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टिकैत ने कहा- बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि कानून लाई है सरकार

Sun, 19 Sep 2021 03:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बंडा (शाहजहांपुर)
अमर उजाला नेटवर्क, बंडा (शाहजहांपुर) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Sep 2021 03:20 AM IST
सार

राकेश टिकैत ने कहा कि हक की लड़ाई लड़ रहे हैं किसान लिहाजा सरकार को पीछे हटना ही होगा।

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Tikait said- Government has brought agriculture law to benefit big houses
राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों के मसले पर सरकार को पीछे हटना होगा। किसान पीछे हटने वाला नहीं है। सरकार बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि कानून लाई है।  

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बंडा के गुरुद्वारा नानकपुरी में संत सुखदेव सिंह की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए राकेश टिकैत ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि संत महात्माओं से सेवाभाव करने की सीख मिली थी जो सिख समाज में देखने को मिलती है। किसानों के लिए फसलों की कटाई का समय आ गया है, आंदोलन पर भी ध्यान दें। अभी तक के आंदोलन में गुरुद्वारों का भी बहुत सहयोग रहा है। 
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कह रही है कि किसान बातचीत नहीं करना चाहते, इस पर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को वार्ता का पत्र भेजा गया है, लेकिन वार्ता बंद कमरे में नहीं होगी। केंद्र सरकार बार-बार बयान देती है कि कानून वापस नहीं होंगे। ऐसे में वार्ता का क्या मतलब है। किसान को दबाकर समझौता नहीं होगा। सरकार किसानों को बुलाकर अपने पक्ष में जबरिया साइन कराना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होगा। 
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टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को किसानों को बदनाम किया गया। वह किसानों के लिए काला दिन था। प्रशासन ने चार हजार पुलिसकर्मियों को लगा दिया था। यह किसानों को परेशान करने की कोशिश थी, लेकिन ऐसा किसानों की एकता के कारण सरकार की मंशा सफल नहीं हो सकी। 

किसानों को लूटते हैं मिलर्स, अधिकारी और व्यापारी
बंडा। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मिलर्स, अधिकारी, व्यापारी किसान को लूटते हैं। इसलिए नहीं चाहते कि एमएसपी की गारंटी का कानून बने। सरकार एमएसपी पर गारंटी कानून क्यों नहीं बनाती। सरकार कानून बना दे जो एमएसपी पर अनाज नहीं खरीदना चाहते वह कपड़े का धंधा कर लें, और कोई धंधा कर लें। जो व्यापारी दस, बीस, पचास हजार क्विंटल धान खरीदता है, वह कहां बेचता है इसकी जांच की जाए। अकेले रामपुर जिले में 11 हजार फर्जी किसान हैं जो अधिकारी, व्यापारी हैं और धान बेचने की तैयारी में जुटे हैं। 

सरकार अगर बात ही करना चाहती है तो तीन कानून पर बात नहीं तो एमएसपी पर बात करे, लेकिन सरकार जिद पर है कि पहले तीन कानूनों पर बात करेंगे। ऐसा कैसे चलेगा। सरकार खेती को बड़े घरानों को देना चाहती है। कृषि कानून रद्द कराने के बाद ही किसान आंदोलन से हटेगा।  किसानों का आंदोलन शांति पूर्ण तरीके से चला है और आगे भी शांति से ही चलेगा। सरकार से बात करने के लिए जब चाहे दरवाजे खुले हुए हैं। संवाद

किसान आंदोलन मानवता को बचाने की लड़ाई : चढ़ूनी

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान आंदोलन मानवता को बचाने की लड़ाई है और यह लड़ाई परिणाम आने तक जारी रहेगी।   

नानकपुरी गुरुद्वारे में संगत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार तमाम संपत्तियां बेच रही है और देश के कई बड़े कारखानों, उपक्रमों को प्राइवेट सेक्टर में दिया जा चुका है। सरकार अब किसानों के काम को भी कंपनियों के जिम्मे करना चाहती है। खेती का काम कंपनियों के हाथ में जाने से सबसे पहले पंजाब के किसान बेरोजगार हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अभी खेती किसान के पास है, तब भी अन्नदाता कर्जे के कारण आत्महत्या कर रहा है। खेती कंपनियों के पास जाने के बाद क्या हालत होंगे इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। किसान नेता ने कहा कि गुरुओं ने भी सिखाया है कि कोई भूखा न रहे। 

इसीलिए यह सरकार और किसानों के बीच धर्मयुद्ध है। इसमें जो जितना सहयोग कर सकता है वह करके आंदोलन में सहयोग करे। करनाल में किसानों के सिर फोड़े, हड्डियां तोड़ी गईं, लेकिन किसानों ने हिम्मत नहीं हारी। किसानों ने प्रण कर रखा है कि आंदोलन के दौरान सारे जुल्म सहेंगे, लेकिन हाथ नहीं उठाएंगे।

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