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Shahjahanpur News: रखवाली करते सो गई वृद्धा, सारी फसल चट कर गए छुट्टा पशु
Wed, 31 Jan 2024 03:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 31 Jan 2024 03:30 AM IST
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जलालाबाद। छुट्टा पशु पकड़ने का प्रशासन लाख दावा करे लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। गांवों में पशु किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल बचाने के लिए खेत पर ही मड़ैया डालकर रह रही बुजुर्ग महिला की रात में थोड़ी देर के लिए आंख लग गई। इतने समय में ही जानवर पूरी फसल चर गए। इसी खेत के सहारे गुजर-बसर करने वाली वृद्धा नष्ट फसल देखकर रो पड़ी। उसके सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मंगटोरा गांव में रहने वालीं शिवप्यारी (70) के पति नत्थूलाल की कई वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उसके नाम चार बीघा खेत है। बेटा राजपाल अपनी पत्नी के साथ अलग रहकर खेतीबाड़ी करता है। चार बीघा खेत ही शिवप्यारी के जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। गेहूं की फसल को जानवरों से बचाए रखने के लिए वह खेत पर ही मड़ैया डालकर अपने 12 वर्षीय पौत्र राममोहन के साथ रहती है। शिवप्यारी ने बताया कि सोमवार को रात करीब दो बजे तक वह मड़ैया के बाहर जागकर रखवाली करतीं रहीं। किसी समय उसकी आंख लग गई। दो घंटे बाद तड़के ही उनकी नींद टूट गई। अनहोनी की आशंका से सबसे पहले उन्होंने अपना खेत देखा। आशंका सच साबित हुई। पूरे खेत की फसल चौपट पड़ी थी। अधिकांश फसल जानवरों ने खा ली थी और बची हुई बर्बाद कर दी थी। वृद्धा ने बताया कि किराये के ट्रैक्टर से खेत जुतवाकर गेहूं की बुआई-गुड़ाई कराई थी। जो कुछ पैसा पास में था, वह पूरा लागत में खर्च हो गया। खाने भर का छोड़कर शेष सारा गेहूं बेचकर खर्च चलाने की उम्मीद पाल रखी थी। आंखों में आंसू भरकर शिवप्यारी ने बताया कि पूरी फसल नष्ट हो जाने से खर्च तो छोड़ दीजिए खाने के लिए दाना भी नहीं है। भाकियू नेता कप्तान यादव ने पीड़ित महिला से मिलकर उसका दर्द जाना। उन्होंने पीड़िता को मुआवजा दिलवाने की मांग प्रशासन से की है।
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इस मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में बीडीओ से भी वार्ता की गई है और पीड़िता को हरसंभव सरकारी मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
रविंद्र सिंह, एसडीएम, जलालाबाद
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मंगटोरा गांव में रहने वालीं शिवप्यारी (70) के पति नत्थूलाल की कई वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उसके नाम चार बीघा खेत है। बेटा राजपाल अपनी पत्नी के साथ अलग रहकर खेतीबाड़ी करता है। चार बीघा खेत ही शिवप्यारी के जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। गेहूं की फसल को जानवरों से बचाए रखने के लिए वह खेत पर ही मड़ैया डालकर अपने 12 वर्षीय पौत्र राममोहन के साथ रहती है। शिवप्यारी ने बताया कि सोमवार को रात करीब दो बजे तक वह मड़ैया के बाहर जागकर रखवाली करतीं रहीं। किसी समय उसकी आंख लग गई। दो घंटे बाद तड़के ही उनकी नींद टूट गई। अनहोनी की आशंका से सबसे पहले उन्होंने अपना खेत देखा। आशंका सच साबित हुई। पूरे खेत की फसल चौपट पड़ी थी। अधिकांश फसल जानवरों ने खा ली थी और बची हुई बर्बाद कर दी थी। वृद्धा ने बताया कि किराये के ट्रैक्टर से खेत जुतवाकर गेहूं की बुआई-गुड़ाई कराई थी। जो कुछ पैसा पास में था, वह पूरा लागत में खर्च हो गया। खाने भर का छोड़कर शेष सारा गेहूं बेचकर खर्च चलाने की उम्मीद पाल रखी थी। आंखों में आंसू भरकर शिवप्यारी ने बताया कि पूरी फसल नष्ट हो जाने से खर्च तो छोड़ दीजिए खाने के लिए दाना भी नहीं है। भाकियू नेता कप्तान यादव ने पीड़ित महिला से मिलकर उसका दर्द जाना। उन्होंने पीड़िता को मुआवजा दिलवाने की मांग प्रशासन से की है।
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इस मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में बीडीओ से भी वार्ता की गई है और पीड़िता को हरसंभव सरकारी मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
रविंद्र सिंह, एसडीएम, जलालाबाद