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अखिलेश से कई सूदखोरों ने की वसूली, अविनाश दूसरों से भी दिलाता रहा कर्जा
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शाहजहांपुर। अखिलेश गुप्ता सूदखोरों के शिकंजे में बुरी तरह फंस चुके थे। सूदखोर अविनाश वाजपेयी ने पहले उन्हें खुद ब्याज पर रुपये दिए। फिर अपनी रकम प्राप्त करने के लिए उन्हें दूसरे से रकम दिलवाई। दूसरे की रकम दिलवाने को तीसरे सूदखोर से पैसा दिलवाया। इस तरह से अखिलेश का पूरा परिवार सूदखोरी के चंगुल में छटपटाने लगा। नतीजतन पूरे परिवार ने जान दे दी।
अविनाश खुद तो सूद का काम करता ही है। दूसरों से ब्याज पर रुपये दिलाने पर कमीशन वसूलता है। इसी चक्रव्यूह अखिलेश का परिवार बुरी तरह फंस गया था। अविनाश ने खुद के 12 लाख का कर्जा चुकाने के लिए अखिलेश को दूसरे सूदखोर से भी रुपये दिलाए। इसके बाद उस सूदखोर का कर्जा चुकाने के लिए तीसरे सूदखोर से रुपये दिलाए। इसी तरह से उसने अखिलेश को ऐसे जाल में फंसा दिया था। सारे सूदखोरों से अविनाश अपना मुनाफा लेता था। इसी वजह से अखिलेश को ब्याज पर मिली रकम दिन दूनी-रात चौगुनी हो रही थी। यह रकम लगभग एक करोड़ के आसपास पहुंच गई थी। अविनाश ने इसके बाद अखिलेश पर मकान बेचने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
सूदखोरों के निर्मम व्यवहार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस मकान को अखिलेश ने बड़ी हसरत से बनवाया था, उसी में वह बतौर किराएदार रहने लगे थे। इससे वह कई साल किराये के मकान में गुजारा। कुछ वर्ष पहले उन्होंने कच्चा कटरा में अपना मकान बनवाया था। करीब 130 गज में अखिलेश ने दो मंजिला मकान बनवा दिया था। नीचे दवाइयों को रखने के लिए गोदाम बनवाया था जबकि दूसरी मंजिल में पूरा परिवार रहता था। व्यापार के लिए कांट के सूदखोर अविनाश वाजपेयी से करीब 12 लाख रुपये लिए थे। सूदखोर इतना शातिर है कि उसने जल्द ही पैसा चुकाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। फिर 60-70 लाख रुपये के मकान को महज 12 लाख रुपये में खरीदा दर्शाया और अखिलेश को वहां बतौर किरायेदार रख दिया था। चार-पांच दिन पहले उसने मकान खाली करने का नोटिस भी अविनाश ने भेजा था।
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पुलिस के मुताबिक 2019 में अविनाश ने अखिलेश गुप्ता के मकान की रजिस्ट्री सिर्फ 12 लाख रुपये में अपने नाम करा ली। दाखिल खारिज कराने के बाद अखिलेश गुप्ता को किरायानामा बनवाकर बतौर किरायेदार मकान में रख दिया। चार-पांच दिन पहले अखिलेश को अविनाश ने मकान खाली करने का लीगल नोटिस भेजा था। कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही अविनाश बराबर अखिलेश को धमका रहा था। इसी सब से अखिलेश का पूरा परिवार अवसादग्रस्त हो गया।
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दस साल से ब्याज का काम कर रहा अविनाश, बना ली प्रापर्टी
कांट में रहने वाले अविनाश वाजपेयी पिछले दस साल से ब्याज का काम कर रहा है। इस व्यापार से उसने देखते ही देखते कम उम्र में अच्छी खासी प्रापर्टी बना ली थी। प्रापर्टी बेचने-खरीदने का काम भी अविनाश कर रहा था। अविनाश की शादी बरेली की रहने वाली एक लड़की से हाल में तय हुई थी। वह रंगबाजी और दबंगई के साथ रहता था।
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मार्च में ही लिख लिया था सुसाइड नोट
अखिलेश गुप्ता कई साल से सूदखोर से परेशान था। अखिलेश गुप्ता के घर से पुलिस को तीन सुसाइड नोट मिले थे। तीनों में लगभग एक ही बात लिखी है। इसमें एक सुसाइड नोट में मार्च लिखा हुआ है। तारीख का उल्लेख नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश ने मार्च में ही सुसाइड का फैसला कर लिया था। इसके बाद दूसरे सुसाइड नोट में तारीख नहीं पड़ी है। तीसरे सुसाइड नोट में तारीख छह जून पड़ी है जिसे बाद में सात जून किया गया है। पुलिस ने सारे सुसाइड नोट कब्जे में ले लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच से अखिलेश की हैंडराइटिंग की पुष्टि की जाएगी। घर से बरामद अखिलेश की डायरी में भी सारा हिसाब-किताब लिखा हुआ है।
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हर महीने ब्याज मांगता था
अविनाश को मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा था। वह हर महीने अखिलेश पर ब्याज के रुपये देने का दबाव डालता था। बताया जा रहा है कि अखिलेश को अविनाश ने छह प्रतिशत मासिक दर पर रुपये दिए थे। -
