दवाएं हैं। जिनमें इंसुलन से लेकर खाने वाली दवाइयां है। इसके लिए अलावा है। एक सामान्य एमबीबीएस डॉ. भी इसका सही तरीके से इलाज कर सकता है।
शरीर में निश्चित मात्रा की तुलना में शुगर की मात्रा अधिक हो जाना ही बीमारी है। लोगों को अपने खाने-पीने की व्यवस्था पर कंट्रोल रखना चाहिए और समय-समय पर अपनी शुगर की जांच कराते रहना चाहिए
- डॉ. केपी सिंह, एसीएमओ
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आज मधुमेह जागृति दिवस है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी जो जानलेवा है, लेकिन लाइलाज नहीं। समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता, व्यायाम और डाइट कंट्रोल के नियम इस बीमारी का असली इलाज है।
शामली के सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं। डाक्टरों का मानना है कि पांच प्रतिशत से अधिक मरीज डायबिटीज से पीड़ित आते हैं। एसीएमओ डॉ. केपी सिंह का कहना है कि मधुमेह एक खतरनाक बीमारी है। यह दो तरह की होती है। एक टाईप वन और दूसरी टाईप टू। टाईप वन के बारे में वह बताते हैं कि इंसुलन एक हार्मोन होता है। जो खाना खाने के बाद ग्लूकोज को नियंत्रित रखता है और उसकी लेवल को कंट्रोल रखता है। यदि यह इंसुलन कम हो गया तो ग्लूकोज यानी शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और व्यक्ति मधुमेह की चपेट में आ जाता है। वहीं, टाईप टू के बारे में वह बताते है कि यह अक्सर 40 वर्ष उम्र पार के लोगों होती है। इस उम्र के लोगों की कोशिकाएं कम होने लगती हैं। जिस कारण इंसुलन कम हो जाता है। टाईप टू उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी तोंद बढ़ी होती है। यह अक्सर वंशानुगत भी होता है।
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मधुमेह का सामान्य स्तर खून में शर्करा (शुगर) का सामान्य स्तर निम्न प्रकार है। भूखे पेट (व्रत के दौरान) 126 मिग्रा से कम होना चाहिए। खाना खाने से पहले 70 से 130 मिग्रा के बीच होना चाहिए। खाना खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 200 मिग्रा से कम होनी चाहिए। सोते समय खून में शर्करा की सामान्य मात्रा 100 से 140 मिग्रा होती है। ये संतुलन बिगड़ना ही बीमारी है।
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मधुमेह के मुख्य लक्षण
डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता। पैर का घाव ठीक न होना या गैंग्रीन का रूप ले लेना। अधिक पेशाब और भूख लगना। वजन कम होना। बार-बार चश्मे का नंबर बदलना। खुजली और संक्रमण होना। दिल या मानसिक समस्याएं इस बीमारी के लक्षण है।
आहार के साथ जरूरी सावधानियां
डाक्टरों का कहना है कि टाइप वन की डायबिटीज में केवल इंसान को निश्चित मात्रा में इंसुलन देना ही इसका इलाज है। टाईप टू के मामले में किसी भी तरह के घाव को खुला ना छोड़ें। फलों का रस लेने के बजाय, फल खाएं। व्यायाम करें और अपना वजन नियंत्रित रखें। योग भी डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छा है। हमेशा जागरूक रहे और नियमित शुगर स्तर की जांच कराए।
सरकारी अस्पताल में है पर्याप्त दवाएं
सरकारी अस्पताल में मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए पर्याप्त दवाएं हैं। जिनमें इंसुलन से लेकर खाने वाली दवाइयां है। इसके लिए अलावा है। एक सामान्य एमबीबीएस डॉ. भी इसका सही तरीके से इलाज कर सकता है।
शरीर में निश्चित मात्रा की तुलना में शुगर की मात्रा अधिक हो जाना ही बीमारी है। लोगों को अपने खाने-पीने की व्यवस्था पर कंट्रोल रखना चाहिए और समय-समय पर अपनी शुगर की जांच कराते रहना चाहिए
- डॉ. केपी सिंह, एसीएमओ