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अबकी सन्नाटे में रहे साइबर कैफे
शाहजहांपुर
Updated Mon, 18 May 2015 12:35 AM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षा के हाईस्कूल और इंटर का परीक्षा परिणाम एक साथ घोषित होने से स्कूल-कॉलेजों में अफरातफरी का माहौल रहा। चूंकि बोर्ड ने मेरिट सूची जारी करनी बंद कर रखी है, इसलिए स्कूल संचालकों को अपने कॉलेज के विद्यार्थियों की स्थित जानने की ललक साफ दिखाई दी। हाईस्कूल में ग्रेडिंग सिस्टम होने के कारण स्कूल संचालकों ने पहले इंटर का परीक्षाफल देखना जरूरी समझा। एक साथ रिजल्ट नहीं दिखने से भी शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बोर्ड का रिजल्ट वैसे तो दोपहर करीब साढ़े बारह बजे आ गया था, लेकिन स्कूलों में उसे निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इंटरनेट युग में साइबर कैफे का क्रेज भी धीरे-धीरे जाता रहा। यही कारण रहा कि अधिकांश विद्यार्थियों ने अपने मोबाइल पर ही रिजल्ट देखकर खुशियां मनाईं। कैफे वाले तो छात्र-छात्राओं का इंतजार ही करते रहे। यही हाल एनआईसी का भी रहा। लगभग सभी स्कूलों में कंप्यूटर लगे हैं, सो रिजल्ट भी वहीं देख लिए गए। विद्यार्थियों में परीक्षाफल देखने की खुशी ही अलग थी। सभी अपना रिजल्ट देखकर खुश हो रहे थे। स्कूलों में खुशी का माहौल रहा।
सबसे पहले घर पर बताया रिजल्ट
शाहजहांपुर। रिजल्ट देखने के बाद छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले अपने घर पर और बाद में इष्टमित्रों को खुशखबरी देनी जरूरी समझी। कुछ ने पहले दोस्तों को तरजीह दी। स्कूलों में कई बार एक से नजारे देखने को मिले। जैसे ही बच्चों को अपने रिजल्ट की जानकारी हुई कि उन्होंने तत्काल मोबाइल निकालकर नंबर डायल किया और खिलखिलाते हुए बता डाला। जवाब में बधाई मिली तो खुशी और दूनी हो गई।
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बोर्ड का रिजल्ट वैसे तो दोपहर करीब साढ़े बारह बजे आ गया था, लेकिन स्कूलों में उसे निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इंटरनेट युग में साइबर कैफे का क्रेज भी धीरे-धीरे जाता रहा। यही कारण रहा कि अधिकांश विद्यार्थियों ने अपने मोबाइल पर ही रिजल्ट देखकर खुशियां मनाईं। कैफे वाले तो छात्र-छात्राओं का इंतजार ही करते रहे। यही हाल एनआईसी का भी रहा। लगभग सभी स्कूलों में कंप्यूटर लगे हैं, सो रिजल्ट भी वहीं देख लिए गए। विद्यार्थियों में परीक्षाफल देखने की खुशी ही अलग थी। सभी अपना रिजल्ट देखकर खुश हो रहे थे। स्कूलों में खुशी का माहौल रहा।
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सबसे पहले घर पर बताया रिजल्ट
शाहजहांपुर। रिजल्ट देखने के बाद छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले अपने घर पर और बाद में इष्टमित्रों को खुशखबरी देनी जरूरी समझी। कुछ ने पहले दोस्तों को तरजीह दी। स्कूलों में कई बार एक से नजारे देखने को मिले। जैसे ही बच्चों को अपने रिजल्ट की जानकारी हुई कि उन्होंने तत्काल मोबाइल निकालकर नंबर डायल किया और खिलखिलाते हुए बता डाला। जवाब में बधाई मिली तो खुशी और दूनी हो गई।
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