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समापन दिवस पर स्वास्थ्य विभाग को आई विश्व स्तनपान पखवाड़े की याद
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:30 AM IST
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कागजों में सिमटकर रह गया विश्व स्तनपान सप्ताह अभियान
शामली।
एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। यह सप्ताह केवल कागजों की खानापूर्ति तक सिमट गया। हां आखिरी दिन जरूर अधिकारियों को इसकी याद आई और मीडिया को विश्व स्तनपान दिवस के बारे में जानकारी दी। मां का दूध उसके बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं है। इसके लिए सरकार जोर दे रही है कि कम से कम छह माह तक बच्चे को उसकी मां अपना दूूध पिलाए। इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करके एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया गया। इसके लिए जिला स्तर, सीएचसी स्तर, आंगनबाड़ी सेंटर, आशा स्तर पर विभिन्न एक्टिविटी का आयोजन कर महिलाओं को जागरूक किया जाना था। मंगलवार को सप्ताह बीत गया, लेकिन इस संबंध में सीएचसी स्तर या फिर जिला स्तर पर एक्टिविटी नहीं की गई। यूं कहे कि कागजों में यह अभियान सिमट कर रह गया।
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में कार्यक्रम के नोडल डाक्टर रमेश चंद्रा ने बताया कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में विश्व स्तनपान सप्ताह चलाया गया है। उन्होंने कहा कि शिशुओं के लिए स्तनपान सर्वोत्तम आहार तथा शिशुओं का मौलिक अधिकार है। मां का दूध शिशुओं के व्यापक विकास, मानसिक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
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शामली।
एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। यह सप्ताह केवल कागजों की खानापूर्ति तक सिमट गया। हां आखिरी दिन जरूर अधिकारियों को इसकी याद आई और मीडिया को विश्व स्तनपान दिवस के बारे में जानकारी दी। मां का दूध उसके बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं है। इसके लिए सरकार जोर दे रही है कि कम से कम छह माह तक बच्चे को उसकी मां अपना दूूध पिलाए। इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करके एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया गया। इसके लिए जिला स्तर, सीएचसी स्तर, आंगनबाड़ी सेंटर, आशा स्तर पर विभिन्न एक्टिविटी का आयोजन कर महिलाओं को जागरूक किया जाना था। मंगलवार को सप्ताह बीत गया, लेकिन इस संबंध में सीएचसी स्तर या फिर जिला स्तर पर एक्टिविटी नहीं की गई। यूं कहे कि कागजों में यह अभियान सिमट कर रह गया।
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में कार्यक्रम के नोडल डाक्टर रमेश चंद्रा ने बताया कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में विश्व स्तनपान सप्ताह चलाया गया है। उन्होंने कहा कि शिशुओं के लिए स्तनपान सर्वोत्तम आहार तथा शिशुओं का मौलिक अधिकार है। मां का दूध शिशुओं के व्यापक विकास, मानसिक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
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