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श्रीरावण वेदवती संवाद की लीला का सुंदर मंचन देख्रकर दर्शक हुए मंत्र मुग्ध
Updated Mon, 18 Sep 2017 12:32 AM IST
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शामली।
श्री हनुमान धाम पर रामलीला महोत्सव में रावण जन्म और वेदवती संवाद की लीला का मंचन किया गया। रामलीला महोत्सव में दर्शकों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है।
शनिवार रात हनुमान धाम पर 48वां रामलीला महोत्सव के दौरान गणेश वंदना के साथ रामलीला का मंचन हुआ है। रावण, कुंभकरण, विभीषण, सूपर्णखां का जन्म होता है। जन्म के बाद तीनों भाई ब्रह्मा की तपस्या करते हैं। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा वरदान देने के लिए आते हैं। तीनों भाइयों को वरदान देकर चलते जाते हैं। रावण अमरता का वरदान मांगता है। ब्रह्मा अमरता का वरदान देने से इंकार कर देते हैं। वह सिर्फ इतना वरदान देते हैं कि मनुष्य वध करेंगे। कुंभकरण इंद्रासन मांगता है, उनके कंठ पर सरस्वती बैठने के कारण व इंद्रासन के स्थान पर निंद्रासन मांग लेता है। वरदान के बाद रावण वन में ऋषि कन्या वेदवती को देखता है। वेदवती को देखकर शादी का प्रस्ताव रखता है। वेदवती रावण से शादी के प्रस्ताव को ठुकरा देती है। रावण जबरदस्ती करता है। वह रावण को श्राप देती है कि स्त्री ही उसकी मौत परिवार का सर्वनाश का कारण बनेगी।
रावण पुष्पक विमान से कैलाश पर्वत पर जाता है। रावण कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करता है और वह विफल हो जाता है। भगवान शिव का स्मरण करने पर वह दर्शन देते है। रावण से प्रसन्न होकर चंद्रहास भेंट करते है। रामलीला रंगमंच पर रावण का अभिनय नरेंद्र सैनी, वेदवती सोनू वर्मा के संवाद से सुनकर मंत्र मुग्ध हो गए। रामलीला संचालन लोकेश शर्मा ने किया गया।
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श्री हनुमान धाम पर रामलीला महोत्सव में रावण जन्म और वेदवती संवाद की लीला का मंचन किया गया। रामलीला महोत्सव में दर्शकों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है।
शनिवार रात हनुमान धाम पर 48वां रामलीला महोत्सव के दौरान गणेश वंदना के साथ रामलीला का मंचन हुआ है। रावण, कुंभकरण, विभीषण, सूपर्णखां का जन्म होता है। जन्म के बाद तीनों भाई ब्रह्मा की तपस्या करते हैं। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा वरदान देने के लिए आते हैं। तीनों भाइयों को वरदान देकर चलते जाते हैं। रावण अमरता का वरदान मांगता है। ब्रह्मा अमरता का वरदान देने से इंकार कर देते हैं। वह सिर्फ इतना वरदान देते हैं कि मनुष्य वध करेंगे। कुंभकरण इंद्रासन मांगता है, उनके कंठ पर सरस्वती बैठने के कारण व इंद्रासन के स्थान पर निंद्रासन मांग लेता है। वरदान के बाद रावण वन में ऋषि कन्या वेदवती को देखता है। वेदवती को देखकर शादी का प्रस्ताव रखता है। वेदवती रावण से शादी के प्रस्ताव को ठुकरा देती है। रावण जबरदस्ती करता है। वह रावण को श्राप देती है कि स्त्री ही उसकी मौत परिवार का सर्वनाश का कारण बनेगी।
रावण पुष्पक विमान से कैलाश पर्वत पर जाता है। रावण कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करता है और वह विफल हो जाता है। भगवान शिव का स्मरण करने पर वह दर्शन देते है। रावण से प्रसन्न होकर चंद्रहास भेंट करते है। रामलीला रंगमंच पर रावण का अभिनय नरेंद्र सैनी, वेदवती सोनू वर्मा के संवाद से सुनकर मंत्र मुग्ध हो गए। रामलीला संचालन लोकेश शर्मा ने किया गया।
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