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Shahjahanpur News: सड़क कम, गड्ढे ज्यादा... यहां हाईवे पर हर कदम पर खतरा

Sun, 30 Aug 2026 11:40 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:40 PM IST
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More potholes than road... danger lurks at every step on this highway.
जैतीपुर में सड़क पर गड्ढा। संवाद
जैतीपुर। पुवायां से तिलहर, जैतीपुर होते हुए दातागंज जाने वाला स्टेट हाईवे-126 इन दिनों गड्ढों के कारण राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को इनसे बचने के लिए अचानक अपना वाहन दाएं-बाएं करना पड़ता है। इससे हाईवे पर वाहन लहराते हुए निकलते हैं और सामने से आने वाले वाहन चालकों के लिए भी हादसे का खतरा बना रहता है। रात के समय परेशानी और बढ़ जाती है।
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तिलहर से नवादा मोड़ तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण जनवरी 2023 में शुरू हुआ था। चौड़ीकरण कर इसे सात मीटर किया गया। इसकी लागत 81 करोड़ रुपये से अधिक आई थी। सड़क का निर्माण दिसंबर 2023 में पूरा होने के बाद आवागमन शुरू कर दिया गया था।
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निर्माण के एक वर्ष के भीतर ही सड़क पर गड्ढे दिखाई देने लगे थे। ढाई साल में सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि जगह-जगह गड्ढों के कारण सफर करना मुश्किल हो गया है।
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नवादा मोड़ से तिलहर की ओर नौगांव में गोविंदपुर हनुमान मंदिर के पास पुरानी पुलिया के ऊपर सड़क डाल दी गई। यहां सड़क धंसने के कारण अक्सर गड्ढे बने रहते हैं। गौहावर मोड़ के पास नई पुलिया के आसपास भी सड़क धंस गई है। जैतीपुर से निकलते ही करकौर, पड़ैनिया, खैरपुर और कमलापुर में पुलियों के पास सड़क की हालत खराब है।
सबसे ज्यादा बदहाल स्थिति नवादा मोड़ से डांडी पुल तक करीब पांच किलोमीटर हिस्से की है। यहां वाहन चालकों को गड्ढों के बीच से रास्ता निकालना पड़ता है। भारी वाहनों के गुजरने पर स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
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हादसे के बाद गड्ढों में डाले पत्थर

शनिवार शाम करकौर गांव के पास सड़क के गड्ढे में बाइक जाने से दो लोग गिर गए थे। हादसे में शाहजहांपुर में चाट का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले 25 वर्षीय मनोज की मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। रविवार को हादसे की खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने सड़क के 100 से अधिक गड्ढों में पत्थर डलवा दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढों में पत्थर डालना स्थायी समाधान नहीं है। सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की जांच कराकर पूरी सड़क की मरम्मत कराई जानी चाहिए।

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पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी

सड़क निर्माण के बाद पांच साल तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की बताई जा रही है। इसके बावजूद सड़क लगातार खराब होती जा रही है। लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद ही विभाग गड्ढों में पत्थर डलवाकर खानापूर्ति करता है। उन्होंने सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने, गड्ढों की स्थायी मरम्मत कराने और रखरखाव में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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इस संबंध में संबंधित एक्सईएन को निर्देशित किया जाएगा। सड़क से संबंधित जो भी समस्या है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
-चंद्रप्रकाश गुप्ता, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, बरेली
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