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Shahjahanpur News: हार्ट अटैक आने पर थ्रंबोलाइसिस से बचेगी जान, इमरजेंसी में बनेगा वार्ड

Sun, 07 Jun 2026 12:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 07 Jun 2026 12:41 AM IST
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Thrombolysis will save lives in case of heart attack, ward will be created in emergency
इमरजेंसी वार्ड में चल रहा निर्माण कार्य। संवाद
शाहजहांपुर। हार्ट अटैक आने पर मरीजों की जान बचाने में थ्रंबोलाइसिस (उपचार की विधि) की सुविधा राजकीय मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होगी। इसके लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में थ्रंबोलाइसिस वार्ड बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया से गंभीर मरीज को करीब 24 घंटे की मोहलत मिल जाएगी।
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प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि थ्रोम्बोसिस रक्त वाहिकाओं (आर्टरी या वीन) के अंदर रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉटिंग) का निर्माण होता है, जो पूरे शरीर में ब्लड के सर्कुलेशन को बाधित कर सकता है। कई बार एक या अधिक ब्लड क्लॉट बनते हैं। जब ऐसा होता है, तो क्लॉट उस जगह पर रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है। यदि कोई गतिशील थक्का किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र में फंस जाता है तो यह स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है।
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प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि थ्रंबोलाइसिस में एक एंजाइम के जरिये रक्त में मौजूद थक्के को गलाया जाता है। इससे रक्त पतला होने लगता है और आसानी से धमनियों में संरचण कर पाता है। थ्रंबोलाइसिस के लिए प्रशिक्षिण भी दिया जाएगा। मरीज या घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सीपीआर बहुत महत्वपूर्ण तरीका है। प्राचार्य ने बताया कि इसके साथ ही इमरजेंसी में माइनर व इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर भी बनाया जाएगा। मरीजों की जांच के लिए इमरजेंसी में ही पैथोलॉजी बनाई जाएगी। इमरजेंसी में रेड, ग्रीन व यलो जोन भी बनाएंगे। रेड जोन में पांच बेड, ग्रीन जोन में 12 बेड और यलो जोन में 15 बेड होंगे।
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इस तरह के होते हैं लक्षण
- शरीर के एक तरफ की मांसपेशियों में कमजोरी या नियंत्रण में परेशानी।
- स्पष्ट बोल न पाना, आवाज में लड़खड़ाहट।
- चेहरे के एक तरफ ध्यान देने योग्य झुकाव।
- भ्रम, बेचैनी या असामान्य व्यवहार परिवर्तन।
- सीने में दर्द या बेचैनी, दिल का दौरा।
- सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या बेहोश हो जाना।
(यह प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया है)
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