{"_id":"5b9aacdd867a55013f17ca12","slug":"171536863453-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उच्च शिक्षा में कम हो रहा हिंदी के प्रति प्रेम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उच्च शिक्षा में कम हो रहा हिंदी के प्रति प्रेम
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्च शिक्षा में कम हो रहा हिंदी के प्रति प्रेम
शामली। जनपद में उच्च शिक्षा में हिंदी के प्रति छात्र-छात्राओं का मोह कम होता जा रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले एमए हिंदी में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में पचास प्रतिशत तक कमी आई है। ऐसे में छात्रों का हिंदी से लगाव कम होता जा रहा है।
जिले के छात्र-छात्राओं में अपनी मातृ भाषा के प्रति प्रेम घटता जा रहा है। उच्च शिक्षा में हिंदी विषय से एमए करने वालें छात्र-छात्राओं में हर वर्ष गिरावट आती जा रही है। जनपद के वीवी पीजी कॉलेज शामली और विजय सिंह पथिक राजकीय कॉलेज कैराना में एमए हिंदी विषय संचालित है। दोनों ही कॉलेजों में 60-60 सीटें उपलब्ध है। पूर्व वर्षों में शामली के वीवी पीजी कॉलेज में एमए हिंदी में साठ सीटों में से 24 दाखिले हुए थे। जिसमें नौ विद्यार्थी सत्र के बीच में पढ़ाई छोड़ गए। वहीं, इस सत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले आधे ही दाखिले हुए है। इस वर्ष केवल दस दाखिले हो सकें है। वहीं, कैराना के विजय सिंह पथिक में भी केवल इस वर्ष बारह दाखिले हुए हैं। पूर्व में हिंदी विषय की सभी सीटें पूरी हो जाती थीं।
हिंदी में बढ़ते रोजगार के अवसर
वीवी पीजी कॉलेज में हिंदी विषय की प्रोफेसर डॉक्टर छवि ने बताया कि आज हिंदी का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदी सब समझते हैं। इसलिए भारत में सबसे ज्यादा समाचार चैनल और अखबार हिंदी में है। हिंदी पर अच्छी पकड़ वाला युवक चैनल और अखबारों में भी अपना करियर बना सकता है। वहीं, विदेशों में भी लोग हिंदी सीख रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी का ही सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। उन्होंने बताया कि हिंदी के अनुवादकों की विदेशों में काफी जरूरत है। इसलिए विद्यार्थियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि हिंदी पढ़ने वालों को रोजगार नहीं मिलता। हिंदी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों को विदेशों में भी हिंदी पढ़ाने पर अच्छी सैलरी दी जा रही है। भारत में रोजगार करने के लिए विदेशी लोग हिंदी सीख रहे है।
विज्ञापन
प्रोफेसर दे रहे हिंदी को बढ़ावा
शहर के वीवी पीजी कॉलेज में हिंदी विषय के प्रोफेसर जयनारायण बंसल पद सेवानिवृत्ति होने के दस वर्ष बाद भी हिंदी के प्रोत्साहन दे रहे हैं। वे वर्ष 2008 में पद से सेवानिवृत्त हो गए थे। जिसके बाद भी वह पिछले दस वर्षों से शहर के वीवी पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों को हिंदी विषय के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी का क्रेज कम नहीं हुआ है। आज सभी परीक्षाओं में भी हिंदी के प्रश्न आने शुरू हो गए हैं। जो छात्र हिंदी में कमजोर होता है वह परीक्षा पास नहीं कर पाता। यूपी पुलिस हो या एसएससी की परीक्षा सभी में हिंदी का अलग से पार्ट आ रहा है। वह कॉलेज से आने के बाद भी कंपीटीशन की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की हिंदी की सभी परेशानी नि:शुल्क दूर कराते हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी की तरफ कम ध्यान देने वाले बच्चे हिंदी के शब्द लिखने में काफी गलतियां करते हैं।
हिंदी को बढ़ावा देने का लिया संकल्प
शहर के वीवी पीजी कॉलेज में एमए हिंदी विषय से पढ़ाई करने वाले प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा दीपा मलिक, शालू, दीप शिखा और छात्र विकास का कहना है कि वे हिंदी के क्षेत्र में काफी आगे जाना चाहतें है। एमए के बाद वह नेट और पीएचडी कर प्रोफेसर बनेंगे। जिसके बाद वह देश और विदेशों में भी हिंदी के सेमिनारों में प्रतिभाग कर हिंदी के प्रति छात्र-छात्राओं को जागरूक करेंगे।
