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Shahjahanpur News: बेटी के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे रुपये... कर्मचारियों ने की मदद
Sun, 06 Apr 2025 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:15 AM IST
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शाहजहांपुर पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक महिला की गमगीन खड़ी मां। स्रोत: जागरुक पाठक
शाहजहांपुर। बेटी की मौत के बाद अंतिम संस्कार के रुपये न होने पर पोस्टमॉर्टम हाउस के कर्मचारियों ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए। चंदा कर शव का अंतिम संस्कार कराया।
चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला हुंडालखेल निवासी हिमांशु गुप्ता के मकान में बुजुर्ग मंजू अपने आठ और 12 वर्ष के नाती-नातिन के साथ रहती हैं। बताया कि उनकी 34 वर्षीय बेटी कोमल पुवायां क्षेत्र में अपनी सहेली के साथ रहकर नौकरी करती थी। शनिवार सुबह कोमल को उसकी सहेली मरणासन्न हालत में घर छोड़ गई। सहेली ने बताया कि कोमल को बुखार आ रहा है। दवा दिलाने जा रहे थे।
रास्ते में ज्यादा हालत बिगड़ी तो यहां ले आए। कोमल की हालत देख घबराए मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस मौके पर पहुंच कोमल को अस्पताल लेकर गई। डाॅक्टर ने कोमल को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। यहां मंजू ने पोस्टमॉर्टम हाउस के कर्मचारियों को बताया कि उनके पास अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ 1500 रुपये हैं।
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कर्मचारियों ने कोमल के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। पोस्टमाॅर्टम हाउस पर कंप्यूटर ऑपरेटर वीर सिंह, मन्नू खान, अनेक वर्मा, शुभान, विपिन, राजू व फिरोज ने मिलकर महिला का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। इंस्पेक्टर राजीव तोमर ने बताया कि सूचना पर शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया गया है।
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हत्या में बेटी और दामाद गए थे जेल
- मंजू ने बताया कि शराब का आदी पति उन्हें छोड़कर चला गया था। बेटी कोमल की शादी 13 साल पहले कांशीराम काॅलोनी के रहने वाले सुरेंद्र से की थी। शादी के बाद एक युवक की हत्या हुई थी। उसमें बेटी और दामाद का नाम आया था। आठ साल की सजा काटकर बेटी एक साल पहले जेल से छूटी थी। उसके दो महीने बाद छूटा दामाद दिल्ली चला गया। तब से उसने कोई संपर्क नहीं किया है। मंजू ने बताया कि जेल में बेटी की एक युवती से दोस्ती हुई थी। जेल से छूटने के बाद दोनों साथ में पुवायां में रहने लगीं थीं।
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चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला हुंडालखेल निवासी हिमांशु गुप्ता के मकान में बुजुर्ग मंजू अपने आठ और 12 वर्ष के नाती-नातिन के साथ रहती हैं। बताया कि उनकी 34 वर्षीय बेटी कोमल पुवायां क्षेत्र में अपनी सहेली के साथ रहकर नौकरी करती थी। शनिवार सुबह कोमल को उसकी सहेली मरणासन्न हालत में घर छोड़ गई। सहेली ने बताया कि कोमल को बुखार आ रहा है। दवा दिलाने जा रहे थे।
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रास्ते में ज्यादा हालत बिगड़ी तो यहां ले आए। कोमल की हालत देख घबराए मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस मौके पर पहुंच कोमल को अस्पताल लेकर गई। डाॅक्टर ने कोमल को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। यहां मंजू ने पोस्टमॉर्टम हाउस के कर्मचारियों को बताया कि उनके पास अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ 1500 रुपये हैं।
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कर्मचारियों ने कोमल के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। पोस्टमाॅर्टम हाउस पर कंप्यूटर ऑपरेटर वीर सिंह, मन्नू खान, अनेक वर्मा, शुभान, विपिन, राजू व फिरोज ने मिलकर महिला का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। इंस्पेक्टर राजीव तोमर ने बताया कि सूचना पर शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया गया है।
हत्या में बेटी और दामाद गए थे जेल
- मंजू ने बताया कि शराब का आदी पति उन्हें छोड़कर चला गया था। बेटी कोमल की शादी 13 साल पहले कांशीराम काॅलोनी के रहने वाले सुरेंद्र से की थी। शादी के बाद एक युवक की हत्या हुई थी। उसमें बेटी और दामाद का नाम आया था। आठ साल की सजा काटकर बेटी एक साल पहले जेल से छूटी थी। उसके दो महीने बाद छूटा दामाद दिल्ली चला गया। तब से उसने कोई संपर्क नहीं किया है। मंजू ने बताया कि जेल में बेटी की एक युवती से दोस्ती हुई थी। जेल से छूटने के बाद दोनों साथ में पुवायां में रहने लगीं थीं।