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सरकारी गोशाला में मिट्टी चाट रहीं भूखी गायें
शाहजहांपुर, ब्यूरो
Updated Thu, 23 Mar 2017 10:55 PM IST
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सरकारी गोशाला में मिट्टी चाट रहीं भूखी गायें
- फोटो : अमर उजाला
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383 एकड़ जमीन और बैंक में जमा 35 लाख के बाद भी ढंग का चारा तक मयस्सर नहीं
महीनों से नहीं मिला हरा चारा, सूखकर रह गईं हड्डियों की ढांचा
जी हां, यह हालात है कस्बे के खुटार के गांव सिमरा वीरान स्थित राजकीय गोसदन के। इस सदन के बैंक खाते में 35 लाख रुपये से अधिक रकम, 20 लाख की एफडी के साथ ही 383 एकड़ जमीन है। बावजूद इसके यहां पल रही सौ से अधिक गायों को ढंग का चारा तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है। नतीजतन खाने के नाम पर मिट्टी मिला सूखा भूसा और इलाज के नाम पर केवल खानापूरी ही यहां की गायों का नसीब बन गया है। हरा चारा नहीं मिलने और देखरेख के अभाव में गोसदन की कई गायें हड्डियों का ढांचा भर रह गई हैं और तिल-तिल कर मरने को विवश हैं। यह हालत तब है जब डीएम गो सदन के अध्यक्ष और सीडीओ सचिव हैं।
विनोवा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर खुटार के चौहान राज परिवार की रानी ताजकुंवरि ने गांव खुटार के गांव सिमरा वीरान में 383 एकड़ जमीन दान में दे दी थी। इसी भूमि पर राजकीय गोसदन बना हुआ है। गोसदन की देखरेख और सुचारु संचालन के लिए प्रबंध समिति बनी हुई है। गोसदन की लगभग डेढ़ से पौने दो सौ एकड़ भूमि प्रति वर्ष ठेके पर उठाई जाती है। इससे प्राप्त राशि से गायों की देखरेख किए जाने का प्रावधान है, गोसदन के बैंक ऑफ बड़ौदा और डाकघर में खुले खातों में जमा रकम 35 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है, लेकिन गायों की दशा बदतर होती जा रही है। एक कटु सत्य यह भी है कि गोसदन में गायों की संख्या हमेशा सौै के आसपास ही रह पाती है। इसमें भी तमाम गायें चारा, दवा आदि के अभाव में मरणासन्न हैं।
अब जरा गोसदन में गायों को मिल रही सुविधाओं पर ध्यान डाल लेते हैं। गायों का हरा चारा काटने के लिए हाथ से खींची जाने वाली एक चारा मशीन है, लेकिन इसकी हालत देखकर लगता है कि महीनों से हरा चारा काटा ही नहीं गया है। एक बड़ा सवाल है कि हाथ की मशीन से आखिर कितना चार काटा जाता होगा, जिससे 106 गायों का पेट भर सके। चारा लाने के लिए एक डनलप है जो पूरी तरह से टूट चुका है। सात ग्वालों पर सभी गायों को चारा खिलाने की जिम्मेदारी है। दो चौकीदार है जो छत पर खुले में पन्नी तान कर रहने को विवश है। लगभग 60 फिट लंबे टीन शेड में 106 गायें नहीं समा सकती इस कारण ज्यादातर गायें ठंड, वर्षा आदि में भी खुले मैदान में पड़ी रहती हैं। चलने में असमर्थ कई गायें धूप में ही पड़ी रहती हैं। शाम को गायों के आगे सूखा भूसा डाल दिया जाता है, जिसे पशु खाते ही नहीं हैं। कुल मिलाकर गोसदन गायों के लिए किसी नर्क से कम नहीं है।
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कुछ अधिकारी मचा रहे जमकर लूट
गोसदन से जुडे़ कुछ अधिकारी खूब मालामाल हो गए हैं। गोसदन की जमीन की नीलामी में हर वर्ष बड़ा घोटाला किया जाता है। नीलामी पर जमीन लेने वालों से साठगांठ कर उन्हें ज्यादा जमीन जुतवा दी जाती है और किसानों से रुपये लेकर घोटाला कर लिया जाता है।
ग्वालों की मजदूरी से काटे पुताई के रुपये
गोसदन के ग्वाला सुरेश और इमामी ने बताया कि गोसदन के भवन की पुताई के लिए गत माह उनकी मजदूरी से दो-दो हजार रुपये काट लिए गए। उन लोगों को बीच में जबरिया अवकाश दे दिया जाता है, जिससे वह लोग स्थाई होने का दावा न कर सकें। जो भूसा खरीदा जाता है उसमें मिट्टी मिली होती है। भूखी गायें इसे भी खा जाती हैं। गोसदन में तैनात डॉ. विवेक शुक्ला चार-पांच दिन में एक बार आते हैं, जिस कारण गायों के इलाज भी ठीक से नहीं हो पाता है।
जल्द सही होंगी व्यवस्थाएं
मुझे 22 मार्च को ही गोसदन का चार्ज मिला है। गोसदन में एक सबमर्सिबल बोरिंग कराई जाएगी। जिससे पशुओं के पीने की पानी की समस्या का निस्तारण हो सके। गोसदन में केवल अपंग, बांझ गायों को ही रखा जा सकता है। हरे चारे की समस्या है। भूसा बाहर से खरीदना पड़ता है।