अखिलेश के मकान की रजिस्ट्री आदि कागजात विवेचना में शामिल किए गए हैं। एक वरिष्ठ निरीक्षक को विवेचना में लगाया गया है ताकि साक्ष्य संकलन मजबूती से हो सके। आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए पुलिस काम कर रही है।
-एस आनंद, एसपी
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अविनाश खुद तो सूद का काम करता ही है। दूसरों से ब्याज पर रुपये दिलाने पर कमीशन वसूलता है। इसी चक्रव्यूह अखिलेश का परिवार बुरी तरह फंस गया था। अविनाश ने खुद के 12 लाख का कर्जा चुकाने के लिए अखिलेश को दूसरे सूदखोर से भी रुपये दिलाए। इसके बाद उस सूदखोर का कर्जा चुकाने के लिए तीसरे सूदखोर से रुपये दिलाए। इसी तरह से उसने अखिलेश को ऐसे जाल में फंसा दिया था। सारे सूदखोरों से अविनाश अपना मुनाफा लेता था। इसी वजह से अखिलेश को ब्याज पर मिली रकम दिन दूनी-रात चौगुनी हो रही थी। यह रकम लगभग एक करोड़ के आसपास पहुंच गई थी। अविनाश ने इसके बाद अखिलेश पर मकान बेचने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
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सूदखोरों के निर्मम व्यवहार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस मकान को अखिलेश ने बड़ी हसरत से बनवाया था, उसी में वह बतौर किराएदार रहने लगे थे। इससे वह कई साल किराये के मकान में गुजारा। कुछ वर्ष पहले उन्होंने कच्चा कटरा में अपना मकान बनवाया था। करीब 130 गज में अखिलेश ने दो मंजिला मकान बनवा दिया था। नीचे दवाइयों को रखने के लिए गोदाम बनवाया था जबकि दूसरी मंजिल में पूरा परिवार रहता था। व्यापार के लिए कांट के सूदखोर अविनाश वाजपेयी से करीब 12 लाख रुपये लिए थे। सूदखोर इतना शातिर है कि उसने जल्द ही पैसा चुकाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। फिर 60-70 लाख रुपये के मकान को महज 12 लाख रुपये में खरीदा दर्शाया और अखिलेश को वहां बतौर किरायेदार रख दिया था। चार-पांच दिन पहले उसने मकान खाली करने का नोटिस भी अविनाश ने भेजा था।
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पुलिस के मुताबिक 2019 में अविनाश ने अखिलेश गुप्ता के मकान की रजिस्ट्री सिर्फ 12 लाख रुपये में अपने नाम करा ली। दाखिल खारिज कराने के बाद अखिलेश गुप्ता को किरायानामा बनवाकर बतौर किरायेदार मकान में रख दिया। चार-पांच दिन पहले अखिलेश को अविनाश ने मकान खाली करने का लीगल नोटिस भेजा था। कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही अविनाश बराबर अखिलेश को धमका रहा था। इसी सब से अखिलेश का पूरा परिवार अवसादग्रस्त हो गया।
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दस साल से ब्याज का काम कर रहा अविनाश, बना ली प्रापर्टी
कांट में रहने वाले अविनाश वाजपेयी पिछले दस साल से ब्याज का काम कर रहा है। इस व्यापार से उसने देखते ही देखते कम उम्र में अच्छी खासी प्रापर्टी बना ली थी। प्रापर्टी बेचने-खरीदने का काम भी अविनाश कर रहा था। अविनाश की शादी बरेली की रहने वाली एक लड़की से हाल में तय हुई थी। वह रंगबाजी और दबंगई के साथ रहता था।
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मार्च में ही लिख लिया था सुसाइड नोट
अखिलेश गुप्ता कई साल से सूदखोर से परेशान था। अखिलेश गुप्ता के घर से पुलिस को तीन सुसाइड नोट मिले थे। तीनों में लगभग एक ही बात लिखी है। इसमें एक सुसाइड नोट में मार्च लिखा हुआ है। तारीख का उल्लेख नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश ने मार्च में ही सुसाइड का फैसला कर लिया था। इसके बाद दूसरे सुसाइड नोट में तारीख नहीं पड़ी है। तीसरे सुसाइड नोट में तारीख छह जून पड़ी है जिसे बाद में सात जून किया गया है। पुलिस ने सारे सुसाइड नोट कब्जे में ले लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच से अखिलेश की हैंडराइटिंग की पुष्टि की जाएगी। घर से बरामद अखिलेश की डायरी में भी सारा हिसाब-किताब लिखा हुआ है।
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हर महीने ब्याज मांगता था
अविनाश को मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा था। वह हर महीने अखिलेश पर ब्याज के रुपये देने का दबाव डालता था। बताया जा रहा है कि अखिलेश को अविनाश ने छह प्रतिशत मासिक दर पर रुपये दिए थे। -
अखिलेश के मकान की रजिस्ट्री आदि कागजात विवेचना में शामिल किए गए हैं। एक वरिष्ठ निरीक्षक को विवेचना में लगाया गया है ताकि साक्ष्य संकलन मजबूती से हो सके। आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए पुलिस काम कर रही है।
-एस आनंद, एसपी