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मानसून सीजन नजदीक, तटबंध अभी तक नहीं बने

Wed, 08 Jun 2022 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 12:27 AM IST
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The embankments are not yet built near the monsoon
परौर के नारायण नगर के पास कटान करती रामगंगा का । फाइल फोटो - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। मानसून सीजन नजदीक आ चुका है, लेकिन परौर से लेकर जैतीपुर तक रामगंगा के कटान से तमाम तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। गंगा की तुलना में उथली बहने वाली रामगंगा के जलस्तर में मामूली वृद्धि होते ही मोड़ वाले ठिकानों पर नदी उपजाऊ जमीन का काटना शुरू कर देती है।
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लगातार भूमि कटान से नदी का बहाव कई गांवों के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश की शुरुआत से पहले बाढ़ से बचाव को नए तटबंध नहीं बने और पुराने तटबंधों की देखभाल पर ध्यान नहीं दिया गया तो कटान का कहर बढ़ जाएगा और कई गांवों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाएगा।
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परौर में तीन तटबंध बनाने की जरूरत
परौर। रामगंगा ने मोहनपुर, बिचपुरी और बाजार के बाद परौर के मजरा नारायणनगर पश्चिमी के पास पिछली साल काफी कटान किया था। पहले रामगंगा ने गांव मंजा, नारायणनगर पूर्वी, मोहनपुर, बिचपुरी व बाजार मोहल्ला को अपना निशाना बनाया। कटान से मंजा और नारायणनगर पूर्वी गांव कटकर छिन्न-भिन्न हो चुके हैं। राजा परौर अजय कुमार सिंह के प्रयासों से गत वर्षों में करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से कई तटबंध बने और बाढ़ से बचाव को जिओ ट्यूब की ठोकरें बनाई गईं। नदी के बहाव को देखते अब नारायणनगर पश्चिमी के पास तीन तटबंध बनाने की जरूरत है।
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लोगों का मानना है कि इस बार समय रहते बाढ़ से बचाव के इंतजाम नहीं हुए तो अन्य गांवों की तरह नारायणनगर पश्चिमी भी रामगंगा में समा जाएगा। धर्मेंद्र सिंह फौजी, राजीव सिंह चौहान, मदन पाल सिंह, राम गोपाल मिश्रा, हरिओम कुशवाहा आदि ने तटबंध जल्द बनवाने की मांग की है। परौर की ग्राम प्रधान चांदनी माथुर का कहना है कि नारायण नगर पश्चिमी के लोगों की जो जमीनें कटान से बच गई हैं, उन्हें बचाए रखना तभी संभव होगा जब तटबंधों का जल्द निर्माण हो। संवाद
केसीनगला गांव पर मंडरा रहा कटान का खतरा
जैतीपुर। रामगंगा पिछले दो वर्षों से लगातार धीरे-धीरे कटान करती हुई गढ़ियारंगीन क्षेत्र के गांव केसीनगला के पास पहुंच चुकी है। गत वर्ष पड़ोस के गांव धुबला करीमनगर में कटान रोकने की व्यवस्था की गई थी। इसलिए वहां कटान नहीं हुआ, लेकिन अब नदी की धारा केसीनगला गांव के बिल्कुल पास पहुंच चुकी है।
गांव के माया सहाय, पेशकार, करतार सिंह, विजय प्रकाश, बालकराम, नरेंद्र सिंह, जदुनाथ सिंह, मनीराम कश्यप आदि का कहना है कि गत वर्ष वह लोग केसीनगला गांव में रामगंगा में ठोकरें बनाने के लिए मांग करते रहे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। गत वर्ष आई बाढ़ में गांव के किनारे बना मंदिर बह गया था। यदि इस बार भी बाढ़ से बचाव की व्यवस्था नहीं की गई तो सबसे पहले सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया गांव का प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक शौचालय का वजूद मिटने का खतरा बढ़ जाएगा। संवाद

नारायणनगर पश्चिमी के पास हो रहे कटान की रोकथाम के लिए अवर अभियंता अनूप कुमार को निर्देशित कर दिया गया है। वह अपने स्तर से वहां पर बाढ़ से बचाव को आवश्यक निरोधात्मक कदम जल्द उठाएंगे। रामगंगा के अन्य गांवों को भी कटान से बचाने के लिए विभागीय अभियंताओं को क्षेत्र भ्रमण कर कार्य का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। -सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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