डॉ. सुरेंद्र कुमार, प्रभारी राजकीय गोसदन सिमरा वीरान, खुटार
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महीनों से नहीं मिला हरा चारा, सूखकर रह गईं हड्डियों की ढांचा
जी हां, यह हालात है कस्बे के खुटार के गांव सिमरा वीरान स्थित राजकीय गोसदन के। इस सदन के बैंक खाते में 35 लाख रुपये से अधिक रकम, 20 लाख की एफडी के साथ ही 383 एकड़ जमीन है। बावजूद इसके यहां पल रही सौ से अधिक गायों को ढंग का चारा तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है। नतीजतन खाने के नाम पर मिट्टी मिला सूखा भूसा और इलाज के नाम पर केवल खानापूरी ही यहां की गायों का नसीब बन गया है। हरा चारा नहीं मिलने और देखरेख के अभाव में गोसदन की कई गायें हड्डियों का ढांचा भर रह गई हैं और तिल-तिल कर मरने को विवश हैं। यह हालत तब है जब डीएम गो सदन के अध्यक्ष और सीडीओ सचिव हैं।
विनोवा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर खुटार के चौहान राज परिवार की रानी ताजकुंवरि ने गांव खुटार के गांव सिमरा वीरान में 383 एकड़ जमीन दान में दे दी थी। इसी भूमि पर राजकीय गोसदन बना हुआ है। गोसदन की देखरेख और सुचारु संचालन के लिए प्रबंध समिति बनी हुई है। गोसदन की लगभग डेढ़ से पौने दो सौ एकड़ भूमि प्रति वर्ष ठेके पर उठाई जाती है। इससे प्राप्त राशि से गायों की देखरेख किए जाने का प्रावधान है, गोसदन के बैंक ऑफ बड़ौदा और डाकघर में खुले खातों में जमा रकम 35 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है, लेकिन गायों की दशा बदतर होती जा रही है। एक कटु सत्य यह भी है कि गोसदन में गायों की संख्या हमेशा सौै के आसपास ही रह पाती है। इसमें भी तमाम गायें चारा, दवा आदि के अभाव में मरणासन्न हैं।
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अब जरा गोसदन में गायों को मिल रही सुविधाओं पर ध्यान डाल लेते हैं। गायों का हरा चारा काटने के लिए हाथ से खींची जाने वाली एक चारा मशीन है, लेकिन इसकी हालत देखकर लगता है कि महीनों से हरा चारा काटा ही नहीं गया है। एक बड़ा सवाल है कि हाथ की मशीन से आखिर कितना चार काटा जाता होगा, जिससे 106 गायों का पेट भर सके। चारा लाने के लिए एक डनलप है जो पूरी तरह से टूट चुका है। सात ग्वालों पर सभी गायों को चारा खिलाने की जिम्मेदारी है। दो चौकीदार है जो छत पर खुले में पन्नी तान कर रहने को विवश है। लगभग 60 फिट लंबे टीन शेड में 106 गायें नहीं समा सकती इस कारण ज्यादातर गायें ठंड, वर्षा आदि में भी खुले मैदान में पड़ी रहती हैं। चलने में असमर्थ कई गायें धूप में ही पड़ी रहती हैं। शाम को गायों के आगे सूखा भूसा डाल दिया जाता है, जिसे पशु खाते ही नहीं हैं। कुल मिलाकर गोसदन गायों के लिए किसी नर्क से कम नहीं है।
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कुछ अधिकारी मचा रहे जमकर लूट
गोसदन से जुडे़ कुछ अधिकारी खूब मालामाल हो गए हैं। गोसदन की जमीन की नीलामी में हर वर्ष बड़ा घोटाला किया जाता है। नीलामी पर जमीन लेने वालों से साठगांठ कर उन्हें ज्यादा जमीन जुतवा दी जाती है और किसानों से रुपये लेकर घोटाला कर लिया जाता है।
ग्वालों की मजदूरी से काटे पुताई के रुपये
गोसदन के ग्वाला सुरेश और इमामी ने बताया कि गोसदन के भवन की पुताई के लिए गत माह उनकी मजदूरी से दो-दो हजार रुपये काट लिए गए। उन लोगों को बीच में जबरिया अवकाश दे दिया जाता है, जिससे वह लोग स्थाई होने का दावा न कर सकें। जो भूसा खरीदा जाता है उसमें मिट्टी मिली होती है। भूखी गायें इसे भी खा जाती हैं। गोसदन में तैनात डॉ. विवेक शुक्ला चार-पांच दिन में एक बार आते हैं, जिस कारण गायों के इलाज भी ठीक से नहीं हो पाता है।
जल्द सही होंगी व्यवस्थाएं
मुझे 22 मार्च को ही गोसदन का चार्ज मिला है। गोसदन में एक सबमर्सिबल बोरिंग कराई जाएगी। जिससे पशुओं के पीने की पानी की समस्या का निस्तारण हो सके। गोसदन में केवल अपंग, बांझ गायों को ही रखा जा सकता है। हरे चारे की समस्या है। भूसा बाहर से खरीदना पड़ता है।
डॉ. सुरेंद्र कुमार, प्रभारी राजकीय गोसदन सिमरा वीरान, खुटार