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विद्यार्थियों ने थाने जाकर समझी पुलिस की कार्यप्रणाली
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पुवायां थाने में इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठकर समस्याएं सुनती छात्रा अमृत कौर
- फोटो : POWAYAN
पुवायां। अक्सर पुलिस को देखकर डरे-सहमे रहने वाले छात्र-छात्राओं का खाकी के प्रति नजरिया बदल गया। बृहस्पतिवार को पुवायां के द सेक्रेड हार्ट एकेडमी के बच्चों ने थाने पहुंचकर न सिर्फ पुलिस की कार्यशैली को समझा, बल्कि पुलिसकर्मियों से संवाद किया। बच्चों ने जाना कि पीड़ित के थाने पहुंचने के बाद उसे क्या करना होता है। रिपोर्ट कैसे दर्ज की जाती है और महिलाओं से संबंधित समस्याएं कैसे सुनी जाती है।
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों को पुवायां थाने का भ्रमण कराया गया। इंस्पेक्टर केबी सिंह ने कहा कि पहले पढ़ाई के लिए अच्छे साधन नहीं थे, पैदल स्कूल जाते थे, जमीन पर बैठकर पढ़ते थे। अब जिस तरह से सुविधा मिलती है, उसी तरह से आप लोग बेहतर परिणाम दे सकते हैं। मोबाइल जितना सुविधाजनक है उतना ही खतरनाक भी है। किसी को ओटीपी न बताएं, किसी लिंक पर लागइन न करें।
छात्र तनिष्क गुप्ता ने एफआईआर के बारे में जानकारी की। इंस्पेक्टर ने बताया कि एफआईआर को प्रथम सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। कोई भी अपराध होने पर सबसे पहले प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होती है। इसके बाद जांच कर चार्जशीट अधिकारियों के पास भेज कर कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है। बच्चों ने कंप्यूटर पर रिपोर्ट दर्ज होने की प्रक्रिया देखी। इसके बाद महिला हेल्पडेस्क पर महिला अपराधों की सुनवाई भी देखी। बच्चों ने बैरक, मैस, हवालात, कार्यालय आदि में भी जाकर व्यवस्थाएं देखीं। इस दौरान सवाल किया कि कौन बच्चा पुलिस में भर्ती होकर सेवा करना चाहता है तो श्रेष्ठ मिश्रा ने कहा कि वह पुलिस बनना चाहती है।
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अपराध को सहना नहीं कहना है...
इंस्पेक्टर केबी सिंह ने छात्र-छात्राओं से कहा कि आपके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, आपके परिवार में मां, बहन, भाभी या पड़ोस में कोई महिला को कोई परेशानी है तो आप उसकी आवाज बन सकते हैं और पुलिस को बता सकते हैं। इसीलिए आपको कुछ भी सहना नहीं कहना है। अपने परिवार के लोगों को भी यह बताएं कि महिलाओं का सम्मान करें। आप ने एक व्यक्ति को समझाकर नशे से दूर किया, एक पीड़ित व्यक्ति की मदद कर दी तो समझो राष्ट्र के लिए आपने योगदान दिया है।
सिपाही ने सुनाया भजन, राष्ट्रगान से समापन
सिपाही अमित शर्मा ने बच्चों को भजन सुनाया। इससे बच्चे काफी खुश दिखे। बच्चों को पुलिस की ओर से जलपान भी कराया गया। बच्चों के कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बहुत जानकारियां मिलीं
थाने का भ्रमण कर बहुत जानकारियां मिलीं। पुलिस से बात कर हिम्मत मिली और देश, समाजसेवा की प्रेरणा मिली। -कशिश पांडे, छात्रा
पुलिस से डरें नहीं
थाने जाकर समझ में आया कि पुलिस से डरने की जरूरत नहीं है। कोई समस्या होने पर पुलिस की मदद लेनी चाहिए। -पूर्णिमा वर्मा, छात्रा
पुलिस मदद करती है
कार्यक्रम काफी उपयोगी रहा। पुलिस सभी लोगों की समस्याओं को सुनकर मदद करती है। बैरक, मैस, कार्यालय की व्यवस्थाओं को भी जाना। -रति पांडे, छात्रा
एफआईआर की जानकारी मिली
सरकार की योजनाओं की जानकारी मिली। पुलिस किस तरह मदद करती है, यह भी समझा। रिपोर्ट दर्ज करने आदि की जानकारी मिली। -इशिता अवस्थी, छात्रा
पुलिस दोस्त है
आमतौर पर लोग पुलिस से डरते हैं, लेकिन अब पता चला कि पुलिस दोस्त है। बिना डरे पुलिस की मदद ले सकते हैं। टोल फ्री नंबर भी बताए। -खुशी मिश्रा, छात्रा
हेल्प डेस्क अच्छी लगी
महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क पर जाकर अच्छा लगा। यहां महिलाएं बेझिझक अपनी बात शेयर कर मदद ले सकती हैं। -गायत्री शर्मा, छात्रा
एक दिन की थाना प्रभारी बनीं अमृत कौर, सुनी समस्याएं
स्कूल की छात्रा अमृत कौर को एक दिन का थाना प्रभारी बनाया गया। अमृत कौर ने इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठकर पुलिस का धन्यवाद किया और इसके बाद उन्होंने पुलिस से संबंधित तमाम जानकारियां लीं। अमृत कौर के साथी छात्र-छात्राएं उनको थाना प्रभारी बना देख काफी रोमांचित थे। इस बीच गांव चौढ़ेरा निवासी भाईलाल की पत्नी रामदेवी तहरीर लेकर थाने पहुंची। अमृत कौर ने रामदेवी के प्रार्थनापत्र पर दरोगा को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान अमृत कौर ने सिपाहियों से उनके हल्का क्षेत्र के बारे में भी जानकारी ली और गश्त तेज करने के साथ ही छोटी सूचनाओं पर भी कार्रवाई करने को कहा।
