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मां वैष्णो के दरबार में आने दूर होते संकट दूर
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:20 AM IST
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शामली।
शहर के टंकी रोड स्थित प्राचीन माता वैष्णो देवी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। श्रीदुर्गा नवरात्र में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि माता वैष्णो देवी के दरबार में लगातार पूजा करने से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं।
प्राचीन माता वैष्णोदेवी मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु यहां आकर दर्शन कर धर्म लाभ कमाते हैं। मंदिर के पुजारी कांति प्रसाद बताते हैं कि 1973 में माता वैष्णो देवी मंदिर की स्थापना लाला इंद्रसैन और उनके परिवारजनों के प्रयास से हुई थी। 1973-74 से कांति प्रसाद के पिता पंडित ऋषिराम शर्मा (गढ़वाल) मंदिर में पुजारी रहे। 2006 में उनका निधन होने के बाद कांति प्रसाद पुजारी बने। उनका कहना है कि नवरात्र में श्रद्धालु सुबह-शाम पूजा अर्चना करने आते हैं। नियमित दोपहर में भजन कीर्तन किया जाता है। इस मंदिर के पास ही भैरव मंदिर भी है। इसके चलते श्रद्धालुओं को मां वैष्णो दरबार और भैरव मंदिर के दर्शन जैसा ही पुण्य लाभ प्राप्त होता है। 2013- 14 में माता के मंदिर के साथ नौ देवियों के छोटे मंदिर स्थापित किए गए।
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शहर के टंकी रोड स्थित प्राचीन माता वैष्णो देवी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। श्रीदुर्गा नवरात्र में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि माता वैष्णो देवी के दरबार में लगातार पूजा करने से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं।
प्राचीन माता वैष्णोदेवी मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु यहां आकर दर्शन कर धर्म लाभ कमाते हैं। मंदिर के पुजारी कांति प्रसाद बताते हैं कि 1973 में माता वैष्णो देवी मंदिर की स्थापना लाला इंद्रसैन और उनके परिवारजनों के प्रयास से हुई थी। 1973-74 से कांति प्रसाद के पिता पंडित ऋषिराम शर्मा (गढ़वाल) मंदिर में पुजारी रहे। 2006 में उनका निधन होने के बाद कांति प्रसाद पुजारी बने। उनका कहना है कि नवरात्र में श्रद्धालु सुबह-शाम पूजा अर्चना करने आते हैं। नियमित दोपहर में भजन कीर्तन किया जाता है। इस मंदिर के पास ही भैरव मंदिर भी है। इसके चलते श्रद्धालुओं को मां वैष्णो दरबार और भैरव मंदिर के दर्शन जैसा ही पुण्य लाभ प्राप्त होता है। 2013- 14 में माता के मंदिर के साथ नौ देवियों के छोटे मंदिर स्थापित किए गए।
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