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बंडा क्षेत्र में घूम रहे एक से अधिक बाघ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
Updated Fri, 09 Mar 2018 07:52 PM IST
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बंडा क्षेत्र में एक से अधिक बाघ घूम रहे हैं। इसका सबूत है यह कि दो अलग-अलग स्थानों पर बाघों ने एक नीलगाय और एक बछड़े को मार डाला है। सूचना के बाद भी वनकर्मी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में बाघ कभी भी किसी व्यक्ति पर हमला कर सकते हैं।
बृहस्पतिवार रात गांव पिपरिया घासी में बाघ ने एक नीलगाय को मार डाला। रात लगभग नौ बजे लोगों ने बाघ को नीलगाय का पीछा करते देखा। कुछ देर बाद नीलगाय के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी तो गांव के विनोद शुक्ला, हरिओम, कौशल, दिनेश मिश्रा सहित तमाम लोग शोर मचाते हुए खेतों की ओर पहुंचे। लोगों ने आग जलाकर और फायरिंग कर बाघ को खदेड़ा। मौके पर एक नीलगाय मरी पड़ी मिली। उधर, गांव गहलुइया के लोगों ने बताया की शुक्रवार सुबह चार बजे गन्ने के खेत में दो बाघों की लड़ने की आवाज आ रही थी। गांव के लोगों गन्ने के खेत के पास पहुंचकर शोर शराबा कर फायरिंग की तो गन्ने के खेत से दो बाघ निकलकर शारदा नहर की तरफ भाग गए।
एक अन्य मामले में गांव नवीनगर के पास बाघ ने आवारा घूम रहे बछड़े को मार डाला और काफी मांस खा गया। शुक्रवार को लोगों को जानकारी हुई तो क्षेत्र में दहशत फैल गई। फारेस्ट गार्ड सत्यपाल वर्मा ने बताया कि गांव गहलुइया में बाघ होने की सूचना मिली है और गांव पिपरिया घासी में बाघ ने नीलगाय को मारकर खा लिया है। दोनों जगहों पर मुआयना करने के लिए जा रहे हैं। जांच के बाद रिपोर्ट अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी।
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बाघ के कारण लोगों में दहशत
बंडा क्षेत्र में बाघ के आतंक से जंगल के आसपास के गांवों के लोग दहशत में हैं। अभी तक बाघ के नहीं पकड़े जाने के लोगों में आक्रोश है। बचाव के लिए लोग घरों के बाहर टायर, लकड़ी आदि जलाने के साथ ही पीपे, ढोल आदि बजाने के साथ शोर मचाकर बचाव कर रहे हैं।
गौरतलब है कि बंडा क्षेत्र के जंगल के किनारे के गांवों में बाघ को देखे जाने से लोग परेशान हैं। बाघ गांव गहलुइया, नवदिया बंकी, नवीनगर, पिरिया घासी सहित शारदा नहर के किनारे कई गांवों की सीमा में देखा जा चुका है। लगभग दो माह से क्षेत्र में घूम रहे बाघ पर वन विभाग की चुप्पी भी कम रहस्यमयी नहीं है। जब भी कहीं पर बाघ देखे जाने की सूचना होती है तो वनकर्मी मौके पर पहुंच कर लोगों को सावधान कर और बाघ के जंगल की ओर जाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। वनकर्मी जंगल के आसपास के गांवों की स्थिति ऐसी है कि लोग रातभर जागकर घरों पर पहरा देकर खुद ही अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। कुल मिलाकर बाघ की दहशत लोगों पर इस कदर हावी है कि छत से नीचे बुलाने पर लोग आने से इंकार कर देते हैं।
बाघ से भय से नदी किनारे कच्ची निकलना बंद
बाघ के भय से बंडा क्षेत्र में नदी किनारे कच्ची निकलना बंद हो गया है। कच्ची नहीं मिलने से पियक्कड़ परेशान हैं और बाघ को कोसते घुम रहे हैं। हालांकि कच्ची के सौदागरों ने घरों में कच्ची निकालना शुरू कर दिया है, लेकिन मांग के अनुसार पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
बंडा क्षेत्र में झुकना और गोमती के किनारे कच्ची निकालने का काम बहुतायत में होता है। इसके अलावा जंगल में भरी कच्ची शराब निकाले जाने का धंधा खुलेआम होता है। यहां से कच्ची निकालकर दूरदराज के क्षेत्रों में थोक में सप्लाई की जाती है। कच्ची पीकर कई लोग काल कवलित हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कच्ची के धंधे पर अंकुश नहीं लग सका। बाघ के क्षेत्र में आ जाने और कई पशुओं को मारने के बाद कच्ची के सौदागरों ने बाघ के भय से नदी के किनारे जाना बंद कर दिया है, जिस कारण कच्ची निकलना भी बंद हो गया है। घरों में जो कच्ची निकाली जाती है वह पियक्कड़ों को पूरी नहीं हो पा रही है। कच्ची