{"_id":"630a671194579c137a0d25cd","slug":"traffic-restored-with-water-on-the-roads-boat-support-in-villages-shahjahanpur-news-bly495722393","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद कई तटवर्ती गांव बाढ़ से प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद कई तटवर्ती गांव बाढ़ से प्रभावित
विज्ञापन
शाहजहांपुर। नरौरा बैराज और उत्तराखंड के बांधों से अतिरिक्त पानी की निकासी कम होने के साथ ही गंगा और रामगंगा के जलस्तर में शनिवार को दूसरे दिन गिरावट जारी रही। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रास्तों पर भरा पानी उतरने से आवागमन सामान्य होने लगा है। हालांकि आजाद नगर और इस्लाम नगर के रास्ते बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण वहां के ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को शनिवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी का बहाव करीब पांच हजार क्यूसेक घटकर 37441 क्यूसेक हो गया है। कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर भी 20 सेमी घटकर 142.85 मीटर हो गया है। उधर, रामनगर, किच्छा, खो, हरेली आदि बांधों-बैराजों से रामगंगा में जाने वाले पानी की मात्रा भी एक हजार क्यूसेक कम होकर 2080 क्यूसेक हो गई है। इस कारण बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा आठ सेमी घटकर 158.34 मीटर पर आ गई है। जलस्तर में कमी के कारण परौर से लेकर अल्हागंज तक रामगंगा के तटीय गांवों से बाढ़ का खतरा टलने लगा है।
जलालाबाद-मैनपुरी-एटा हाईवे पर यातायात शुरू
गंगा की गोद मे बसे ग्राम आजाद नगर और इस्लाम नगर में भरा बाढ़ का पानी धीरे धीरे निकल रहा है। सड़कों पर बह रहा बाढ़ का पानी भी कम हो जाने से यातायात शुरू हो गया है। जलालाबाद-शमशाबाद-मैनपुरी-एटा स्टेट हाईवे पर ग्राम चौंरा के निकट बह रहा बाढ़ का पानी कम हो जाने से यातायात सुचारू हो गया है। चौंरा-इस्लामनगर, बांसखेड़ा संपर्क मार्ग पर भी बाढ़ का पानी कम हो जाने से दुपहिया वाहन निकलने लगे हैं। इसी तरह भरतपुर-पैलानी संपर्क मार्ग भी चालू हो गया है।
विज्ञापन
आजादनगर के बाशिंदों की दिक्कतें बरकरार
बाढ़ घटने के बाद भी आजाद नगर के बाशिंदों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बाढ़ से चौतरफा घिरे इस गांव के बाशिंदे अभी गांव से बाहर निकलने के लिए नाव का ही सहारा ले रहे हैं। इस्लामनगर के दक्षिणी भाग के निचले हिस्से में अभी पानी भरा हुआ है।
बाढ़ में डूबीं फसलें नष्ट होने की आशंका
बाढ़ में गंगा के खादर में बोई गई उर्द, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का, शकरकंद आदि फसलें डूब गई हैं। किसानों को आशंका है कि गंगा में फिर पानी बढ़ा तो डूबी फसलों को बचाना कठिन होगा और वह नष्ट हो जाएंगी। हालांकि, गन्ने की फसल को खेतों में पानी भरने से फायदा हुआ है। बाढ़ से घिरी गन्ना की फसल में दीमक आदि जो भी कीट रोग लगे थे, वे बाढ़ से से खत्म हो गए हैं। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो फसलें दो-तीन दिन डूबी रहीं, उन्हें पानी से कोई खतरा नहीं है।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को शनिवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी का बहाव करीब पांच हजार क्यूसेक घटकर 37441 क्यूसेक हो गया है। कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर भी 20 सेमी घटकर 142.85 मीटर हो गया है। उधर, रामनगर, किच्छा, खो, हरेली आदि बांधों-बैराजों से रामगंगा में जाने वाले पानी की मात्रा भी एक हजार क्यूसेक कम होकर 2080 क्यूसेक हो गई है। इस कारण बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा आठ सेमी घटकर 158.34 मीटर पर आ गई है। जलस्तर में कमी के कारण परौर से लेकर अल्हागंज तक रामगंगा के तटीय गांवों से बाढ़ का खतरा टलने लगा है।
विज्ञापन
जलालाबाद-मैनपुरी-एटा हाईवे पर यातायात शुरू
गंगा की गोद मे बसे ग्राम आजाद नगर और इस्लाम नगर में भरा बाढ़ का पानी धीरे धीरे निकल रहा है। सड़कों पर बह रहा बाढ़ का पानी भी कम हो जाने से यातायात शुरू हो गया है। जलालाबाद-शमशाबाद-मैनपुरी-एटा स्टेट हाईवे पर ग्राम चौंरा के निकट बह रहा बाढ़ का पानी कम हो जाने से यातायात सुचारू हो गया है। चौंरा-इस्लामनगर, बांसखेड़ा संपर्क मार्ग पर भी बाढ़ का पानी कम हो जाने से दुपहिया वाहन निकलने लगे हैं। इसी तरह भरतपुर-पैलानी संपर्क मार्ग भी चालू हो गया है।
विज्ञापन
आजादनगर के बाशिंदों की दिक्कतें बरकरार
बाढ़ घटने के बाद भी आजाद नगर के बाशिंदों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बाढ़ से चौतरफा घिरे इस गांव के बाशिंदे अभी गांव से बाहर निकलने के लिए नाव का ही सहारा ले रहे हैं। इस्लामनगर के दक्षिणी भाग के निचले हिस्से में अभी पानी भरा हुआ है।
बाढ़ में डूबीं फसलें नष्ट होने की आशंका
बाढ़ में गंगा के खादर में बोई गई उर्द, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का, शकरकंद आदि फसलें डूब गई हैं। किसानों को आशंका है कि गंगा में फिर पानी बढ़ा तो डूबी फसलों को बचाना कठिन होगा और वह नष्ट हो जाएंगी। हालांकि, गन्ने की फसल को खेतों में पानी भरने से फायदा हुआ है। बाढ़ से घिरी गन्ना की फसल में दीमक आदि जो भी कीट रोग लगे थे, वे बाढ़ से से खत्म हो गए हैं। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो फसलें दो-तीन दिन डूबी रहीं, उन्हें पानी से कोई खतरा नहीं है।