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क्षतविक्षत थे शव, अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके परिजन

Tue, 07 Jun 2022 01:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:06 AM IST
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The dead bodies were mutilated, the relatives could not even see the last properly
कांट के भंडेरी गांव में अर्थी को गाड़ी में रखते लोग । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। कांट का भंडेरी गांव सोमवार को आंसुओं के सैलाब में डूबा रहा। हापुड़ में हुए हादसे में दस लोगों की मौत से कई परिवार उजड़ गए। रविवार देर रात जब शव गांव लाए गए तो चीख-पुकार मच गई। शव क्षतविक्षत होने से परिजन ठीक तरीके से अंतिम दर्शन तक न कर सके। सोमवार सुबह करीब पौने दस बजे जब एक साथ आठ लोगों की अर्थी गांव से उठी तो पूरा भंडेरी गांव रो पड़ा।
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शनिवार दोपहर हादसे की सूचना मिलने के बाद से भंडेरी गांव में मातम भरा सन्नाटा पसर गया था। रविवार सुबह तक दस लोगों के मरने व 18 लोगों के झुलसने की पुष्टि हो गई थी। शाम तक मृतकों का पोस्टमार्टम होने के बाद रात करीब 12 बजे के बाद तीन एंबुलेंस से शव गांव पहुंचे। अक्सर जल्दी सो जाने वाले ग्रामीणों की आंख से नींद ओझल थी। सभी अपने घरों के बाहर बैठकर दूसरों का दुख बांटने में लगे थे। शवों के पहुंचते ही मृतकों के परिजन रोने-बिलखने लगे। अपनों को खोने का दर्द इतना था कि चीखने-चिल्लाने की आवाज दूर तक सुनी जा सकती थीं।
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गांव में प्रवेश करते ही सर्वेश का शव दरवाजे के बाहर रखा था। उसके दस कदम आगे कच्चे मकान में अनूप का शव रखा गया था। गर्मी के कारण शवों से दुर्गंध उठ रही थी। अनूप के घर से कुछ आगे ही आंगनबाड़ी केंद्र के पास निर्माणाधीन मंदिर के पास प्रेमपाल (35) पुत्र रामसरन, अनिल उर्फ छोटे (40), राघवेंद्र (19) पुत्र रामनरेश, छविराम (19) पुत्र कल्लू व रामू (25) पुत्र दर्शन व उसके चाचा भूरे (40) का शव रखा था। शवों के पास परिजन बिलखने लगे। करीब पौने दस बजे एक साथ आठ अर्थियां उठीं तो परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अर्थी सजाने से लेकर कोलाघाट तक अंतिम संस्कार में ग्रामीण पूरी मदद करते नजर आए।
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कांपते हाथों से चिताओं को दी मुखाग्नि
जलालाबाद। आठ मृतकों के शवों को सोमवार कोलाघाट स्थित रामगंगा नदी किनारे अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। जब सभी चिताएं एक साथ जलने लगीं तब घाट का माहौल बेहद गमगीन हो गया। वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। अनिल के शव को उसके भाई राकेश, राघवेंद्र के शव को पिता रामनरेश, प्रेमपाल की चिता को भाई राजपाल, छविराम को पिता कल्लू, भूरे को उसके भतीजे सुशील, रामू को भाई श्यामू, सर्वेश को पिता पप्पू और अनूप को भी उनके पिता राजेश ने कंपकंपाते हाथों से मुखाग्नि दी। घाट पर व्यवस्था के मद्देनजर तहसीलदार जलालाबाद चमन सिंह, सीओ जलालाबाद मस्सा सिंह के अलावा थाना प्रभारी जलालाबाद, कांट व मिर्जापुर मौजूद रहे।
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