Shahjahanpur News: हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास, साइकिल चोरी के शक में ली थी युवक की जान
शाहजहांपुर में साइकिल चोरी के शक में एक युवक की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह घटना दो अप्रैल 2007 को जारमानो गांव में हुई थी।
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शाहजहांपुर में साइकिल चोरी के शक में युवक की पीट-पीटकर हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों को अदालत ने सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
जारमानो गांव के रहने वाले रमेशचंद्र ने दो अप्रैल 2007 को पुवायां थाने आकर पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया था कि गांव के रहने वाले मातादीन की साइकिल चोरी हो गई थी। साइकिल चोरी होने का शक वह उनके भाई पंकज व रामनरेश पर कर रहा था। इस रंजिश में मातादीन, उसके भाई हरिश्चंद्र और संगम गालीगलौज करने लगे।
उनके भाई पंकज और रामनरेश ने गाली देने से मना किया तो उन लोगों ने दोनों को लाठी-डंडे से पीटा। पंकज के सीने और सिर पर काफी चोट आई। रामनरेश भी चोटिल हो गया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान पंकज की मौत हो गई।
पुलिस ने मातादीन, हरिश्चंद्र और संगम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत भेजा। अदालत में गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश नेहा आनंद ने मातादीन, हरिश्चंद्र और संगम को दोषी पाया।
नाबालिग की हत्या की कोशिश में दोषी को चार साल की कैद
किशोर का गला दबाकर हत्या की कोशिश के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमार-तृतीय की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। खुदागंज क्षेत्र के दियुरिया गांव निवासी सत्यप्रकाश को चार वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दियुरिया गांव निवासी इंद्रपाल सिंह ने 25 अप्रैल 2021 को खुदागंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि 24 अप्रैल को गांव का सत्यप्रकाश उनके 15 वर्षीय बेटे पुष्पेंद्र को आम तोड़ने के बहाने जंगल ले गया। बालक ने पेड़ पर चढ़ने से मना किया तो सत्यप्रकाश ने उसकी गर्दन पकड़कर गला दबा दिया। इससे पुष्पेंद्र बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।
पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने सत्यप्रकाश को दोषी मानते हुए चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अर्थदंड की कुल धनराशि में से 80 प्रतिशत राशि पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश भी दिया।