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वकालत के साथ तरबूज की खेती कर रहे अखिल
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली। शामली जिले में गांव कसेरवा खुर्द निवासी किसान ने वकालत के साथ-साथ इस साल पीले रंग के तरबूज की खेती शुरू की है। मंडी में पीला तरबूज को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है। यह तरबूज तीन गुना अधिक दाम पर बिकने से वे मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं।
आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव कसेरवा खुर्द निवासी अखिल देशवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं। वकालत करने के साथ ही उनका खेती से लगाव बराबर बना हुआ है। सप्ताह में दो दिन शनिवार और रविवार की छुट्टी में वे गांव में रहकर खेती की देखभाल करते हैं। अखिल ने बताया कि इस बार उन्होंने फरवरी माह में ईख की कटाई कर करीब तीन बीघा में पीले रंग के तरबूज की खेती है। बाहर से पीला और अंदर से लाल रंग का तरबूज लोगों के लिए आकर्षण बना हुआ है। पीला तरबूज देखने के लिए जहां लोगों का खेत पर आना जाना लगा रहता है, वहीं मंडी में भी लोगों की भीड़ देखने के लिए जुट जाती है। अखिल का दावा है कि पीला तरबूज का स्वाद और मिठास सामान्य हरे रंग के तरबूज से अधिक है। यह तरबूज तीन से पांच किलो वजन का होता है।
तीन गुना दाम पर बिक रहा तरबूज
शामली। अखिल ने बताया कि प्रतिदिन तीन से चार क्विंटल तरबूज पैदा हो रहा है। तरबूज को शामली मंडी में लाकर बेचा जाता है। मंडी में तरबूज सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक दाम पर बिकता है, जिससे इसकी खेती करने में उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। मंडी व्यापारी सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने पहली बार पीला तरबूज देेेेखा है। जिले में अभी तक सिर्फ उनकी दुकान पर कसेरवा खुर्द निवासी अखिल के यहां से पीला तरबूज आ रहा है। मंडी में सामान्य तरबूज 8 से 10 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पीला तरबूज 20 से 25 रुपये तक बिकता है।
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दिल्ली की आजादपुर मंडी से खरीदा बीज
शामली। अखिल ने बताया कि पीले तरबूज का बीज आजादपुर मंडी दिल्ली से खरीदा था। इसे बाद घरोंडा में सरकारी फार्म में इसकी नर्सरी तैयार कराई गई। 25 फरवरी को फसल बोयी थी और 27 अप्रैल से मंडी में तरबूज जाना शुरू हो गया था। गन्ने का समय से भुगतान न मिलने पर उनका गन्ने की खेती से मोह भंग हो गया। उन्होंने करीब 20 बीघा में सब्जी की खेती कर रहे है, जिनमे करेला, तुरई, मिर्च, बैंगन की पैदावार हो रही है।
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शामली। शामली जिले में गांव कसेरवा खुर्द निवासी किसान ने वकालत के साथ-साथ इस साल पीले रंग के तरबूज की खेती शुरू की है। मंडी में पीला तरबूज को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है। यह तरबूज तीन गुना अधिक दाम पर बिकने से वे मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं।
आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव कसेरवा खुर्द निवासी अखिल देशवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं। वकालत करने के साथ ही उनका खेती से लगाव बराबर बना हुआ है। सप्ताह में दो दिन शनिवार और रविवार की छुट्टी में वे गांव में रहकर खेती की देखभाल करते हैं। अखिल ने बताया कि इस बार उन्होंने फरवरी माह में ईख की कटाई कर करीब तीन बीघा में पीले रंग के तरबूज की खेती है। बाहर से पीला और अंदर से लाल रंग का तरबूज लोगों के लिए आकर्षण बना हुआ है। पीला तरबूज देखने के लिए जहां लोगों का खेत पर आना जाना लगा रहता है, वहीं मंडी में भी लोगों की भीड़ देखने के लिए जुट जाती है। अखिल का दावा है कि पीला तरबूज का स्वाद और मिठास सामान्य हरे रंग के तरबूज से अधिक है। यह तरबूज तीन से पांच किलो वजन का होता है।
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तीन गुना दाम पर बिक रहा तरबूज
शामली। अखिल ने बताया कि प्रतिदिन तीन से चार क्विंटल तरबूज पैदा हो रहा है। तरबूज को शामली मंडी में लाकर बेचा जाता है। मंडी में तरबूज सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक दाम पर बिकता है, जिससे इसकी खेती करने में उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। मंडी व्यापारी सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने पहली बार पीला तरबूज देेेेखा है। जिले में अभी तक सिर्फ उनकी दुकान पर कसेरवा खुर्द निवासी अखिल के यहां से पीला तरबूज आ रहा है। मंडी में सामान्य तरबूज 8 से 10 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पीला तरबूज 20 से 25 रुपये तक बिकता है।
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दिल्ली की आजादपुर मंडी से खरीदा बीज
शामली। अखिल ने बताया कि पीले तरबूज का बीज आजादपुर मंडी दिल्ली से खरीदा था। इसे बाद घरोंडा में सरकारी फार्म में इसकी नर्सरी तैयार कराई गई। 25 फरवरी को फसल बोयी थी और 27 अप्रैल से मंडी में तरबूज जाना शुरू हो गया था। गन्ने का समय से भुगतान न मिलने पर उनका गन्ने की खेती से मोह भंग हो गया। उन्होंने करीब 20 बीघा में सब्जी की खेती कर रहे है, जिनमे करेला, तुरई, मिर्च, बैंगन की पैदावार हो रही है।