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हाई रिस्क एरिया की जद में जिले के 33 गांव

Sat, 16 Jun 2018 12:29 AM IST
Updated Sat, 16 Jun 2018 12:29 AM IST
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हाई रिस्क एरिया की जद में जिले के 33 गांव
शामली। डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और सामान्य बुखार से जिले के 33 गांव अति प्रभावित है। ये सभी गांव हाई रिस्क एरिया में है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों में बीमारियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है।
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हर साल बरसात के बाद बीमारी का सीजन शुरू हो जाता है। ग्रामीणों में जागरूकता के अभाव और नासमझी के कारण उत्पन्न हुए मच्छर आए साल हजारों लोगों को बुखार से पीड़ित कर देते है। ऐसे में सामान्य बुखार सबसे अधिक होता है। हालांकि डेंगू, चिकनगुनिया का जिला शामली में बहुत कम प्रभाव है, लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग इस पर निगरानी रखता है। हर साल आने वाले बुखार से पीड़ितों के क्षेत्र के आधार पर जिला मलेरिया विभाग द्वारा सर्वे किया जाता है कि कौन सा एरिया सबसे ज्यादा संवेदनशील है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष जिले के 33 गांवों को हाई रिस्क में चुना है। इनके संबंध में रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। इन गांवों में इस बार विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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ये है सबसे ज्यादा रिस्की 33 गांव -
पिंडोरा, मालैंडी, ताना, हसनपुर, दुल्लाखेडी, लपराना, आमवाली, किवाना, गढ़ी दौलत, नाला, गंगेरू, मलकपुर, अकबरपुर सुन्हेटी, ऊंचा गांव, मलकपुर, भूरा, बधेव, तितरवाड़ा, चूनसा, बनत, सिक्का, खेड़ीकरमू, लिलोन, यारपुर, सोंता रसूलपुर, भैंसानी इस्लामपुर, गढ़ी हसनपुर, भड़ी भरतपुर, खोड़समा, टपराना, सिंभालका, बुटराड़ा।
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ये है स्वास्थ्य विभाग का प्लान
इन गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। हर रविवार मच्छर पर वार यानि की हर रविवार को गांव में जाकर छिड़काव कराने के साथ ही गांवों में लोगों को जागरूक किया जाएगा। अक्तूबर तक इन गांवों के साथ पूरे जिले के गांवों में डीडीटी का छिड़काव कराया जाएगा। इसके अलावा समय-समय पर इन गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाएं जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने मंगवाई 54 एमटी डीडीटी
बुखार से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस बार बड़े स्तर पर तैयारी की गई है। सभी गांवों में छिड़काव कराने के लिए 54 एमटी डीडीटी दवाई की मांग शासन से की गई है। पिछली बार करीब 30 एमटी दवाई मांगी गई थी। इसके अलावा एंटी लार्वा की भी व्यवस्था की गई है।

जुलाई से हो जाती है शुरुआत
डाक्टरों के अनुसार बीमारी की शुरुआत जुलाई से हो जाती है। जुलाई में बरसात होने लगती है और उसके बाद मच्छर पैदा होते है। अगस्त, सितंबर में मरीज अस्पताल में आने लगते है। तीन माह सबसे ज्यादा संवेदनशील होते है। इसके बाद सितंबर के बाद बीमारी से राहत मिलती है। ये तीन माह ही स्वास्थ्य विभाग के अग्निपरीक्षा होते है।

तीन सालों में अब तक 31 मलेरिया और 15 डेंगू के केस
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल 2015, 2016 और 2017 में अब तक जिले में मलेरिया के 31 केस पॉजिटिव आ चुके है। इसके अलावा 15 से अधिक मरीज डेंगू के सामने आ चुके हैै।


मच्छरों के कारण ही बीमारियां बढ़ती है, इससे निपटने के महकमे द्वारा तैयारियां कर ली गई है। दवाईयां मंगवाई गई है। इसके अलावा जो गांव हाई रिस्क एरिया में आए है, उनमें विशेष अभियान चलाया जाएगा। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ।
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