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Shahjahanpur News: दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष का कारावास
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शाहजहांपुर। अदालत ने दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दोषी के कृत्य की शिकायत करने पर परिजनों के घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में अदालत ने चार दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया है।
पुवायां के रहने वाले एक व्यक्ति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 अप्रैल 2022 को रात लगभग 11:30 बजे वह अपने घर में सो रहा था। रात में उसे आहट लगी तो आंख खुल गई। उसने देखा कि गुफरान खां उर्फ मजन्ने उसकी बहन से छेड़खानी कर रहा है। उसने घरवालों की मदद से गुफरान को पकड़ लिया और उसके परिवार वालों को सूचना दी।
सूचना पाकर गुफरान के परिवार वाले रुबान खां, मैनुश, जैनुश, शाबान, वारिसा, रहनुमा उसके घर में घुस आए। उन लोगों ने लाठी-डंडों से उसके परिवार वालों को बुरी तरह से पीटा। इसके बाद वे लोग धमकी देते हुए चले गए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की।
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पुलिस ने मारपीट, दुष्कर्म व अन्य धाराओं में गुफरान और सेवान खां, जैनुश, मैनुश, और रुबान के खिलाफ मारपीट व अन्य धाराओं में आरोपपत्र भेजा। त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र नाथ पांडेय ने दुष्कर्म के दोषी गुफरान को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया। इसके अलावा सेवान खां, जैनुश, मैनुश और रुबान को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
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चेक बाउंस होने पर लगाया अर्थदंड
शाहजहांपुर। चेक बाउंस होने और उधार लिए रुपये न लौटाने पर अदालत ने दोषी महिला को अर्थदंड व अदालत उठने तक सजा से दंडित किया है।
मदनापुर के रहने वाले आशेश्वर सिंह ने अपर सिविल जज न्यायालय में त्रिलोकपुर गांव की पूनम शर्मा के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि पूनम के पिता हरीराम से उनके घरेलू संबंध थे। हरीराम ने अपनी बेटी के विवाह के लिए उनसे सात लाख रुपये मांगे।
आशेश्वर सिंह ने 22 अप्रैल 2019 को अपने खाते से सात लाख रुपये निकालकर दे दिए। हरीराम ने बेटी पूनम की शादी के बाद रुपये वापस करने का आश्वासन दिया। पूनम ने दो मई को अपने खाते का एक चेक उन्हें दिया। एक जून 2019 को आशेश्वर ने चेक कैश कराने का प्रयास किया तो पता चला कि खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है।
इसके बाद उन्होंने 24 फरवरी 2020 को न्यायालय में परिवाद दायर किया। अदालत ने पूनम शर्मा को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाया। उसे न्यायालय उठने तक की सजा और 7,10000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया। अधिरोपित अर्थदंड से सात लाख पांच हजार रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाने और शेष धनराशि राज्य सरकार के खाते में जमा करने के आदेश अदालत ने दिए। संवाद
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पुवायां के रहने वाले एक व्यक्ति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 अप्रैल 2022 को रात लगभग 11:30 बजे वह अपने घर में सो रहा था। रात में उसे आहट लगी तो आंख खुल गई। उसने देखा कि गुफरान खां उर्फ मजन्ने उसकी बहन से छेड़खानी कर रहा है। उसने घरवालों की मदद से गुफरान को पकड़ लिया और उसके परिवार वालों को सूचना दी।
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सूचना पाकर गुफरान के परिवार वाले रुबान खां, मैनुश, जैनुश, शाबान, वारिसा, रहनुमा उसके घर में घुस आए। उन लोगों ने लाठी-डंडों से उसके परिवार वालों को बुरी तरह से पीटा। इसके बाद वे लोग धमकी देते हुए चले गए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की।
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पुलिस ने मारपीट, दुष्कर्म व अन्य धाराओं में गुफरान और सेवान खां, जैनुश, मैनुश, और रुबान के खिलाफ मारपीट व अन्य धाराओं में आरोपपत्र भेजा। त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र नाथ पांडेय ने दुष्कर्म के दोषी गुफरान को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया। इसके अलावा सेवान खां, जैनुश, मैनुश और रुबान को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
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चेक बाउंस होने पर लगाया अर्थदंड
शाहजहांपुर। चेक बाउंस होने और उधार लिए रुपये न लौटाने पर अदालत ने दोषी महिला को अर्थदंड व अदालत उठने तक सजा से दंडित किया है।
मदनापुर के रहने वाले आशेश्वर सिंह ने अपर सिविल जज न्यायालय में त्रिलोकपुर गांव की पूनम शर्मा के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि पूनम के पिता हरीराम से उनके घरेलू संबंध थे। हरीराम ने अपनी बेटी के विवाह के लिए उनसे सात लाख रुपये मांगे।
आशेश्वर सिंह ने 22 अप्रैल 2019 को अपने खाते से सात लाख रुपये निकालकर दे दिए। हरीराम ने बेटी पूनम की शादी के बाद रुपये वापस करने का आश्वासन दिया। पूनम ने दो मई को अपने खाते का एक चेक उन्हें दिया। एक जून 2019 को आशेश्वर ने चेक कैश कराने का प्रयास किया तो पता चला कि खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है।
इसके बाद उन्होंने 24 फरवरी 2020 को न्यायालय में परिवाद दायर किया। अदालत ने पूनम शर्मा को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाया। उसे न्यायालय उठने तक की सजा और 7,10000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया। अधिरोपित अर्थदंड से सात लाख पांच हजार रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाने और शेष धनराशि राज्य सरकार के खाते में जमा करने के आदेश अदालत ने दिए। संवाद