नहीं मिलने से पियक्कड़ बाघ को कोसते घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक जो काम 20 रुपये में हो जाता था। इसके लिए इस समय 50 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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बृहस्पतिवार रात गांव पिपरिया घासी में बाघ ने एक नीलगाय को मार डाला। रात लगभग नौ बजे लोगों ने बाघ को नीलगाय का पीछा करते देखा। कुछ देर बाद नीलगाय के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी तो गांव के विनोद शुक्ला, हरिओम, कौशल, दिनेश मिश्रा सहित तमाम लोग शोर मचाते हुए खेतों की ओर पहुंचे। लोगों ने आग जलाकर और फायरिंग कर बाघ को खदेड़ा। मौके पर एक नीलगाय मरी पड़ी मिली। उधर, गांव गहलुइया के लोगों ने बताया की शुक्रवार सुबह चार बजे गन्ने के खेत में दो बाघों की लड़ने की आवाज आ रही थी। गांव के लोगों गन्ने के खेत के पास पहुंचकर शोर शराबा कर फायरिंग की तो गन्ने के खेत से दो बाघ निकलकर शारदा नहर की तरफ भाग गए।
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एक अन्य मामले में गांव नवीनगर के पास बाघ ने आवारा घूम रहे बछड़े को मार डाला और काफी मांस खा गया। शुक्रवार को लोगों को जानकारी हुई तो क्षेत्र में दहशत फैल गई। फारेस्ट गार्ड सत्यपाल वर्मा ने बताया कि गांव गहलुइया में बाघ होने की सूचना मिली है और गांव पिपरिया घासी में बाघ ने नीलगाय को मारकर खा लिया है। दोनों जगहों पर मुआयना करने के लिए जा रहे हैं। जांच के बाद रिपोर्ट अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी।
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बाघ के कारण लोगों में दहशत
बंडा क्षेत्र में बाघ के आतंक से जंगल के आसपास के गांवों के लोग दहशत में हैं। अभी तक बाघ के नहीं पकड़े जाने के लोगों में आक्रोश है। बचाव के लिए लोग घरों के बाहर टायर, लकड़ी आदि जलाने के साथ ही पीपे, ढोल आदि बजाने के साथ शोर मचाकर बचाव कर रहे हैं।
गौरतलब है कि बंडा क्षेत्र के जंगल के किनारे के गांवों में बाघ को देखे जाने से लोग परेशान हैं। बाघ गांव गहलुइया, नवदिया बंकी, नवीनगर, पिरिया घासी सहित शारदा नहर के किनारे कई गांवों की सीमा में देखा जा चुका है। लगभग दो माह से क्षेत्र में घूम रहे बाघ पर वन विभाग की चुप्पी भी कम रहस्यमयी नहीं है। जब भी कहीं पर बाघ देखे जाने की सूचना होती है तो वनकर्मी मौके पर पहुंच कर लोगों को सावधान कर और बाघ के जंगल की ओर जाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। वनकर्मी जंगल के आसपास के गांवों की स्थिति ऐसी है कि लोग रातभर जागकर घरों पर पहरा देकर खुद ही अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। कुल मिलाकर बाघ की दहशत लोगों पर इस कदर हावी है कि छत से नीचे बुलाने पर लोग आने से इंकार कर देते हैं।
बाघ से भय से नदी किनारे कच्ची निकलना बंद
बाघ के भय से बंडा क्षेत्र में नदी किनारे कच्ची निकलना बंद हो गया है। कच्ची नहीं मिलने से पियक्कड़ परेशान हैं और बाघ को कोसते घुम रहे हैं। हालांकि कच्ची के सौदागरों ने घरों में कच्ची निकालना शुरू कर दिया है, लेकिन मांग के अनुसार पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
बंडा क्षेत्र में झुकना और गोमती के किनारे कच्ची निकालने का काम बहुतायत में होता है। इसके अलावा जंगल में भरी कच्ची शराब निकाले जाने का धंधा खुलेआम होता है। यहां से कच्ची निकालकर दूरदराज के क्षेत्रों में थोक में सप्लाई की जाती है। कच्ची पीकर कई लोग काल कवलित हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कच्ची के धंधे पर अंकुश नहीं लग सका। बाघ के क्षेत्र में आ जाने और कई पशुओं को मारने के बाद कच्ची के सौदागरों ने बाघ के भय से नदी के किनारे जाना बंद कर दिया है, जिस कारण कच्ची निकलना भी बंद हो गया है। घरों में जो कच्ची निकाली जाती है वह पियक्कड़ों को पूरी नहीं हो पा रही है। कच्ची नहीं मिलने से पियक्कड़ बाघ को कोसते घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक जो काम 20 रुपये में हो जाता था। इसके लिए इस समय 50 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।