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मिर्जापुर-कलान के पिछड़ेपन को दूर करने वाली बने सरकार

Mon, 28 Feb 2022 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 28 Feb 2022 02:09 AM IST
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The new government should be such that the backwardness of Mirzapur-Kalan should be removed.
मिर्जापुर में चुनावी चौपाल में चुनाव पर चर्चा करते लोग । - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। चुनाव के बाद चौपालों और दुकानों पर नई सरकार बनने को लेकर चर्चाएं हो रहीं हैं। खेती-किसानी से जुड़े लोग छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलवाने वाली सरकार चाहते हैं। युवा रोजगार के लिए तकनीकी शिक्षा और उद्योग धंधे को बढ़ावा चाहते हैं। वहीं आम लोग कोलाघाट पुल का फिर निर्माण कराने की पैरोकारी कर रहे हैं और क्षेत्र का पिछड़ापन हटाना चाहते हैं।
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मिर्जापुर कस्बे में विनोद कुमार लाला की चौपाल पर रविवार को सरकार बनने की चर्चा में मशगूल शिवशंकर दीक्षित का कहना है कि सरकार ऐसी बने जो सभी के लिए समान शिक्षा की व्यवस्था करे। अब तक तो गरीब का बच्चा मिड-डे-मील वाले स्कूल में तथा साधन संपन्न लोगों के बच्चे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाये जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसी गरीब का बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़कर कॉन्वेंट के बच्चे की बराबरी कैसे कर सकता है। ग्राम नौसरा निवासी प्रेमपाल सिंह कहते हैं कि कलान-मिर्जापुर क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। बसपा सरकार में यहां बनवाया गया राजकीय पॉलीटेक्निक भवन को आज तक कक्षाएं संचालन की अनुमति नहीं मिली है। जबकि पालीटेक्निक भवन जर्जर होने लगा है।
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वित्तविहीन कॉलेज के शिक्षक अजय कुमार पांडेय बोले कि सरकार ने गांव-गांव स्कूल-कॉलेजों की मान्यता बांट दी है, मगर इनमें शिक्षकों के लिए कोई नियमावली नहीं बनाई है। पढ़े-लिखे नौजवान अल्प वेतन में पढ़ाने को मजबूर हैं। जो भी सरकार बने वह वित्तविहीन शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन दे। ग्राम आलमगंज निवासी हरी सिंह कुशवाहा कहते हैं कि सरकार गांवों में छुट्टा पशुुओं पर रोक लगाए।
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तभी फसलें बचेंगी और किसान खुशहाल होंगे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य बलवीर सिंह कहते हैं कि कलान-मिर्जापुर क्षेत्र आलू और शकरकंद की पैदावार में सबसे आगे है। इस क्षेत्र में आलू और शकरकंद की खपत के लिए फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाना चाहिए। इससे किसान को आलू और शकरकंद का वाजिब मूल्य और युवाओं को रोजगार मिलेगा।

दवा व्यवसायी शिवम कुमार का कहना है कि नई सरकार दस वर्ष में ही धराशायी हुए कोलाघाट पक्के पुल की जांच कराए, दोषियों के विरुद्ध सख्त कर्रवाई करे और फिर से पुल बनवाए। उनका समर्थन करते हुए बबलू गुप्ता ने कहा कि पुल टूट जाने के बाद क्षेत्र का विकास ही थम गया है। किराना व्यापारी छोटेलाल कहते हैं कि जब से कोलाघाट पुल टूटा है, तब से महंगाई बहुत बढ़ गई है। महंगाई कम करने वाली सरकार बननी चाहिए।
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