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ऐेसे तो आतंकियों का भी बना दिया जाएगा पासपोर्ट

Mon, 18 Sep 2017 11:19 PM IST
वैभव शुक्ला पीलीभीत।
वैभव शुक्ला पीलीभीत। Updated Mon, 18 Sep 2017 11:19 PM IST
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Such terrorists will also be made passport
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पासपोर्ट सत्यापन में फिर उजागर हुई गंभीर लापरवाही
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पुलिस ही नहीं, शिक्षा और तहसील प्रशासन भी घेरे में

विदेश भेजने के लिए सबसे अहम दस्तावेज माने जाने वाले पासपोर्ट के सत्यापन को लेकर बरती जा रही लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। स्थलीय जांच करने के बजाए किस तरह से बिना कहीं जाए बैठे बिठाए ओके रिपोर्ट लगाई जा रही है, इसकी हकीकत पूरनपुर के सुरजीत सिंह और परमजीत सिंह के पासपोर्ट बनाने के मामले से उजागर हो गया है। पुलिस, शिक्षा विभाग से लेकर तहसील प्रशासन से बनवाकर दिए गए अभिलेख फर्जी साबित हो गए। यह कहना गलत नहीं होगा कि आलम यही रहा तो आतंकी का भी आसानी से पासपोर्ट जारी कर दिया जाएगा।
आवेदन पत्र में सुरजीत ने अपना पता पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के शेरपुर मकरंद गांव दर्शाया है, जबकि उस गांव में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। उधर, गनेशगंज मोहल्ले के निवासी बताए गए परमजीत सिंह को लेकर भी यही स्थिति है, जबकि पुलिस की रिपोर्ट से लेकर तहसील प्रशासन से इनको लेकर कई प्रमाण पत्र जारी किए हैं। पिछले दिनों सामने आई शिकायत के बाद जब पुलिस ने जांच कराई तो हकीकत सामने आई। माह जुलाई और अगस्त में बनाए गए इन दोनों के पासपोर्ट में लगाई गई सत्यापन रिपोर्ट गलत निकली। एसपी ने ओके रिपोर्ट लगाने वाले पूरनपुर कोतवाली के एचसीपी रणवीर सिंह को निलंबित कर दिया। खास बात है कि मामला सिर्फ पुलिस की लापरवाही तक सीमित नहीं है। दोनों के निवास प्रमाण पत्र तहसील पूरनपुर से बनवाए गए, जबकि उनका ठिकाना कोई नहीं जानता। यह भी आंख मूंदकर बना दिए गए। सुरजीत की एक फर्जी मार्कशीट माधोटांडा के विद्यालय से बनवाकर लगवाई गई। इसकी सच्चाई सामने आने के बाद मामला उच्च स्तर तक पहुंचा ही नहीं बल्कि बारीकी से जांच के निर्देश भी जिला स्तरीय अधिकारियों को दिए गए हैं। जिसके बाद से खलबली मच गई है। फर्जी पासपोर्ट बनवाने के पीछे उनका मकसद क्या था? कही वह कोई आतंकी गतिविधि में संलिप्त तो नहीं? आखिर वह कहां चले गए? इन सब सवालों के जवाब की तलाश तो सभी को है, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है।        
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आखिर कौन हैं सुरजीत और परमजीत?        
बीते माह दोनों युवकों का पासपोर्ट बना दिया गया। अब न तो उनके ठिकाने का पुलिस को पता है, न ही कोई अन्य जानकारी। सिर्फ इन दो नामों के आधार पर कोतवाल पूरनपुर की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है। उनकी तलाश को हर कदम विफल हो रहा है। अभिलेखों में दिए गए पते पर जांच करने पर कोई भी उनको न तो नाम से जानता है, न ही फोटो देख पहचान सका।        
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एक और पुलिसकर्मी भी रडार पर        
एक एचसीपी पर लापरवाही बरतने पर गाज गिर चुकी है। इसके बाद एक और पुलिसकर्मी की तलाश है। जिसने परमजीत सिंह के आवेदन पर अपनी वेरिफिकेशन रिपोर्ट लगाई थी। वह जनपद में किस विंग में है, या फिर कहीं गैर जनपद स्थानांतरित हो गया। इसका पता किया जा रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले        
फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला वैसे तो नया नहीं है। पिछले दिनों अमरिया से एक घटना सामने आई तो हाल ही में न्यूरिया में अवैध तरीके से बार्डर पार कर घुसे बांग्लादेशी युवक के पकड़े जाने पर भी उसके पास से पासपोर्ट आदि कई अन्य अभिलेख बरामद हुए थे। 

एक अधिवक्ता भी शामिल, विदेश से लौटने का इंतजार        
पूरे प्रकरण में पासपोर्ट बनाए जाने से पहले की जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया तो कटघरे में है। साथ ही इसे एक गिरोह के तौर पर देखा जा रहा है। जिसमें पूरनपुर के एक अधिवक्ता का नाम सबसे आगे है। जिसके बारे में जानकारी लगी है कि वह आठ सितंबर को कनाडा चला गया है। उसके लौटने का पुलिस इंतजार कर रही है। इसको लेकर चर्चा है कि यही अधिवक्ता ने इसके व कई अन्य के पासपोर्ट बनवाए थे और यही हर जगह साठगांठ का जिम्मा संभालता है।        

पासपोर्ट होगा निरस्त, लुक आउट नोटिस की तैयारी       
पुलिस को अब तक न तो सुरजीत सिंह का पता लग सका है, न ही परमजीत सिंह का। उनके बारे में कोई जानकारी भी अफसरों के पास नहीं है। ऐसे में लुक आउट नोटिस जारी कराने की तैयारी है। इसके अलावा दोनों के पासपोर्ट निरस्त कराए जाएंगे, ताकि अगर वह कहीं विदेश चले गए हैं, तो वापसी करते ही पुलिस की गिरफ्त में आ सकें।        

अन्य पासपोर्ट को लेकर भी होगी जांच         
हर माह पासपोर्ट बनने का औसत निकाला जाए तो करीब तीन सौ है। अब पूरनपुर से मामला संज्ञान में आने के बाद हाल ही में बने कई अन्य पासपोर्ट को लेकर भी जांच कराई जाएगी। यह पता लगाया जाएगा।        

  
यह था पूरा मामला       

पूरनपुर के शेरपुर मकरंद गांव निवासी सुरजीत सिंह और गनेशगंज निवासी परमजीत सिंह के पासपोर्ट जुलाई व अगस्त माह में बनाए गए। इनके फर्जी होने की शिकायत मिलने पर जांच हुई तो दर्शाया गया पता गलत निकला। दोनों को स्थानीय स्तर पर कोई नहीं जानता। कागजों में बनाए गए उनके गारेंटरों ने भी उनको पहचानने से इनकार कर दिया। यह भी कहा कि उनको इस मामले में कोई जानकारी तक नहीं है। जिसके बाद एक एचसीपी को निलंबित कर जांच तेज कर दी गई है।
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