{"_id":"620070e82869a026247e4dd1","slug":"struggle-to-stop-khanna-s-record-in-shahjahanpur-nagar-seat-of-up-assembly","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP Assembly Elections : शाहजहांपुर नगर में खन्ना के रिकॉर्ड रथ को रोकने की जद्दोजहद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP Assembly Elections : शाहजहांपुर नगर में खन्ना के रिकॉर्ड रथ को रोकने की जद्दोजहद
Mon, 07 Feb 2022 06:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आशीष त्रिपाठी, शाहजहांपुर
आशीष त्रिपाठी, शाहजहांपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 07 Feb 2022 06:37 AM IST
सार
आठ बार जीतकर नौवीं बार रिकॉर्ड बनाने के लिए प्रयासरत सुरेश कुमार खन्ना के रिकॉर्ड रथ को रोकना विपक्षी दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
सुरेश खन्ना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काकोरी एक्शन के अमर शहीदों पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठा. रोशन सिंह की सरजमीं शाहजहांपुर राजनीतिक फलक पर हमेशा चर्चा में रही। प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वीपी सिंह के राजनीतिक सलाहकार रहे स्व. जीतेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय स्तर पर शाहजहांपुर की राजनीतिक धाक जमाई। अब योगी मंत्रिमंडल के कद्दावर मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एक ही दल और सीट से लगातार नौवीं बार नगर सीट से चुनावी मैदान में हैं। आठ बार जीतकर नौवीं बार रिकॉर्ड बनाने के लिए प्रयासरत सुरेश कुमार खन्ना के रिकॉर्ड रथ को रोकना विपक्षी दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
शाहजहांपुर नगर विधानसभा सीट में पिछले 33 सालों से लगातार सुरेश कुमार खन्ना का कब्जा है। उनसे मुकाबले के लिए समाजवादी पार्टी ने जिलाध्यक्ष तनवीर खान को उतारा है। तनवीर खान इससे पहले 2012 और 2017 में भी सुरेश खन्ना से मुकाबिल रह चुके हैं। दोनों बार उन्हें दूसरे नंबर पर ही रहकर संतोष करना पड़ा। 2012 में जीत का अंतर 16,178 मतों का था, जबकि 2017 में यह अंतर बढ़कर 19,203 हो गया। सपा मुस्लिम-यादव (एमवाई) फैक्टर पर भरोसा बनाए हुए है। बसपा ने 2007 की सोशल इंजीनियरिंग की तर्ज पर ब्राह्मण प्रत्याशी को उतारा है। सर्वेश चंद्र मिश्रा ‘धांधू’ बसपा से सुरेश कुमार खन्ना को चुनौती दे रहे हैं। बसपा प्रत्याशी दलित-ब्राह्मण वोट के सहारे जीत के भरोसे हैं।
विज्ञापन
वहीं, कांग्रेस ने अप्रत्याशित दांव चलते हुए पूनम पांडेय को प्रत्याशी बनाया है। पूनम पांडेय आशा वर्कर हैं। दरअसल, 9 नवंबर को शहर में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सभास्थल में घुसने का प्रयास कर रहीं आशा वर्कर पूनम पांडेय को पुलिस ने पीट दिया था। घायल पूनम पांडेय से कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा ने मुलाकात कर नगर सीट से टिकट फाइनल कर दिया। पूनम पांडेय कांग्रेस के बेस वोट बैंक के साथ ही सहानुभूति के जरिये मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही हैं।
विज्ञापन
सीट का इतिहास
इस सीट से सुरेश कुमार खन्ना 1989 से लगातार आठवीं बार विधायक बने हैं। इनसे पहले 1985 में कांग्रेस से नवाब सिकंदर अली खां, 1980 में कांग्रेस से नवाब सादिक अली, 1977 में जनता पार्टी से मोहम्मद रफी खां, 1974 में आईएनसी (ओ) से मो. रफी खां, 1969 में जनसंघ से उमाशंकर शुक्ल, 1967 में कांग्रेस से मो. रफी खां, 1962 में कांग्रेस से रफी खां, 1957 में निर्दलीय अशफाक, 1959 में निर्दलीय सरदार दर्शन सिंह, 1952 में कांग्रेस से हकीम हबीब-उर-रहमान विधायक रहे थे। संवाद
ध्रुवीकरण रहा अहम
शाहजहांपुर सीट से 1969 में उमाशंकर शुक्ला जनसंघ से विधायक बने थे। इससे पहले और इसके बाद 1985 तक लगातार मुस्लिम ही इस सीट पर जीते। 1989 में सुरेश कुमार खन्ना भाजपा से विधायक बने। तब से वे लगातार जीत रहे हैं। नगर सीट में लगभग 35 से 40 फीसदी मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। इसके बावजूद खन्ना को लगातार मिली जीत में बहुत हद तक ध्रुवीकरण की अहम भूमिका रही है। 2012 में सपा, बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी मुस्लिम थे। इसी तरह 2017 में कांग्रेस-सपा से संयुक्त प्रत्याशी और बसपा के प्रत्याशी मुस्लिम थे। एक से अधिक दलों से मुस्लिम प्रत्याशी उतरने से मतों का बिखराव भी जीत की बड़ी वजह रहा। मतदान की तारीख तक यहां चुनाव ध्रुवीकरण की दिशा में बढ़ जाता है।