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शामली में सीता हरण- जटायू वध, जलालाबाद में बाली वध की लीला का मंचन
Updated Wed, 27 Sep 2017 02:03 AM IST
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शामली/जलालाबाद।
श्री हनुमान धाम के रामलीला रंगमंच पर सोमवार रात सीता हरण, जटायु वध और जलालाबाद में बाली वध की लीला का मंचन किया गया।
गणेश आरती के बाद रामलीला का मंचन शुरू किया गया। राम वनवास के दौरान अगस्त मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं और वन में रहने का स्थान पूछते हैं। राम पचंवटी में अपनी कुटिया बनाते हैं। जहां रावण की बहन सूपर्णखा पहुंचती है और राम को देखकर मोहित हो जाती है। वह विवाह का प्रस्ताव रखती है। राम विवाहित बताकर लक्ष्मण के पास भेजते है। जहां लक्ष्मण शादी के प्रस्ताव को ठुकरा देता है। सूपर्णखा क्रोधित होकर सीता पर हमला करती है। जिस पर लक्ष्मण उसके नाक, कान काट देता है। वह खरदूषण के पास जाकर अपना हाल सुनाती है। खरदूषण और राम में युद्ध होता है जिसमें खरदूषण मारा जाता है। सूपर्णखा रावण को सारी बता बताती है। रावण साधू का वेश बनाकर सीता हरण कर लेता है।
सूपर्णखा का अभिनय सोनू वर्मा, राम रवि पाठक, लक्ष्मण निशांत पाठक, रावण नरेंद्र सैनी, सीता आशु निर्वाल, मारीच प्रदीप सैनी, खरदूषण विजय प्रदीप ने किया। मंच निर्देशक वैद्य उपेंद्र द्विवेदी आदेश शर्मा ने किया। शृंगार रामेश्वर बच्छ, बालकिशन सैनी ने किया। दृश्य निर्देशक दीपक सैनी, विजय पेंटर आदि मौजूद रहे।
जलालाबाद। गांधी चौक मैदान में चल रही पंचायती रामलीला में सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि ईओ शैलेंद्र मिश्रा ने आरती कर रामलीला का शुभारंभ किया।
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सीता के वियोग में राम- लक्ष्मण वन में सीता को तलाश करते हैं। ऋषिमूक पर्वत पर सुग्रीव हनुमान को श्रीराम लक्ष्मण का परिचय जाने के लिए भेजते हैं। सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता होती है। सुग्रीव अपने भाई बाली के संबंध पूरा वृतांत सुनाते हैं। जिसके बाद राम बाली का वध करते हैं। राम लीला के मंचन में राम सुमित, लक्ष्मण हिमांशु, हनुमान देवराज, सुग्रीव बोबी शर्मा, बाली डॉ. बिट्टू कोरी, शबरी रामदत्त आहूजा आदि की मुख्य भूमिका सराहनीय रही। कार्यक्रम में डॉ. सुनील पंवार, रामकुमार पंवार, देवेंद्र शर्मा, लाला प्रमोद मित्तल देवराज जुनेजा, मिठन लाल, प्रधान लाल सिंह, अनुज प्रजापति, बाबूराम नायक, राजकुमार रुहेला आदि समिति का सहयोग रहा।
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श्री हनुमान धाम के रामलीला रंगमंच पर सोमवार रात सीता हरण, जटायु वध और जलालाबाद में बाली वध की लीला का मंचन किया गया।
गणेश आरती के बाद रामलीला का मंचन शुरू किया गया। राम वनवास के दौरान अगस्त मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं और वन में रहने का स्थान पूछते हैं। राम पचंवटी में अपनी कुटिया बनाते हैं। जहां रावण की बहन सूपर्णखा पहुंचती है और राम को देखकर मोहित हो जाती है। वह विवाह का प्रस्ताव रखती है। राम विवाहित बताकर लक्ष्मण के पास भेजते है। जहां लक्ष्मण शादी के प्रस्ताव को ठुकरा देता है। सूपर्णखा क्रोधित होकर सीता पर हमला करती है। जिस पर लक्ष्मण उसके नाक, कान काट देता है। वह खरदूषण के पास जाकर अपना हाल सुनाती है। खरदूषण और राम में युद्ध होता है जिसमें खरदूषण मारा जाता है। सूपर्णखा रावण को सारी बता बताती है। रावण साधू का वेश बनाकर सीता हरण कर लेता है।
सूपर्णखा का अभिनय सोनू वर्मा, राम रवि पाठक, लक्ष्मण निशांत पाठक, रावण नरेंद्र सैनी, सीता आशु निर्वाल, मारीच प्रदीप सैनी, खरदूषण विजय प्रदीप ने किया। मंच निर्देशक वैद्य उपेंद्र द्विवेदी आदेश शर्मा ने किया। शृंगार रामेश्वर बच्छ, बालकिशन सैनी ने किया। दृश्य निर्देशक दीपक सैनी, विजय पेंटर आदि मौजूद रहे।
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जलालाबाद। गांधी चौक मैदान में चल रही पंचायती रामलीला में सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि ईओ शैलेंद्र मिश्रा ने आरती कर रामलीला का शुभारंभ किया।
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सीता के वियोग में राम- लक्ष्मण वन में सीता को तलाश करते हैं। ऋषिमूक पर्वत पर सुग्रीव हनुमान को श्रीराम लक्ष्मण का परिचय जाने के लिए भेजते हैं। सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता होती है। सुग्रीव अपने भाई बाली के संबंध पूरा वृतांत सुनाते हैं। जिसके बाद राम बाली का वध करते हैं। राम लीला के मंचन में राम सुमित, लक्ष्मण हिमांशु, हनुमान देवराज, सुग्रीव बोबी शर्मा, बाली डॉ. बिट्टू कोरी, शबरी रामदत्त आहूजा आदि की मुख्य भूमिका सराहनीय रही। कार्यक्रम में डॉ. सुनील पंवार, रामकुमार पंवार, देवेंद्र शर्मा, लाला प्रमोद मित्तल देवराज जुनेजा, मिठन लाल, प्रधान लाल सिंह, अनुज प्रजापति, बाबूराम नायक, राजकुमार रुहेला आदि समिति का सहयोग रहा।