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आयोग के चाबुक ने प्रत्याशियों और समर्थकों को किया हलकान

Fri, 04 Feb 2022 01:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 01:53 AM IST
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The whip of the commission lightened the candidates and supporters
गांव में वोट मांगते एक प्रत्याशी के समर्थक - फोटो : POWAYAN
पुवायां। कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव आयोग के चाबुक ने प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को हलकान कर रखा है। पूरे क्षेत्र में कहीं चुनावी माहौल नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में यह चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा? इसको लेकर राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले भी मुंह खोलने को तैयार नहीं दिखते।
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कुछ वर्ष पूर्व चुनावों के समय गांव और नगर की दीवारें विभिन्न प्रत्याशियों के झंडा, बैनर एवं पोस्टरों से पटी नजर आती थी। साथ ही अपने प्रत्याशी का टेंपो हाई करने के लिए उनके समर्थक सारा काम धाम छोड़कर प्रतिद्वंद्वी से आगे निकलने की होड़ में जी-जान लड़ाते दिखाई देते थे। उस दौर का यह माहौल काफी हद तक चुनावी तस्वीर को साफ करते हुए प्रत्याशी की हार-जीत का आकलन करा देते थे।
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अब गांवों में कहीं भी पोस्टर, बैनर नहीं दिखाई दे रहे हैं। प्रत्याशी 10 से 15 समर्थकों के साथ गांव-गांव जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। रिक्शों और वाहनों पर माइक से भी प्रचार शून्य है। लोग भी चुनाव की जीत-हार तथा समर्थन देने या न देने पर बात करने के बजाय परिवार की रोजी रोटी के लिए काम में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। किसान भी खेती के काम में जुटे हैं। गांव में किसी भी दल के प्रत्याशी के पहुंचने पर उसकी हां में हां मिला दी जाती है।
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साउंड सर्विस वाले निराश, पेंटरों को भी नहीं मिल रहा काम
पहले चुनाव में साउंड से प्रचार किया जाता था, लेकिन इस बार साउंड सिस्टम से प्रचार का कहीं अता पता नहीं है। वॉल पेंटिग पर पाबंदी के चलते पेंटरों को भी काम नहीं मिल रहा है। प्रिंटिग प्रेस वालों का धंधा भी मंदा है। प्रत्याशी और उनके समर्थक छोटे पर्चे लेकर गांवों में जाकर मतदाताओं को दे रहे हैं और वोट की चिरौरी कर रहे हैं।

वाहनों की संख्या भी घटी
आयोग के डंडे के डर से चुनाव प्रचार में लगे वाहनों की संख्या भी इस बार अपेक्षाकृत कम है। उड़नदस्ते वाहनों को रोक कर सघन तलाशी ले रहे हैं। ऐसे में समर्थक बिना प्रचार सामग्री के गांवों में घूम रहे हैं, लेकिन वाहनों की संख्या कम है।
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