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20 साल की उम्र से कैंसर परीक्षण कराएं महिलाएं
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 13 Dec 2015 11:31 PM IST
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भारत में स्तन कैंसर रोगी काफी बढ़ रहे हैं और यह चेताने वाली स्थिति है। ऐसे में हर महिला को 20 साल की उम्र के बाद स्वयं कैंसर का परीक्षण कराने को प्रेरित किया जाना चाहिए और 30 साल की ऊपर वाली महिलाओं को रेगुलर मैमोग्राफी करानी चाहिए ताकि शंका दिखते ही तत्काल उचित उपचार कर रोग को दूर किया जा सके। कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. पीयूष अग्रवाल ने रविवार को यहां आईएमए भवन में गंभीर रोगों संबंधी सजगता विषय पर आईएमए की ओर से आयोजित सेमिनार अपना संबोधन दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि पुरुषों में मुख, गले एवं गर्दन का कैंसर, जबकि महिलाओं के गर्भाशय के मुख के कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। मुख एवं गले के कैंसर में तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट एवं शराब सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है। फलों का सेवन, दो बार टूथ ब्रश करना, कसरत इसके बचाव में लाभदायक है। बड़ी आंत के कैंसर के बारे में लक्षण जैसे पाखाना में खून आना, कब्ज या पतला पाखाना होना आदि है। इसके लिए 40 साल की उम्र के पश्चात हर दस में कोलनोस्कोपी अवश्य करानी चाहिए। गैस्ट्रोइंट्रोइंट्रोलाजिस्ट डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि हिपैटाइटिस बी, हिपैटाइटिस सी से ज्यादा खतरनाक है। इसका इलाज उपलब्ध है, लेकिन अत्यंत कठिन है। हिपैटाइटिस सी का इलाज जीवन भर चलता है। इसकी जांच अवश्य कराएं। इसके बचाव के लिए नियमित टीकाकरण आवश्यक है।
सेमिनार में साई अस्पताल (बरेली) के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन अग्रवाल ने दिल के वाल्व संबंधी रोगों के कारण, लक्षण, निदान और उपचार के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्टैफ्लोकोकल नाम बैक्टीरिया से रयूमैटिक हर्ट डिसीज नामक बीमारी होती है। जिससे दिल वाल्व खराब होने की सर्वाधिक प्रबल संभावना रहती है। डीटीओ डॉ. अनिल गुप्ता ने सभी चिकित्सकों से टीबी नोटीफिकेशन में सहयोग की अपील की। अंत में आईएमए अध्यक्ष डॉ. सोमशेखर दीक्षित ने आभार जताया। संचालन डॉ. संजय पाठक ने किया। इस दौरान डॉ. अनिल सूद, डॉ. जेएम सक्सेना, डॉ. एसके मेहरोत्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. विजय पाठक, डॉ. पुनीत टंडन, डॉ. अनूप गुप्ता, डॉ. अरविंद किशोर वर्मा, डॉ. अनूप गुप्ता, डॉ. मंजुला सक्सेना, डॉ. कल्पना अग्रवाल, डॉ. आशमा हिकमत, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. शुभा दीक्षित, डॉ. नुपूर श्रीवास्तव आदि मौजूद थीं।
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उन्होंने बताया कि पुरुषों में मुख, गले एवं गर्दन का कैंसर, जबकि महिलाओं के गर्भाशय के मुख के कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। मुख एवं गले के कैंसर में तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट एवं शराब सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है। फलों का सेवन, दो बार टूथ ब्रश करना, कसरत इसके बचाव में लाभदायक है। बड़ी आंत के कैंसर के बारे में लक्षण जैसे पाखाना में खून आना, कब्ज या पतला पाखाना होना आदि है। इसके लिए 40 साल की उम्र के पश्चात हर दस में कोलनोस्कोपी अवश्य करानी चाहिए। गैस्ट्रोइंट्रोइंट्रोलाजिस्ट डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि हिपैटाइटिस बी, हिपैटाइटिस सी से ज्यादा खतरनाक है। इसका इलाज उपलब्ध है, लेकिन अत्यंत कठिन है। हिपैटाइटिस सी का इलाज जीवन भर चलता है। इसकी जांच अवश्य कराएं। इसके बचाव के लिए नियमित टीकाकरण आवश्यक है।
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सेमिनार में साई अस्पताल (बरेली) के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन अग्रवाल ने दिल के वाल्व संबंधी रोगों के कारण, लक्षण, निदान और उपचार के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्टैफ्लोकोकल नाम बैक्टीरिया से रयूमैटिक हर्ट डिसीज नामक बीमारी होती है। जिससे दिल वाल्व खराब होने की सर्वाधिक प्रबल संभावना रहती है। डीटीओ डॉ. अनिल गुप्ता ने सभी चिकित्सकों से टीबी नोटीफिकेशन में सहयोग की अपील की। अंत में आईएमए अध्यक्ष डॉ. सोमशेखर दीक्षित ने आभार जताया। संचालन डॉ. संजय पाठक ने किया। इस दौरान डॉ. अनिल सूद, डॉ. जेएम सक्सेना, डॉ. एसके मेहरोत्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. विजय पाठक, डॉ. पुनीत टंडन, डॉ. अनूप गुप्ता, डॉ. अरविंद किशोर वर्मा, डॉ. अनूप गुप्ता, डॉ. मंजुला सक्सेना, डॉ. कल्पना अग्रवाल, डॉ. आशमा हिकमत, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. शुभा दीक्षित, डॉ. नुपूर श्रीवास्तव आदि मौजूद थीं।
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