विज्ञापन
शामली। जनपद में उच्च शिक्षा में हिंदी के प्रति छात्र-छात्राओं का मोह कम होता जा रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले एमए हिंदी में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में पचास प्रतिशत तक कमी आई है। ऐसे में छात्रों का हिंदी से लगाव कम होता जा रहा है।
जिले के छात्र-छात्राओं में अपनी मातृ भाषा के प्रति प्रेम घटता जा रहा है। उच्च शिक्षा में हिंदी विषय से एमए करने वालें छात्र-छात्राओं में हर वर्ष गिरावट आती जा रही है। जनपद के वीवी पीजी कॉलेज शामली और विजय सिंह पथिक राजकीय कॉलेज कैराना में एमए हिंदी विषय संचालित है। दोनों ही कॉलेजों में 60-60 सीटें उपलब्ध है। पूर्व वर्षों में शामली के वीवी पीजी कॉलेज में एमए हिंदी में साठ सीटों में से 24 दाखिले हुए थे। जिसमें नौ विद्यार्थी सत्र के बीच में पढ़ाई छोड़ गए। वहीं, इस सत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले आधे ही दाखिले हुए है। इस वर्ष केवल दस दाखिले हो सकें है। वहीं, कैराना के विजय सिंह पथिक में भी केवल इस वर्ष बारह दाखिले हुए हैं। पूर्व में हिंदी विषय की सभी सीटें पूरी हो जाती थीं।
विज्ञापन
हिंदी में बढ़ते रोजगार के अवसर
वीवी पीजी कॉलेज में हिंदी विषय की प्रोफेसर डॉक्टर छवि ने बताया कि आज हिंदी का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदी सब समझते हैं। इसलिए भारत में सबसे ज्यादा समाचार चैनल और अखबार हिंदी में है। हिंदी पर अच्छी पकड़ वाला युवक चैनल और अखबारों में भी अपना करियर बना सकता है। वहीं, विदेशों में भी लोग हिंदी सीख रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी का ही सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। उन्होंने बताया कि हिंदी के अनुवादकों की विदेशों में काफी जरूरत है। इसलिए विद्यार्थियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि हिंदी पढ़ने वालों को रोजगार नहीं मिलता। हिंदी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों को विदेशों में भी हिंदी पढ़ाने पर अच्छी सैलरी दी जा रही है। भारत में रोजगार करने के लिए विदेशी लोग हिंदी सीख रहे है।
विज्ञापन
प्रोफेसर दे रहे हिंदी को बढ़ावा
शहर के वीवी पीजी कॉलेज में हिंदी विषय के प्रोफेसर जयनारायण बंसल पद सेवानिवृत्ति होने के दस वर्ष बाद भी हिंदी के प्रोत्साहन दे रहे हैं। वे वर्ष 2008 में पद से सेवानिवृत्त हो गए थे। जिसके बाद भी वह पिछले दस वर्षों से शहर के वीवी पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों को हिंदी विषय के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी का क्रेज कम नहीं हुआ है। आज सभी परीक्षाओं में भी हिंदी के प्रश्न आने शुरू हो गए हैं। जो छात्र हिंदी में कमजोर होता है वह परीक्षा पास नहीं कर पाता। यूपी पुलिस हो या एसएससी की परीक्षा सभी में हिंदी का अलग से पार्ट आ रहा है। वह कॉलेज से आने के बाद भी कंपीटीशन की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की हिंदी की सभी परेशानी नि:शुल्क दूर कराते हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी की तरफ कम ध्यान देने वाले बच्चे हिंदी के शब्द लिखने में काफी गलतियां करते हैं।
हिंदी को बढ़ावा देने का लिया संकल्प
शहर के वीवी पीजी कॉलेज में एमए हिंदी विषय से पढ़ाई करने वाले प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा दीपा मलिक, शालू, दीप शिखा और छात्र विकास का कहना है कि वे हिंदी के क्षेत्र में काफी आगे जाना चाहतें है। एमए के बाद वह नेट और पीएचडी कर प्रोफेसर बनेंगे। जिसके बाद वह देश और विदेशों में भी हिंदी के सेमिनारों में प्रतिभाग कर हिंदी के प्रति छात्र-छात्राओं को जागरूक करेंगे।