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ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा स्कूलों का खेल बजट

Thu, 26 Aug 2021 12:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 12:47 AM IST
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शाहजहांपुर। परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में खेलकूद के लिए जारी होने वाला बजट बहुत कम है। ऐसे में खेल संसाधनों की कमी के चलते बच्चों की प्रतिभा निखरने से पहले ही दम तोड़ रही है।
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पिछले साल परिषदीय विद्यालयों में खेल सामग्री की खरीद के लिए प्रत्येक स्कूल को पांच हजार रुपये का बजट जारी किया गया था। कुछ स्कूलों ने खेल सामग्री खरीदी भी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल खुल ही नहीं सके। माध्यमिक विद्यालयों में भी खेल बजट के नाम पर खानापूरी लंबे समय से की जा रही है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के अनुसार बच्चों के खेलकूद को लेकर प्राथमिक स्कूलों में पांच और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार रुपये का बजट मिलता। वहीं जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताओं के लिए हर साल करीब एक लाख रुपये का बजट बीएसए कार्यालय के शिक्षा एवं खेल विभाग को जारी होता है। जबकि उससे कही ज्यादा खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन व पुरस्कार वितरण आदि में खर्च हो जाता है।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि 5000 रुपये खेलकूद सामग्री खरीदने को दो बार प्राइमरी और जूनियर स्कूल में भेजे गए, जिससे विद्यालय प्रबंध समिति की देखरेख में सामग्री क्रय की गई। स्कूल में एक घंटा खेलकूद का अब भी है। वार्षिक प्रतियोगिता होती हैं, कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष नहीं हो पाई हैं।
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माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक मुकेश परिहार के मुताबिक स्कूलों में खेल के लिए कोई अलग से बजट नहीं आता है। विद्यालय में प्रवेश के दौरान ही फीस में खेलकूद की धनराशि जमा कराई जाती है और हर साल उसी से प्रतियोगिताओं को आयोजन होता है। खेलों को कराने के लिए जिला स्तरीय क्रीड़ा समिति का गठन किया है और हर विद्यालय में एक खेल अध्यापक भी नियुक्त है। स्कूलों में खेल संसाधनों को बढ़ावा मिलना चाहिए।
खेल सामग्री में होती है ये चीजें
- टेनिस बॉल, प्लास्टिक बॉल, फुटबॉल, बास्केट बॉल, क्रिकेट बैट-स्टम्प, सॉफ्टबॉल, फुटबॉल गोल पोस्ट, स्टेप हर्डल के साथ वॉलीबाल नेट, थ्रो बाल, मार्किंग कोन, बैडमिंटन रैकेट, शटल, रिले स्टिक आदि की खरीदारी खेल बजट से होती है।

खेल बजट बहुत कम आता है। 40 से 45 हजार रुपये पूरे जिले के लिए आता है। साल में दो बार खेल बजट प्राप्त होता है। हर साल करीब एक लाख रुपये ही मिल पाता है। जबकि खेलों का संचालन कराने में तीन-चार लाख रुपये खर्च हो आता है। बताया कि पिछले साल भी बजट आया था। लेकिन इस साल अभी कोई बजट नहीं मिला है। हालांकि कोरोना काल में कोई खेल नहीं हुए, इसलिए पिछले साल जो बजट प्राप्त हुआ था उसी को इस बार वितरित कर दिया जाएगा।
- रामप्रसाद, जिला व्यायाम शिक्षक
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