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‘इंसानियत को नसीहत देता है कुरान’
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कैराना। हरम मक्का के गेस्ट लेक्चरर एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अरबी ट्रेनर अब्दुल रहीम नईमुद्दीन ने कहा कि कुरान करीम को सुनना और समझा उसका हक है। इसलिए कुरान को मनुष्य की नसीहत और हिदायत के लिए नाजिल किया गया है।
मोहल्ला बिसातियान में स्थित शम्सी मस्जिद में अलकुरआन एकेडमी की ओर से कुरान की भाषा जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुभारंभ फैसल शम्सी और हुजैफा शम्सी की तिलावत से हुआ। मुख्य अतिथि हरम मक्का के गेस्ट लेक्चरर एवं अरबी ट्रेनर अब्दुल रहीम नईमुद्दीन ने कहा कि पवित्र कुरान अल्लाह का कलाम है। उसको बेख्याली और बेतवज्जही के साथ न सुना जाए। अरबी जुबान का ज्ञान न होने की वजह से बहुत से लोग कुरान को समझ नहीं पाते हैं। बेहतर तो यह है कि मुसलमानों के हर घर का एक-एक व्यक्ति किसी मदरसे या फिर अलकुरआन जैसी एकेडमी में तालीम हासिल करें।
उन्होंने कहा कि कुरान के अहकामों से वाकिफ होना हमारी जिम्मेदारी है और उसके हुक्मों पर अमल करें। मुफ्ती अब्दुल हसीब ने बताया कि कुरान इंसान को इंसान बनाने के लिए आया है, लेकिन यह काम उस समय तक नहीं हो सकता है, जब आप कुरान को न समझते हों। अशरफ शम्सी ने कहा कि कि अल कुरान एकेडमी की अरबी सिखाने की यह पहल लोगों को कुरान समझाने में अहम भूमिका निभा रही है। संचालन एकेडमी के निदेशक मुफ्ती अतहर शम्सी ने किया। कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद उमर, इजहार शम्सी, नौशाद शम्सी, खावर सिद्दीकी, असद सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला बिसातियान में स्थित शम्सी मस्जिद में अलकुरआन एकेडमी की ओर से कुरान की भाषा जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुभारंभ फैसल शम्सी और हुजैफा शम्सी की तिलावत से हुआ। मुख्य अतिथि हरम मक्का के गेस्ट लेक्चरर एवं अरबी ट्रेनर अब्दुल रहीम नईमुद्दीन ने कहा कि पवित्र कुरान अल्लाह का कलाम है। उसको बेख्याली और बेतवज्जही के साथ न सुना जाए। अरबी जुबान का ज्ञान न होने की वजह से बहुत से लोग कुरान को समझ नहीं पाते हैं। बेहतर तो यह है कि मुसलमानों के हर घर का एक-एक व्यक्ति किसी मदरसे या फिर अलकुरआन जैसी एकेडमी में तालीम हासिल करें।
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उन्होंने कहा कि कुरान के अहकामों से वाकिफ होना हमारी जिम्मेदारी है और उसके हुक्मों पर अमल करें। मुफ्ती अब्दुल हसीब ने बताया कि कुरान इंसान को इंसान बनाने के लिए आया है, लेकिन यह काम उस समय तक नहीं हो सकता है, जब आप कुरान को न समझते हों। अशरफ शम्सी ने कहा कि कि अल कुरान एकेडमी की अरबी सिखाने की यह पहल लोगों को कुरान समझाने में अहम भूमिका निभा रही है। संचालन एकेडमी के निदेशक मुफ्ती अतहर शम्सी ने किया। कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद उमर, इजहार शम्सी, नौशाद शम्सी, खावर सिद्दीकी, असद सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
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