शाहजहांपुर लोकसभा सीट: कहीं कमल खिलता दिखा तो कहीं दौड़ी साइकिल... हाथी पड़ा सुस्त
शाहजहांपुर लोकसभा सीट के लिए सोमवार को मतदान्न हुआ। मतदाताओं ने 10 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद कर दिया। चार जून को मतगणना के बाद पता चलेगा कि किसके सिर जीत का ताज होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मतदाताओं ने शाहजहांपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे सभी 10 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद कर दिया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक भाजपा और सपा में सीधी टक्कर नजर आई। बसपा अपने कैडर वोट के सहारे सुस्त चाल से आगे बढ़ती दिखी।
वर्ष 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने सपा से यह सीट छीनी थी। गत लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन के बावजूद बसपा प्रत्याशी अमरचंद जौहर को भाजपा ने 268413 वोटों से शिकस्त देकर मंडल की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। पिछले पांच वर्षों में शाहजहांपुर भाजपा के मजबूत किले के रूप में विकसित हुआ है।
2014 के बाद 2019 में लगातार दूसरी बार भाजपा ने लोकसभा चुनाव जीता था। सभी छह विधानसभा सीटें भी भाजपा के खाते में हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध चुनीं गईं तो महापौर का चुनाव भी भाजपा ने बड़े अंतर से जीता था। इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर जीत के लिए भाजपा आश्वस्त दिख रही थी।
बसपा को खाता खुलने की उम्मीद
शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर बसपा का अभी तक खाता नहीं खुला है। 2019 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी सपा से गठबंधन के बावजूद दूसरे स्थान पर रहा था। बसपा अपने आधार वोट के साथ चुनावी मैदान में थी। शहर से गांव तक कुछ क्षेत्रों में प्रत्याशी के पक्ष में मतदान हुआ।
कटरा और जलालाबाद में सपा ने दी कड़ी चुनौती
कटरा विधानसभा क्षेत्र में यादव और ठाकुर प्रभावी भूमिका में हैं। ऐसे में सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर होनी तय है। यहां पर 2022 में सपा के पूर्व विधायक राजेश यादव और वर्तमान भाजपा विधायक वीर विक्रम सिंह के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। सिर्फ 357 वोटों से प्रिंस जीत सके थे। कटरा विधानसभा क्षेत्र में सपा और भाजपा में बराबरी की टक्कर है।
जलालाबाद विधानसभा में भी सपा के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। यहां पर यादव और मौर्य-कुशवाहा बिरादरी के मतदाता बहुतायत में हैं। 2022 में पहली बार भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। यहां पर सोमवार को सपा और भाजपा में कड़ी टक्कर देखने को मिली। पुवायां विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच टक्कर दिखी। लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी कर रहे उपेंद्र पाल सपा से टिकट मांग रहे थे। न मिलने पर वह अंतिम समय में भाजपा में शामिल हो गए। उनके समर्थकों में सपा को लेकर नाराजगी है।
यादव, मुस्लिम और कश्यप वोट हैं सपा की उम्मीद
सपा यादव, मुस्लिम के एकमुश्त वोट के साथ ही कश्यप बिरादरी के वोटों पर नजर रखे हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में कश्यप बिरादरी का वोट अच्छी संख्या में है। सपा प्रत्याशी ज्योत्सना गौंड के इसी बिरादरी से आने के कारण सपा की उम्मीद परवान चढ़ी है। ददरौल विधानसभा के उपचुनाव में सपा के प्रत्याशी अवधेश वर्मा लोध बिरादरी से आते हैं। पूर्व रोशनलाल वर्मा और प्रत्याशी अवधेश वर्मा लोध बिरादरी के वोटों का रुख सपा की ओर मोड़ने में लगे रहे। भाजपा ने इसकी काट के तौर पर महापौर अर्चना वर्मा और उनके पति राजेश वर्मा को मैदान में उतारा था।
भाजपा ने राम मंदिर और प्रधानमंत्री के नाम पर बटोरे वोट
भाजपा की बात करें तो शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राम मंदिर के नाम पर एकजुट हुए। तमाम मतदाताओं ने राम मंदिर के लिए भाजपा को पसंदीदा बताया। मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रचार के अंतिम दिन तक ताकत झोंके रखी, जिसका असर भी मतदाताओं पर पड़ा। मंत्री जितिन प्रसाद और जेपीएस राठौर के प्रचार ने भी मतदाताओं को भाजपा की ओर मोड़ा। भाजपा के पास जिले में सभी राजनीतिक दलों से बड़ा संगठन है। सत्ता में होने के कारण तमाम कार्यकर्ता भी प्रत्याशी के पक्ष में जुटे रहे। इसका लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिलना लगभग तय है।
शहरी क्षेत्र में कड़ा मुकाबला
शहरी क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। गत विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी तनवीर खां को करीब एक लाख वोट मिले थे। भाजपा प्रत्याशी सुरेश कुमार खन्ना से हार का अंतर भी लगभग 10 हजार वोट ही था। कांग्रेस ने सर्वाधिक नौ बार लोकसभा सीट जीती है। महापौर के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रही थी। गठबंधन के कारण पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान में न होने से मुस्लिम मतदाताओं की पसंद सपा बनकर उभरी है। खांटी कांग्रेसी वोट भी सपा की ओर मुड़ा है। शहरी क्षेत्र में मुस्लिम आबादी करीब 40 प्रतिशत मानी जाती है। वोट डालने के लिए लगी मुस्लिम वोटरों की कतार से सपा की बांछें खिली हुईं हैं।