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अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों को पुवायां थाने का भ्रमण कराया गया। इंस्पेक्टर केबी सिंह ने कहा कि पहले पढ़ाई के लिए अच्छे साधन नहीं थे, पैदल स्कूल जाते थे, जमीन पर बैठकर पढ़ते थे। अब जिस तरह से सुविधा मिलती है, उसी तरह से आप लोग बेहतर परिणाम दे सकते हैं। मोबाइल जितना सुविधाजनक है उतना ही खतरनाक भी है। किसी को ओटीपी न बताएं, किसी लिंक पर लागइन न करें।
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छात्र तनिष्क गुप्ता ने एफआईआर के बारे में जानकारी की। इंस्पेक्टर ने बताया कि एफआईआर को प्रथम सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। कोई भी अपराध होने पर सबसे पहले प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होती है। इसके बाद जांच कर चार्जशीट अधिकारियों के पास भेज कर कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है। बच्चों ने कंप्यूटर पर रिपोर्ट दर्ज होने की प्रक्रिया देखी। इसके बाद महिला हेल्पडेस्क पर महिला अपराधों की सुनवाई भी देखी। बच्चों ने बैरक, मैस, हवालात, कार्यालय आदि में भी जाकर व्यवस्थाएं देखीं। इस दौरान सवाल किया कि कौन बच्चा पुलिस में भर्ती होकर सेवा करना चाहता है तो श्रेष्ठ मिश्रा ने कहा कि वह पुलिस बनना चाहती है।
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अपराध को सहना नहीं कहना है...
इंस्पेक्टर केबी सिंह ने छात्र-छात्राओं से कहा कि आपके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, आपके परिवार में मां, बहन, भाभी या पड़ोस में कोई महिला को कोई परेशानी है तो आप उसकी आवाज बन सकते हैं और पुलिस को बता सकते हैं। इसीलिए आपको कुछ भी सहना नहीं कहना है। अपने परिवार के लोगों को भी यह बताएं कि महिलाओं का सम्मान करें। आप ने एक व्यक्ति को समझाकर नशे से दूर किया, एक पीड़ित व्यक्ति की मदद कर दी तो समझो राष्ट्र के लिए आपने योगदान दिया है।
सिपाही ने सुनाया भजन, राष्ट्रगान से समापन
सिपाही अमित शर्मा ने बच्चों को भजन सुनाया। इससे बच्चे काफी खुश दिखे। बच्चों को पुलिस की ओर से जलपान भी कराया गया। बच्चों के कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बहुत जानकारियां मिलीं
थाने का भ्रमण कर बहुत जानकारियां मिलीं। पुलिस से बात कर हिम्मत मिली और देश, समाजसेवा की प्रेरणा मिली। -कशिश पांडे, छात्रा
पुलिस से डरें नहीं
थाने जाकर समझ में आया कि पुलिस से डरने की जरूरत नहीं है। कोई समस्या होने पर पुलिस की मदद लेनी चाहिए। -पूर्णिमा वर्मा, छात्रा
पुलिस मदद करती है
कार्यक्रम काफी उपयोगी रहा। पुलिस सभी लोगों की समस्याओं को सुनकर मदद करती है। बैरक, मैस, कार्यालय की व्यवस्थाओं को भी जाना। -रति पांडे, छात्रा
एफआईआर की जानकारी मिली
सरकार की योजनाओं की जानकारी मिली। पुलिस किस तरह मदद करती है, यह भी समझा। रिपोर्ट दर्ज करने आदि की जानकारी मिली। -इशिता अवस्थी, छात्रा
पुलिस दोस्त है
आमतौर पर लोग पुलिस से डरते हैं, लेकिन अब पता चला कि पुलिस दोस्त है। बिना डरे पुलिस की मदद ले सकते हैं। टोल फ्री नंबर भी बताए। -खुशी मिश्रा, छात्रा
हेल्प डेस्क अच्छी लगी
महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क पर जाकर अच्छा लगा। यहां महिलाएं बेझिझक अपनी बात शेयर कर मदद ले सकती हैं। -गायत्री शर्मा, छात्रा
एक दिन की थाना प्रभारी बनीं अमृत कौर, सुनी समस्याएं
स्कूल की छात्रा अमृत कौर को एक दिन का थाना प्रभारी बनाया गया। अमृत कौर ने इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठकर पुलिस का धन्यवाद किया और इसके बाद उन्होंने पुलिस से संबंधित तमाम जानकारियां लीं। अमृत कौर के साथी छात्र-छात्राएं उनको थाना प्रभारी बना देख काफी रोमांचित थे। इस बीच गांव चौढ़ेरा निवासी भाईलाल की पत्नी रामदेवी तहरीर लेकर थाने पहुंची। अमृत कौर ने रामदेवी के प्रार्थनापत्र पर दरोगा को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान अमृत कौर ने सिपाहियों से उनके हल्का क्षेत्र के बारे में भी जानकारी ली और गश्त तेज करने के साथ ही छोटी सूचनाओं पर भी कार्रवाई करने को कहा।

पुवायां थाने के कार्यालय में जानकारी करते द सेक्रेड हार्ट एकेडमी के छात्र-छात्राएं- फोटो : POWAYAN