{"_id":"5b2951924f1c1bf67a8b606a","slug":"161529434514-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मृत्यु के भय से मुक्त करती है भागवत -- बाल साध्वी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मृत्यु के भय से मुक्त करती है भागवत -- बाल साध्वी
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:25 AM IST
विज्ञापन
भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ : बाल साध्वी
शामली। कथा व्यास बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है।
गांव खंदरावली स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में महामंडलेश्वर भैय्यादास जी महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण वही करते हैं, जिन पर परमात्मा की विशेष कृपा होती है। उन्होंने कहा कि जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचानने का प्रयत्न नहीं करता है। इसी कारण उसे आनंद की प्राप्ति नहीं होती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करता है। भागवत ज्ञान और वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं, लेकिन वह सोये हुए हैं। भागवत के अलावा अन्य कोई ग्रंथ नहीं है, जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा सके। इससे पूर्व मंगला चारण के साथ व्यास पीठ का पूजन किया गया। कथा के दौरान सुखपाल सिंह और उनकी पत्नी संतरा देवी मुख्य यजमान रहीं। इस दौरान दुर्गा मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश चौहान, सहसपाल प्रधान, सुधांशु प्रधान, चैनपाल सिंह, ईसम सिंह, चौधरी नेपाल सिंह, जगत सिंह मुखिया, पंडित रामपाल शर्मा, सुरेश, निखिल और सुमित आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
शामली। कथा व्यास बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है।
गांव खंदरावली स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में महामंडलेश्वर भैय्यादास जी महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण वही करते हैं, जिन पर परमात्मा की विशेष कृपा होती है। उन्होंने कहा कि जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचानने का प्रयत्न नहीं करता है। इसी कारण उसे आनंद की प्राप्ति नहीं होती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करता है। भागवत ज्ञान और वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं, लेकिन वह सोये हुए हैं। भागवत के अलावा अन्य कोई ग्रंथ नहीं है, जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा सके। इससे पूर्व मंगला चारण के साथ व्यास पीठ का पूजन किया गया। कथा के दौरान सुखपाल सिंह और उनकी पत्नी संतरा देवी मुख्य यजमान रहीं। इस दौरान दुर्गा मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश चौहान, सहसपाल प्रधान, सुधांशु प्रधान, चैनपाल सिंह, ईसम सिंह, चौधरी नेपाल सिंह, जगत सिंह मुखिया, पंडित रामपाल शर्मा, सुरेश, निखिल और सुमित आदि मौजूद रहे।