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रिहाई के बाद बंदी भी बनेंगे ‘कमाऊ पूत’

पीयूष दुबे, शाहजहांपुर Updated Tue, 31 Mar 2015 12:02 AM IST
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जेल से रिहा होने के बाद बंदी फिर अपराध की ओर रुख न करें और अपने परिवार के भरण-पोषण में सक्षम बनें, इसके लिए उन्हें रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बंदी भी परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ‘कमाऊ पूत’ बनेंगे। इससे उन्हें समाज की मुख्य धारा में जुड़ने के लिए आसानी रहेगी।
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लंबे अर्से तक जेल में बंद रहने के बाद रिहा होेकर समाज की मुख्य धारा में लौटने को आतुर बंदियों के सामने सबसे बड़ी समस्या रोजगार से जुड़ने की होती है। रोजगार न होने की वजह से उनके सामने जीविकोपार्जन की समस्या मुंह बाए खड़ी रहती है। इसी वजह से वह दोबारा अपराधिक घटनाओं में लिप्त हो जाते हैं। इससे आपराधिक घटनाएं घटने की बजाय उनमें इजाफा हो जाता है।

जिला कारागार में सजा काट रहे बंदियों को कई ग्रुपों में करके रोजगार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें कई बंदी ऐसे हैं, जिन्हें आधुनिक युग की मुख्य जरूरतों में शामिल वस्तुओं को सही करने और स्वरोजगार करने वाली तमाम ट्रेडों को सिखाया जा रहा है।                                                                                         
इस संबंध में डिप्टी जेलर, शिक्षा एवं स्वरोजगार प्रभारी जीएस यादव ने कहा कि 31 मार्च को तीन माह के दो प्रशिक्षणों का समापन होगा। इसमें 20 बंदियों को इन्वर्टर मरम्मत करने और 20 बंदियों को फैब्रिक पेंटिंग करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 125 पुरुषों को अगरबत्ती और मोमबत्ती और वाशिंग पाउडर बनाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कहा कि यह प्रशिक्षण जन शिक्षण संस्थान की ओर से दिया जा रहा है।

अचार, वाशिंग पाउडर बनाएंगी महिला बंदी
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राममिलन वर्मा के निर्देशन में मार्च में जिला कारागार में प्रशिक्षण कैंप लगाए गए। इसमें करीब 50 महिलाओं को अचार और वाशिंग पाउडर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण लेने वालों में गुड़िया, मिथिलेश, गीता, रामश्री, नीलम, सावित्री, बिटोली आदि शामिल हैं।

हत्यारोपी सलीम करेगा फैब्रिक पेंटिंग
तिलहर क्षेत्र का रहने वाला कैदी सलीम पुत्र अख्तर हत्या करने के मामले में तीन वर्ष से सजा काट रहा है। इतने दिनों में उसके मनस्थिति में भी बदलाव आया। प्रशिक्षण के दौरान हत्यारोपी  सलीम ने लगन के साथ फैब्रिक पेंटिंग सीखी। जेल अधिकारियों के अनुसार सलीम फैब्रिक पेंटिंग करने की बात कहता है।

बंदी पुनर्वास में ये विभाग करेंगे सहयोग
डीएम के प्रयासों से जिला कारागार में फरवरी माह में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें बंदियों के पुनर्वास एवं स्वरोजगार मुहैया कराने के लिए जिला समाज कल्याण विभाग, मत्स्य पालक, विकलांग कल्याण विभाग, पशुपालन विभाग और अल्पसंख्यक विभाग बंदियों को आर्थिक सहायता से लेकर अन्य कार्यों में सामान्य लोगों के जैसी मदद करेंगे।

‘बंदियों को स्वरोजगार और पुनर्वास के लिए जिला कारागार में पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जेल से बाहर जाने के बाद बंदी  खुद का रोजगार करके समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें।’
- मनीष कुमार, प्रभारी जेल अधीक्षक एवं जेलर, जिला कारागार

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