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लखीमपुर के ध्यानार्थ:::. हाईस्कूल की परीक्षा में फेल होने पर किशोरी ने जहरीला पदार्थ खाकर दी जान
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शाहजहांपुर। लखीमपुर खीरी जिले के थाना पसगवां क्षेत्र की 16 वर्षीय किशोरी ने जहर खाकर जान दे दी। किशोरी हाईस्कूल की परीक्षा में फेल हो गई थी, उसकी बड़ी बहन ने उसे फेल होने का ताना मारा तो उसने कमरे में जाकर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी उपचार के दौरान शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।
छात्रा ने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। परीक्षा का परिणाम आया तो वह फेल हो गई। उसके बाद से छात्रा गुमसुम हो गई थी। परिजन ने तब उसे मना लिया था। छात्रा के चाचा ने बताया कि शनिवार को बड़ी बहन से छात्रा का झगड़ा हो गया था। बड़ी बहन ने बीएससी किया है। विवाद के दौरान बड़ी बहन ने कह दिया कि तुम तो हाईस्कूल में फेल हो गईं, क्यों पापा के पैसों को बर्बाद कर रही हो। इस बात से नाराज छात्रा ने शनिवार रात करीब आठ बजे जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन तुरंत राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर लेकर पहुंचे। रविवार को छात्रा की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। उसने परिजन से बात भी की थी। सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। चौक कोतवाली पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बिटिया ने कहा था...पापा को मुंह नहीं दिखाएंगे
छात्रा के पिता पंजाब में रहकर मजदूरी करते हैं। उनकी दो बेटियां व दो बेटे हैं। मृतका के चाचा ने बताया कि दोनों बहनों के बीच झगड़ा होने पर ही बात बढ़ी। छात्रा ने बड़ी बहन को जवाब दिया था कि पापा पंजाब से आएंगे तो हम उन्हें मुंह नहीं दिखाएंगे। उसके कुछ देर बाद ही उसने जहरीला पदार्थ खा लिया।
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हर छह महीने में बच्चों की काउंसलिंग कराएं
कोविड-19 के बाद से बच्चों में तनाव ज्यादा बढ़ गया। पढ़ाई का पैटर्न बदलने से भी दिक्कत आ रही है। छात्र-छात्राओं पर नंबर अधिक लाने का दबाव भी परेशानी खड़ा कर रहा। बच्चों में घबराहट की बीमारी और डिप्रेशन घेर रहा है। बच्चे खुद ही बीमारी के बारे में महसूस नहीं कर पाते। मन उदास रहना, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, भूख-प्यास और नींद नहीं आना भी खुदकुशी की वजह बन रहा है। सबसे पहले अभिभावक बच्चों पर नंबर लाने का दबाव कम करें। स्कूलों में कैंप लगाकर हर छह महीने में बच्चों की काउंसलिंग कराई जाए, साथ ही मनोचिकित्सक से भी संपर्क करें। - डॉ. अभिनव रस्तोगी, मनोचिकित्सक
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- हाईस्कूल में फेल होने पर किशोरी के जान देने के मामला संज्ञान में नहीं है। इस बारे में लखीमपुर खीरी के पुलिस अधिकारियों से बात करने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
- अखंड प्रताप सिंह, सीओ सिटी
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छात्रा ने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। परीक्षा का परिणाम आया तो वह फेल हो गई। उसके बाद से छात्रा गुमसुम हो गई थी। परिजन ने तब उसे मना लिया था। छात्रा के चाचा ने बताया कि शनिवार को बड़ी बहन से छात्रा का झगड़ा हो गया था। बड़ी बहन ने बीएससी किया है। विवाद के दौरान बड़ी बहन ने कह दिया कि तुम तो हाईस्कूल में फेल हो गईं, क्यों पापा के पैसों को बर्बाद कर रही हो। इस बात से नाराज छात्रा ने शनिवार रात करीब आठ बजे जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन तुरंत राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर लेकर पहुंचे। रविवार को छात्रा की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। उसने परिजन से बात भी की थी। सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। चौक कोतवाली पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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बिटिया ने कहा था...पापा को मुंह नहीं दिखाएंगे
छात्रा के पिता पंजाब में रहकर मजदूरी करते हैं। उनकी दो बेटियां व दो बेटे हैं। मृतका के चाचा ने बताया कि दोनों बहनों के बीच झगड़ा होने पर ही बात बढ़ी। छात्रा ने बड़ी बहन को जवाब दिया था कि पापा पंजाब से आएंगे तो हम उन्हें मुंह नहीं दिखाएंगे। उसके कुछ देर बाद ही उसने जहरीला पदार्थ खा लिया।
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हर छह महीने में बच्चों की काउंसलिंग कराएं
कोविड-19 के बाद से बच्चों में तनाव ज्यादा बढ़ गया। पढ़ाई का पैटर्न बदलने से भी दिक्कत आ रही है। छात्र-छात्राओं पर नंबर अधिक लाने का दबाव भी परेशानी खड़ा कर रहा। बच्चों में घबराहट की बीमारी और डिप्रेशन घेर रहा है। बच्चे खुद ही बीमारी के बारे में महसूस नहीं कर पाते। मन उदास रहना, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, भूख-प्यास और नींद नहीं आना भी खुदकुशी की वजह बन रहा है। सबसे पहले अभिभावक बच्चों पर नंबर लाने का दबाव कम करें। स्कूलों में कैंप लगाकर हर छह महीने में बच्चों की काउंसलिंग कराई जाए, साथ ही मनोचिकित्सक से भी संपर्क करें। - डॉ. अभिनव रस्तोगी, मनोचिकित्सक
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- हाईस्कूल में फेल होने पर किशोरी के जान देने के मामला संज्ञान में नहीं है। इस बारे में लखीमपुर खीरी के पुलिस अधिकारियों से बात करने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
- अखंड प्रताप सिंह, सीओ सिटी