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नोट बदलने के बहाने निजी बैंकों ने किया अरबों का खेल

Sun, 04 Dec 2016 11:25 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर Updated Sun, 04 Dec 2016 11:25 PM IST
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The private banks used the pretext of changing the game of billions
बैंक के बाहर लगी भीड़।
 नोटबंदी के बाद विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों को खातेदारों की संख्या के अनुपात में नई करेंसी देने में बरती गई असमानता एवं सीमित खातेदारों वाली निजी क्षेत्र की कई बैंक शाखाओं पर उसी तुलना में बरती गई उदारता के क्रम में एक बड़ा खेल होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, निजी बैंकों ने अपनी शाखाओं समेत एटीएम के माध्यम से हजारों लोगों को नगदी उपलब्ध कराई, लेकिन इसकी आड़ में धन्नासेठों, नेताओं और अफसरों की अरबों की काली कमाई को बदलकर सफेद भी कर दिया। संदेह गहराने पर कई बैंकों के उच्चाधिकारियों ने ऐसी शाखाओं में आठ नवंबर के बाद हुए लेनदेन की गोपनीय जांच शुरू कर दी है। 
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जिले मेें विभिन्न श्रेणियों की 30 बैंकोें की 252 शाखाएं हैं। अग्रणी बैंक के नाते बैंक ऑफ बड़ौदा की सर्वाधिक 68 शाखाओं से करीब दस लाख खातेदार जुड़े हैं। 30 शाखाओं के माध्यम से लगभगत सात लाख खातेदारों को सेवाएं दे रही एसबीआई यहां दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीयकृत श्रेणी की यूनियन बैंक, नैनीताल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला आदि दर्जनों शाखाएं संचालित कर रही हैं। 
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वहीं निजी क्षेत्र की एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, यस बैंक आदि शाखाएं सीमित संख्या में हैं। इनमें आम लोगों के बजाय अफसरों, नेताओं, उद्यमियों, बड़े कारोबारियों के खाते अधिक हैं, लेकिन उनकी संख्या हजारों में है। इसके बावजूद नोटबंदी लागू होने पर राष्ट्रीयकृत बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को नोटों के संकट का सामना नहीं करना पड़ा। जन सामान्य को राहत दिलाने के लिए निजी बैंकोें ने कैश काउंटरों के बजाय एटीएम के माध्यम से जन सामान्य को नकदी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उनकी बैंकिंग कार्यदिवस खत्म होने के बाद शुरू होने लगी। अंधेरा घिरने के बाद निजी बैंक शाखाओं के बाहर खड़ी लग्जरी कारें और दुपहिया वाहन इस संदेह को बढ़ाते रहे कि पुराने नोट बदलकर असरदारों को उपकृत किया जा रहा है। 
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निजी बैंकों पर काला धन सफेद करने का शक इसलिए भी गहराया कि इसी अवधि में लीड बैंक बॉब और एसबीआई समेत अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकें नगदी प्रवाह सामान्य बनाने को करेंसी के लिए तरसती रहीं। एसबीआई के एक शाखा प्रबंधक के अनुसार आरबीआई से करेंसी का वितरण बैंक और उसके खातेदारों की संख्या को ध्यान में रखकर नहीं किया गया और इसलिए निजी बैंकों के अफसरों ने पुराने नोट बदलने में खूब मुनाफा कमाया। अग्रणी बैंक प्रबंधक बीएम गुप्ता इस आरोप से सहमत नहीं हैं कि पुराने नोट एक्सचेंज करने में निजी बैंकों के स्तर से भारी गड़बड़ी हुई। उनका कहना है कि आरबीआई से बैंक वार करेंसी जारी हुई और ऐसी स्थिति में निजी बैंकों को इसलिए ज्यादा सुकून मिला क्योंकि उनकी शाखाएं सीमित हैं। नोट बदलने में हुए गोरखधंधे से इतर एलबीएम ने कहा कि बैंक शाखाओं में बदले गए नोटों की जांच विभागीय प्रक्रिया का एक अंग है, लेकिन यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो जांच कराएंगे। 
वरिष्ठ नागरिकों ने भुगतान मेें मांगी प्राथमिकता
वरिष्ठ नागरिकों ने बैंक शाखाओं से नगदी भुगतान में प्राथमिकता देने की मांग उठाई है। एसपी हिंदू इंटर कालेज के पुराने भवन में सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। 
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सोसाइटी के जिलाध्यक्ष जितेंद्र देव सक्सेना ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी करके भ्रष्टाचार मिटाने का साहसिक कदम उठाया, लेकिन बैंकों में भुगतान प्राप्त करने में राहत नहीं मिली है। श्रीकृष्ण पाठक ने अलग से काउंटर बनाने के साथ ही बैंक और पुलिस अधिकारियों से व्यवस्था सामान्य बनाने का अनुरोध किया। बैठक में मौजूद मेहरचंद मेहता, कुसुमलता अग्रवाल, कमला रानी शर्मा, सुरैया खान, विष्णु प्रकाश गुप्ता आदि ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

आरबीआई जल्द उपलब्ध कराए नगदी 
केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णा राज के बैंक प्रतिनिधि रामबरन सिंह ने आरबीआई गवर्नर को पत्र भेजकर जिले की अग्रणी बैंक को पर्याप्त नकदी शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होेंने कहा कि नोटबंदी के बाद से अभी तक अग्रणी बैंक बॉब की सभी 68 शाखाओं, बॉब से संबद्ध 51 ग्रामीण बैंक शाखाओं और 65 एटीएम में नकदी की समस्या बनी हुई है।
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