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दीन और दुनियावी तालीम करें हासिल: अहसान
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:04 AM IST
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जलालाबाद (शामली)। गांव हसनपुर लुहारी के मदरसा नूरिया इमदादिया अशरफिया में 59वां वार्षिक जलसा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर हिफ्ज करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी की गई। जलसे में क्षेत्र के हजारों लोगों ने शिरकत की। देवबंद, सहारनपुर, गंगोह और जलालाबाद से तशरीफ लाए उलमा ने खिताब किया।
गांव हसनपुर लुहारी में हुए सालाना जलसे की सदारत सहारनपुर मजाहिर उल उलूम के उस्ताद मौलाना साजिद साहब ने की। जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान से की गई। इस मौके पर दारुल उलूम (वक्फ) के सदर मुफ्ती अहसान ने कहा कि मौजूदा वक्त में दीन और दुनियावी तालीम सभी को हासिल करनी चाहिए। मां बाप का फर्ज है कि अपने बच्चों की परवरिश को लेकर संजीदा रहें। इल्म हासिल करने के बाद जब आप ओहदों पर पहुंचकर लोगों की खिदमत करते हैं तो यह भी इबादत में शुमार होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हजरत मौलाना मोहम्मद साजिद साहब ने कहा कि कुरान व हदीस पर अमल करने से जिंदगी और आखरत में सकून मिलता है। जानबूझकर किसी को तकलीफ देना इस्लाम के खिलाफ है। संचालन राशिद कासमी ने किया। इस मौके पर जावेद, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद मुकर्रम, उवैस, अब्दुल रहीम आदि छात्रों को हिफ्ज पूरा करने पर दस्तारबंदी की गई। जलसे के बाद मुल्क की तरक्की और अमन के लिए दुआ की गई। इस मौके पर बरकतउल्लाह, जीशान काजमी, गरफीउल्लाह, शराफत, फिरासत, कारी शहजाद, अब्दुल गफ्फार, सैय्यद वजाहत और काजी तारिक आदि मौजूद रहे।
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गांव हसनपुर लुहारी में हुए सालाना जलसे की सदारत सहारनपुर मजाहिर उल उलूम के उस्ताद मौलाना साजिद साहब ने की। जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान से की गई। इस मौके पर दारुल उलूम (वक्फ) के सदर मुफ्ती अहसान ने कहा कि मौजूदा वक्त में दीन और दुनियावी तालीम सभी को हासिल करनी चाहिए। मां बाप का फर्ज है कि अपने बच्चों की परवरिश को लेकर संजीदा रहें। इल्म हासिल करने के बाद जब आप ओहदों पर पहुंचकर लोगों की खिदमत करते हैं तो यह भी इबादत में शुमार होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हजरत मौलाना मोहम्मद साजिद साहब ने कहा कि कुरान व हदीस पर अमल करने से जिंदगी और आखरत में सकून मिलता है। जानबूझकर किसी को तकलीफ देना इस्लाम के खिलाफ है। संचालन राशिद कासमी ने किया। इस मौके पर जावेद, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद मुकर्रम, उवैस, अब्दुल रहीम आदि छात्रों को हिफ्ज पूरा करने पर दस्तारबंदी की गई। जलसे के बाद मुल्क की तरक्की और अमन के लिए दुआ की गई। इस मौके पर बरकतउल्लाह, जीशान काजमी, गरफीउल्लाह, शराफत, फिरासत, कारी शहजाद, अब्दुल गफ्फार, सैय्यद वजाहत और काजी तारिक आदि मौजूद रहे।
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