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बेमौसम बारिश से पारा गिरा, मौसम हुआ ठंडा
शाहजहांपुर
Updated Mon, 30 Mar 2015 11:27 PM IST
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मौसम के मिजाज ने रविवार रात से फिर करवट बदल ली। ठंडी हवा के झोंकों के साथ रविवार की रात और सोमवार सुबह तक बूंदाबांदी होती रही। सर्द हवाएं चलने से तापमान 10 डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। फिजां में नमी के कारण आर्द्रता में भी करीब 40 फीसदी बढ़ोत्तरी रिकार्ड की गई।
रविवार रात करीब 11 बजे पहले तो तेज हवाएं चलना शुरू हुईं। इसके कुछ देर बाद ही बूंदाबांदी होना शुरू हो गई। यह बारिश सुबह करीब 11 बजे तक होती रही है। इसके बाद कुछ देर के लिए धूप खिली, लेकिन थोड़ी ही देर में फिर से बादल छा गए। इसके बाद दोपहर में फिर से बारिश होने लगी, हालांकि शाम तक मौसम साफ हो गया। रात के वक्त बारिश होने की वजह से इसका सामान्य जनजीवन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
इस संबंध में गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक मनमोहन सिंह ने बताया कि रविवार रात और सोमवार को दिन में पांच बजे तक छह मिलीमीटर बारिश हुई। इससे अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस से घटकर 24.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं आर्द्रता बढ़कर 83 प्रतिशत हो गई। उन्होंने मंगलवार को बादल छाए रहने की आशंका भी जाहिर की है।
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किसानों के माथे पर फिर उभरीं चिंता की लकीरें
शाहजहांपुर। बेमौसम की बरसात से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें फिर से उभरने लगी हैं। किसान पिछले दिनों बारिश से हुई फसली क्षति से अभी उबर भी नहीं पाए कि मौसम के बिगड़ैल तेवरों ने परेशान कर दिया। दरअसल, किसान बारिश से भीगी गेहूं की फसल सूखने का इंतजार कर रहे थे। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय ने बताया कि इसी वजह से अभी तक बमुश्किल 20 हजार हेक्टेयर गेहूं की कटाई हो पाई जो कि कुल क्षेत्रफल का सिर्फ दस फीसदी है।
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जिले में केवल पुवायां बेल्ट में कुछ बड़े फॉर्मरों ने गेहूं कटवाना शुरू किया, क्योंकि उन्होंने बुवाई भी जल्दी कर ली थी। इसके बावजूद बालियों में नमी होने कटे हुए गेहूं की गहाई में दिक्कतें आ रही हैं। दोबारा हुई बारिश से बालियों में आई नमी को सूखने में कम से कम पांच-छह दिन लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में कटाई के लिए किसानों को खेतों के पूरी तरह सूखने का इंतजार करना होगा।
बालियों में कल्ले फूटने सूंडी लगने का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह के अनुसार पिछली बरसात मेें गेहूं के जो पौधे खेतों में गिर गए, उनकी बालियां दोबारा हुई बारिश से नमी और मिट्टी का साथ पाकर खेत में दोबारा जम सकती हैं। ऐसी फसल को काटकर पक्के स्थान पर भंडारित कर सुखाया जाए तो गहाई में आसानी होगी। बालियों में कई दिन नमी रहने पर परजीवी सूंड़ियां लग सकती हैं। इससे बचाव के लिए किसान आधा लीटर क्यूनालफॉस और पांच सौ ग्राम मैंकोजेब एम 45 पाउडर का घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं।
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रविवार रात करीब 11 बजे पहले तो तेज हवाएं चलना शुरू हुईं। इसके कुछ देर बाद ही बूंदाबांदी होना शुरू हो गई। यह बारिश सुबह करीब 11 बजे तक होती रही है। इसके बाद कुछ देर के लिए धूप खिली, लेकिन थोड़ी ही देर में फिर से बादल छा गए। इसके बाद दोपहर में फिर से बारिश होने लगी, हालांकि शाम तक मौसम साफ हो गया। रात के वक्त बारिश होने की वजह से इसका सामान्य जनजीवन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
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इस संबंध में गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक मनमोहन सिंह ने बताया कि रविवार रात और सोमवार को दिन में पांच बजे तक छह मिलीमीटर बारिश हुई। इससे अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस से घटकर 24.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं आर्द्रता बढ़कर 83 प्रतिशत हो गई। उन्होंने मंगलवार को बादल छाए रहने की आशंका भी जाहिर की है।
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किसानों के माथे पर फिर उभरीं चिंता की लकीरें
शाहजहांपुर। बेमौसम की बरसात से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें फिर से उभरने लगी हैं। किसान पिछले दिनों बारिश से हुई फसली क्षति से अभी उबर भी नहीं पाए कि मौसम के बिगड़ैल तेवरों ने परेशान कर दिया। दरअसल, किसान बारिश से भीगी गेहूं की फसल सूखने का इंतजार कर रहे थे। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय ने बताया कि इसी वजह से अभी तक बमुश्किल 20 हजार हेक्टेयर गेहूं की कटाई हो पाई जो कि कुल क्षेत्रफल का सिर्फ दस फीसदी है।
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जिले में केवल पुवायां बेल्ट में कुछ बड़े फॉर्मरों ने गेहूं कटवाना शुरू किया, क्योंकि उन्होंने बुवाई भी जल्दी कर ली थी। इसके बावजूद बालियों में नमी होने कटे हुए गेहूं की गहाई में दिक्कतें आ रही हैं। दोबारा हुई बारिश से बालियों में आई नमी को सूखने में कम से कम पांच-छह दिन लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में कटाई के लिए किसानों को खेतों के पूरी तरह सूखने का इंतजार करना होगा।
बालियों में कल्ले फूटने सूंडी लगने का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह के अनुसार पिछली बरसात मेें गेहूं के जो पौधे खेतों में गिर गए, उनकी बालियां दोबारा हुई बारिश से नमी और मिट्टी का साथ पाकर खेत में दोबारा जम सकती हैं। ऐसी फसल को काटकर पक्के स्थान पर भंडारित कर सुखाया जाए तो गहाई में आसानी होगी। बालियों में कई दिन नमी रहने पर परजीवी सूंड़ियां लग सकती हैं। इससे बचाव के लिए किसान आधा लीटर क्यूनालफॉस और पांच सौ ग्राम मैंकोजेब एम 45 पाउडर का घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं।