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बिजली आई नहीं, अफसर भी 11 बजे ही चले गए
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Mon, 05 Jun 2017 12:48 AM IST
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हर दिन सूनसान रहने वाली बिलंदपुर से ईंटारोडा गांव को जाने वाली टूटी सड़क में शनिवार को खासी रौनक थी। अधिकारियों की गाड़ियां फर्राटा भर रही थी। मौका था गांव में डीएम समेत गांव के आला अधिकारियों के रात्रि विश्राम कार्यक्रम का। लेकिन विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी हर दिन की तरह शनिवार को भी बिजली ने धोखा दे दिया। अफसरों ने भी देखा कि किस तरह गांव के लोग बिना बिजली दुश्वारियां झेलते हैं। हालांकि जनरेटर की व्यवस्था की गई थी, जिसकी रोशनी में जैसे-तैसे अधिकारियों ने जनसमस्याएं सुनी। लेकिन वे रात भर रुकने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और रात 11 बजे ही अफसरों की गाड़ियों वहां से रवाना हो गई। इस दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें भी बिजली विभाग की ही आई।
शनिवार को माहौल किसी बारात से कम नहीं था। टेंट लगा, हलवाई आए गांव की महिलाओं और आमजनों को टेंट में बुलाया गया, ठीक शाम 7:47 बजे डीएम की गाड़ी आकर प्राइमरी स्कूल के पास रुकी गांव के लोगों ने डीएम का स्वागत किसी बारात की तरह किया। डीएम तो आ गए लेकिन अंधेरे में। बिजली विभाग को कई दिन पहले सूचना भी मिल गई थी इसके बाद भी बिजली सप्लाई नहीं आ रही थी। जनरेटर की रोशनी में स्वागत समारोह के बाद समीक्षा का दौर चला। सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग का नंबर आया। सीएमओ डॉक्टर कमल कुमार ने माइक थाम विभाग की योजनाओं को गिनाना शुरू किया, इस बीच डीएम नरेंद्र कुमार सिंह ने उनसे कान में कुछ कहा। सीएमओ ने तत्काल गांव की एएनएम को तलब किया। टीकाकारण की स्थिति बताने को कहा। गांव का टीकाकरण पूर्ण निकला। इस दौरान डीएम ने गांव के लोगों से पूछा कि किस-किस के यहां प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी हुई। इस पर पूरे गांव का कोई भी व्यक्ति नहीं बोला। डीपीआरओ ने माइक थामते हुए कहा कि ‘क्या बात है बड़ा शांत गांव है किसी को विभाग से कोई शिकायत ही नहीं है।’ बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्री से आयरन की गोली के बारे में जानकारी ली। इस बीच डीएम ने गांव की किशोरियों को बुला लिया और पूछा कि ‘कौन से रंग की गोली खिलाई जाती है। एक ने बता दिया नीले रंग की।’
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बिजली विभाग के एक्सईएन को फटकार
इसके बाद बिजली विभाग की समीक्षा हुई तो शिकायतों की झड़ी लग गई। शिकायत कर्ताओं की भीड़ देख पीडी को कहना पड़ा कि पहले विभाग की योजनाओं को बता लेने दीजिए बाद में सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाएगा। दिलावरपुर गांव में खंभे लगे होने के बाद भी कई माह से बिजली न आने की शिकायत की गई। अधिशासी अभियंता बिजली ने कहा कि काम चल रहा है जल्दी ही इस दिक्कत को हल कर लिया जाएगा। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए कहा कि बिजली से संबंधित कोई भी शिकायत गांव में नहीं रहनी चाहिए। लो वोल्टेज की समस्या पर निर्देश दिया कि ईंटारोड़ा की बिजली सिंधौली सब स्टेशन से की जाए।
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और अधूरा रह गया गांव वालों का सपना
गांव के लोगों में बड़ा कौतूहल था कि देखेंगे कि जिले के अधिकारी कैसे मच्छरदानियों में चारपाई पर सोते हैं। रात में खातिरदारी में जो कमी रह गई थी उसे सुबह पूरा किया जाएगा। अधिकारी भी गांव के लोगों की दिनचर्या देखते। लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो सका। संभवत: बिजली न आने के कारण अधिकारी रात में रुकने की हिम्मत जुटा नहीं पाए। नतीजतन रात्रि विश्राम को आए अफसरों की गाड़ियां रात 11 बजे ही फर्राटा भरती हुई गांव से निकल गई।
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यह अधिकारी रहे मौजूद
सीडीओ टीके शिबु, पीडी अभय कुमार, बीडीओ कंचनमाला, एडीओ पंचायत महराज सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर लईक अहमद अंसारी, डॉक्टर कालीचरन, लेखपाल शिवाकांत बाजपेई, डीपीओ विजयश्री, उप निदेशक कृषि प्रभाकर सिंह, ग्राम प्रधान अवधेश सिंह सहित जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
कोट्स
जन समस्याओं का निस्तारण कराने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों ने दो दिन पहले से ईटारोड़ा गांव में भ्रमण शुरू कर दिया था। शाम से देर रात तक तमाम ग्रामीणों की समस्याओं की सुनवाई कर उनका निस्तारण कराया गया। बाद में गांव के अन्य लोगों ने पहुंचना बंद कर दिया और ऐसी स्थिति में अधिकारी भी मुख्यालय पर लौट आए।
- टीके शिबु , मुख्य विकास अधिकारी
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शनिवार को माहौल किसी बारात से कम नहीं था। टेंट लगा, हलवाई आए गांव की महिलाओं और आमजनों को टेंट में बुलाया गया, ठीक शाम 7:47 बजे डीएम की गाड़ी आकर प्राइमरी स्कूल के पास रुकी गांव के लोगों ने डीएम का स्वागत किसी बारात की तरह किया। डीएम तो आ गए लेकिन अंधेरे में। बिजली विभाग को कई दिन पहले सूचना भी मिल गई थी इसके बाद भी बिजली सप्लाई नहीं आ रही थी। जनरेटर की रोशनी में स्वागत समारोह के बाद समीक्षा का दौर चला। सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग का नंबर आया। सीएमओ डॉक्टर कमल कुमार ने माइक थाम विभाग की योजनाओं को गिनाना शुरू किया, इस बीच डीएम नरेंद्र कुमार सिंह ने उनसे कान में कुछ कहा। सीएमओ ने तत्काल गांव की एएनएम को तलब किया। टीकाकारण की स्थिति बताने को कहा। गांव का टीकाकरण पूर्ण निकला। इस दौरान डीएम ने गांव के लोगों से पूछा कि किस-किस के यहां प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी हुई। इस पर पूरे गांव का कोई भी व्यक्ति नहीं बोला। डीपीआरओ ने माइक थामते हुए कहा कि ‘क्या बात है बड़ा शांत गांव है किसी को विभाग से कोई शिकायत ही नहीं है।’ बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्री से आयरन की गोली के बारे में जानकारी ली। इस बीच डीएम ने गांव की किशोरियों को बुला लिया और पूछा कि ‘कौन से रंग की गोली खिलाई जाती है। एक ने बता दिया नीले रंग की।’
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बिजली विभाग के एक्सईएन को फटकार
इसके बाद बिजली विभाग की समीक्षा हुई तो शिकायतों की झड़ी लग गई। शिकायत कर्ताओं की भीड़ देख पीडी को कहना पड़ा कि पहले विभाग की योजनाओं को बता लेने दीजिए बाद में सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाएगा। दिलावरपुर गांव में खंभे लगे होने के बाद भी कई माह से बिजली न आने की शिकायत की गई। अधिशासी अभियंता बिजली ने कहा कि काम चल रहा है जल्दी ही इस दिक्कत को हल कर लिया जाएगा। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए कहा कि बिजली से संबंधित कोई भी शिकायत गांव में नहीं रहनी चाहिए। लो वोल्टेज की समस्या पर निर्देश दिया कि ईंटारोड़ा की बिजली सिंधौली सब स्टेशन से की जाए।
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और अधूरा रह गया गांव वालों का सपना
गांव के लोगों में बड़ा कौतूहल था कि देखेंगे कि जिले के अधिकारी कैसे मच्छरदानियों में चारपाई पर सोते हैं। रात में खातिरदारी में जो कमी रह गई थी उसे सुबह पूरा किया जाएगा। अधिकारी भी गांव के लोगों की दिनचर्या देखते। लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो सका। संभवत: बिजली न आने के कारण अधिकारी रात में रुकने की हिम्मत जुटा नहीं पाए। नतीजतन रात्रि विश्राम को आए अफसरों की गाड़ियां रात 11 बजे ही फर्राटा भरती हुई गांव से निकल गई।
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यह अधिकारी रहे मौजूद
सीडीओ टीके शिबु, पीडी अभय कुमार, बीडीओ कंचनमाला, एडीओ पंचायत महराज सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर लईक अहमद अंसारी, डॉक्टर कालीचरन, लेखपाल शिवाकांत बाजपेई, डीपीओ विजयश्री, उप निदेशक कृषि प्रभाकर सिंह, ग्राम प्रधान अवधेश सिंह सहित जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
कोट्स
जन समस्याओं का निस्तारण कराने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों ने दो दिन पहले से ईटारोड़ा गांव में भ्रमण शुरू कर दिया था। शाम से देर रात तक तमाम ग्रामीणों की समस्याओं की सुनवाई कर उनका निस्तारण कराया गया। बाद में गांव के अन्य लोगों ने पहुंचना बंद कर दिया और ऐसी स्थिति में अधिकारी भी मुख्यालय पर लौट आए।
- टीके शिबु , मुख्य विकास अधिकारी