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धर्म के रास्ते पर चलकर मिलती है शांति और आत्मविश्वास
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:22 PM IST
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धर्म के रास्ते पर चलकर मिलती है शांति
थानाभवन (शामली)। । श्रीमद्भागवत कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा धर्म के लिए धन नहीं चाहिए मन चाहिए। धन किसी को अपना गुलाम नहीं बना सकता पर मनुष्य स्वयं ही धन का गुलाम बनकर पतन की ओर चला जाता है। धर्म के रास्ते पर चलकर जो शांति आत्मविश्वास सद्भाव मिलता है उससे बड़ा धन कोई ओर नहीं है।
सनातन धर्म सभा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि आज युवा शक्ति पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रही है, जिससे परिवारों में विघटन हो रहे हैं। ऐसे समय में घर परिवारों में बुजुर्गों को हमारी समस्या संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए आगे आना होगा। बच्चों को बाल्यकाल से ही संस्कृतिवान बनाना होगा। उन्होंने कहा धन से वस्तु श्रेष्ठ है वस्तु से मानव श्रेष्ठ है। मानव से विवेक श्रेष्ठ है। विवेक से संत तत्व परमात्मा श्रेष्ठ है। मानव जन्म परमात्मा को प्राप्त करने के लिए मिला है। इस लिए सत्संग श्रवण और आचरण में लाकर धर्म के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। इस दौरान संगीता देवी, बेबी देवी, जयमाला, विनोद देवी, कमल सैनी, विकास सैनी, मोहन लाल, मनोज, तुषार कांबोज, ऋषिपाल, रचना सैनी, रश्मि गर्ग आदि रहे।
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थानाभवन (शामली)। । श्रीमद्भागवत कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा धर्म के लिए धन नहीं चाहिए मन चाहिए। धन किसी को अपना गुलाम नहीं बना सकता पर मनुष्य स्वयं ही धन का गुलाम बनकर पतन की ओर चला जाता है। धर्म के रास्ते पर चलकर जो शांति आत्मविश्वास सद्भाव मिलता है उससे बड़ा धन कोई ओर नहीं है।
सनातन धर्म सभा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि आज युवा शक्ति पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रही है, जिससे परिवारों में विघटन हो रहे हैं। ऐसे समय में घर परिवारों में बुजुर्गों को हमारी समस्या संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए आगे आना होगा। बच्चों को बाल्यकाल से ही संस्कृतिवान बनाना होगा। उन्होंने कहा धन से वस्तु श्रेष्ठ है वस्तु से मानव श्रेष्ठ है। मानव से विवेक श्रेष्ठ है। विवेक से संत तत्व परमात्मा श्रेष्ठ है। मानव जन्म परमात्मा को प्राप्त करने के लिए मिला है। इस लिए सत्संग श्रवण और आचरण में लाकर धर्म के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। इस दौरान संगीता देवी, बेबी देवी, जयमाला, विनोद देवी, कमल सैनी, विकास सैनी, मोहन लाल, मनोज, तुषार कांबोज, ऋषिपाल, रचना सैनी, रश्मि गर्ग आदि रहे।
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