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डीएम के सत्यापन में खुली स्वास्थ्य सेवाओं की पोल
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली। जिलाधिकारी ने एकदम नए तरीके से स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति का सत्यापन कराया। डीएम के स्टाफ ने मरीज या उनके परिजन बनकर स्वास्थ्य कर्मियों को फोन कर उनकी उपस्थिति पूछी। इस पता चला कि कई कर्मी ड्यूटी पर ही नहीं थे। किसी ने अपने निजी काम से बाहर बताया तो अधिकतर के मोबाइल ही बंद मिले। डीएम ने सीएमओ से इस संबंध में कार्रवाई कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और उपकेंद्रों पर अक्सर स्टाफ के गायब होने की सूचनाएं मिल रही थीं। डीएम द्वारा गांवों में किए जा रहे भ्रमण के दौरान इसकी जानकारी उन्हें मिली थी कि गांव में तैनात एएनएम और आशा भी अक्सर गायब रहती हैं। डीएम ने इसकी पड़ताल कराने के लिए सीएमओ कार्यालय से जिले के तमाम सीएचसी, पीएचसी और उपकेंद्रों पर तैनात प्रत्येक स्टाफ के मोबाइल नंबरों की सूची मंगा ली थी। मंगलवार को डीएम ने इस सूची के आधार पर अपने स्टाफ से फोन पर ही सबकी लोकेशन चेक कराई। स्टाफ ने खुद को मरीज, ग्रामीण आदि बताकर उनके नंबर मिलाकर बात की तो असलियत सामने आई। डीएम कार्यालय के अनुसार खेड़ी करमू उपकेंद्र की आशा मंजू से करीब सवा दो बजे बात की गई तो पता चला कि वे अपनी ड्यूटी पर नहीं है। शामली किसी निजी काम से आई थी। करीब ढाई बजे लांक उपकेंद्र की आशा राकेश ने बताया कि वे अपने घर पर हैं। कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। थानाभवन सीएचसी के फार्मेसिस्ट से फोन करने पर पता चला कि वे 30 नवंबर से ही अवकाश पर हैं।
उधर, उपकेंद्र गंगेरू पर तैनात आशा सुखबीरी का मोबाइल नंबर ही गलत दिया गया था। गंगेरु की आशा अनीस फातमा ने बताया कि वे घर पर खाना खाने आई हैं। गंगेरु की आशा किरन तो अपनी रिश्तेदारी में हापुड़ ही गई थी। उपकेंद्र सल्फा की अशा सुनम ने फोन ही रिसीव नहीं किया। उपकेंद्र कुड़ाना पर कार्यरत एएनएम सरिता, अनुराधा, कविता का मोबाइल बंद मिला। आशा कविता, इसरत, कुसुम मिथलेस शर्मिष्ठा और शिमला का भी मोबाइल बंद था। आशा सीमा से बात फोन पर बात की गई तो बताया गया कि वो अभी शामली सीएचसी में शामली सीएचसी पर नसबंदी के अभिलेख लेकर आई है। आशा रविता ने भी खुद को सीएचसी शामली में बताया। उपकेंद्र गोहरपुर की आशा ऊषा ने भी दो बजे बताया कि वे शामली सीएचसी में टीकाकरण के काम से आई हैं।
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डीएम कार्यालय के अनुसार सत्यापन में कई स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल नंबर बंद मिले हैं। एक सीरीज वाले सीयूजी नंबर अधिकतर बंद मिले। डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं वे सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर चेक करा लें कि जिन कर्मियों ने खुद को ड्यूटी पर बताया वे लोग वहां वास्तव में थे या नहीं। ड्यूटी छोड़कर दूसरी जगह जाने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका स्पष्टीकरण लेने को कहा गया है। डीएम ने सीएमओ से पूरे मामले की रिपोर्ट एक सप्ताह में देने के निर्देश दिए हैं।
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शामली। जिलाधिकारी ने एकदम नए तरीके से स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति का सत्यापन कराया। डीएम के स्टाफ ने मरीज या उनके परिजन बनकर स्वास्थ्य कर्मियों को फोन कर उनकी उपस्थिति पूछी। इस पता चला कि कई कर्मी ड्यूटी पर ही नहीं थे। किसी ने अपने निजी काम से बाहर बताया तो अधिकतर के मोबाइल ही बंद मिले। डीएम ने सीएमओ से इस संबंध में कार्रवाई कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और उपकेंद्रों पर अक्सर स्टाफ के गायब होने की सूचनाएं मिल रही थीं। डीएम द्वारा गांवों में किए जा रहे भ्रमण के दौरान इसकी जानकारी उन्हें मिली थी कि गांव में तैनात एएनएम और आशा भी अक्सर गायब रहती हैं। डीएम ने इसकी पड़ताल कराने के लिए सीएमओ कार्यालय से जिले के तमाम सीएचसी, पीएचसी और उपकेंद्रों पर तैनात प्रत्येक स्टाफ के मोबाइल नंबरों की सूची मंगा ली थी। मंगलवार को डीएम ने इस सूची के आधार पर अपने स्टाफ से फोन पर ही सबकी लोकेशन चेक कराई। स्टाफ ने खुद को मरीज, ग्रामीण आदि बताकर उनके नंबर मिलाकर बात की तो असलियत सामने आई। डीएम कार्यालय के अनुसार खेड़ी करमू उपकेंद्र की आशा मंजू से करीब सवा दो बजे बात की गई तो पता चला कि वे अपनी ड्यूटी पर नहीं है। शामली किसी निजी काम से आई थी। करीब ढाई बजे लांक उपकेंद्र की आशा राकेश ने बताया कि वे अपने घर पर हैं। कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। थानाभवन सीएचसी के फार्मेसिस्ट से फोन करने पर पता चला कि वे 30 नवंबर से ही अवकाश पर हैं।
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उधर, उपकेंद्र गंगेरू पर तैनात आशा सुखबीरी का मोबाइल नंबर ही गलत दिया गया था। गंगेरु की आशा अनीस फातमा ने बताया कि वे घर पर खाना खाने आई हैं। गंगेरु की आशा किरन तो अपनी रिश्तेदारी में हापुड़ ही गई थी। उपकेंद्र सल्फा की अशा सुनम ने फोन ही रिसीव नहीं किया। उपकेंद्र कुड़ाना पर कार्यरत एएनएम सरिता, अनुराधा, कविता का मोबाइल बंद मिला। आशा कविता, इसरत, कुसुम मिथलेस शर्मिष्ठा और शिमला का भी मोबाइल बंद था। आशा सीमा से बात फोन पर बात की गई तो बताया गया कि वो अभी शामली सीएचसी में शामली सीएचसी पर नसबंदी के अभिलेख लेकर आई है। आशा रविता ने भी खुद को सीएचसी शामली में बताया। उपकेंद्र गोहरपुर की आशा ऊषा ने भी दो बजे बताया कि वे शामली सीएचसी में टीकाकरण के काम से आई हैं।
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डीएम कार्यालय के अनुसार सत्यापन में कई स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल नंबर बंद मिले हैं। एक सीरीज वाले सीयूजी नंबर अधिकतर बंद मिले। डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं वे सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर चेक करा लें कि जिन कर्मियों ने खुद को ड्यूटी पर बताया वे लोग वहां वास्तव में थे या नहीं। ड्यूटी छोड़कर दूसरी जगह जाने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका स्पष्टीकरण लेने को कहा गया है। डीएम ने सीएमओ से पूरे मामले की रिपोर्ट एक सप्ताह में देने के निर्देश दिए हैं।