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Shahjahanpur News: युवक की गोली मारकर हत्या के दोषी मौसा को आजीवन कारावास
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शाहजहांपुर। युवक की गोली मारकर हत्या के दोषी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी ने अपनी पत्नी के भतीजे की गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोनों पक्षों में लेनदेन का विवाद चल रहा था।
पुवायां के मोहल्ला कुरगंजा की रहने वालीं गीता देवी ने तहरीर देकर बताया था कि सात अगस्त 2015 की शाम उनका बेटा राहुल घर पर था। तभी उनका बहनोई रामभरोसे निवासी मोहल्ला हरदयाल कूंचा, पुवायां घर में आया। कोई कुछ समझ पाता उसने बेटे के सीने में गोली मार दी। यह घटना देखकर बेटी लक्ष्मी देवी चीख पड़ी। पति बंटी गुप्ता घर के अंदर आए तो देखा कि रामभरोसे घर से भाग रहा है। उन्होंने पीछा किया तो वह फायर करते हुए भाग गया। अस्पताल ले जाते समय राहुल की मृत्यु हो गई। पुलिस ने रामभरोसे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत भेजा।
गीता देवी ने अदालत में गवाही में बताया था कि उनकी शादी 22 वर्ष पूर्व रामसरन से हुई थी। उनके तीन बच्चे थे। बाद में उन्होंने रामसरन से तलाक लेकर बंटी से विवाह कर लिया था। उनकी बड़ी बहन मोरकली की शादी रामभरोसे से हुई थी। उसकी बहन के घर में सरकारी गल्ले की दुकान थी। उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। इस कारण उसकी बहन ने उनसे 50 हजार रुपये मांगे थे।
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उन्होंने अपनी भैंस बेचकर बहन को रुपये दिए थे। जब वह अपने रुपये वापस मांगती थीं तो मोरकली और उनका पति रामभरोसे झगड़ा करने लगते थे। इसी खुन्नस में वारदात को अंजाम दिया गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश नुसरत खान ने रामभरोसे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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पुवायां के मोहल्ला कुरगंजा की रहने वालीं गीता देवी ने तहरीर देकर बताया था कि सात अगस्त 2015 की शाम उनका बेटा राहुल घर पर था। तभी उनका बहनोई रामभरोसे निवासी मोहल्ला हरदयाल कूंचा, पुवायां घर में आया। कोई कुछ समझ पाता उसने बेटे के सीने में गोली मार दी। यह घटना देखकर बेटी लक्ष्मी देवी चीख पड़ी। पति बंटी गुप्ता घर के अंदर आए तो देखा कि रामभरोसे घर से भाग रहा है। उन्होंने पीछा किया तो वह फायर करते हुए भाग गया। अस्पताल ले जाते समय राहुल की मृत्यु हो गई। पुलिस ने रामभरोसे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत भेजा।
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गीता देवी ने अदालत में गवाही में बताया था कि उनकी शादी 22 वर्ष पूर्व रामसरन से हुई थी। उनके तीन बच्चे थे। बाद में उन्होंने रामसरन से तलाक लेकर बंटी से विवाह कर लिया था। उनकी बड़ी बहन मोरकली की शादी रामभरोसे से हुई थी। उसकी बहन के घर में सरकारी गल्ले की दुकान थी। उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। इस कारण उसकी बहन ने उनसे 50 हजार रुपये मांगे थे।
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उन्होंने अपनी भैंस बेचकर बहन को रुपये दिए थे। जब वह अपने रुपये वापस मांगती थीं तो मोरकली और उनका पति रामभरोसे झगड़ा करने लगते थे। इसी खुन्नस में वारदात को अंजाम दिया गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश नुसरत खान ने रामभरोसे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।