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औद्योगिक आस्थानों में तमाम बाधाओं से जूझ रहीं लघु उद्योग इकाइयां
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शाहजहांपुर/रौसर कोठी। जिले के उद्यमियों को औद्योगिक उत्पादन बनाए रखने में तमाम बाधाओं से जूझना पड़ रहा है। यहां छोटी-बड़ी लगभग पांच हजार उद्योग इकाइयां हैं, जिनमें बड़ी संख्या लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का है। सरकार इन्हें मजबूत करने की बात करती है लेकिन सरकारी विभागों के निराशाजनक रवैये से लघु उद्यमियों को बिजली, पेयजल, प्रकाश, सड़क आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 1982 में रोजा क्षेत्र में ग्राम पंचायत बल्लिया और नेवाजपुर की जमीनों का अधिग्रहण कर वहां इंडस्ट्रियल इस्टेट (औद्योगिक आस्थान) विकसित किया था। वहां 49 औद्योगिक इकाइयां खोली गईं। इन उद्योगों को चलाने के लिये रोजा पावर स्टेशन के साथ ही सड़क, नाले, पीने के पानी की टंकी, पार्क आदि का निर्माण कराकर उद्यमियों को 99 साल की लीज पर भूखंड दिए गए थे। अब वहां कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं और जो उद्योग बचे हैं, उन्हें दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
सड़क से ऊंची बनाई नाली, पानी का विकास नहीं
रोजा इंडस्ट्रियल एरिया में एक वर्ष पूर्व उद्योग विभाग ने सड़क व नाली बनाने का काम कराया। पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए सर्वे के दौरान किसी उद्यमी को जानकारी नहीं दी गई। नतीजे में नाली सड़क से ऊंची बना दी गई और उससे जुड़ने वाले नाला के पानी का निकास भी आगे किसी नदी अथवा निर्जन स्थान पर नहीं खोला गया। इस बार भी बारिश की झड़ी लगने पर जलभराव की आशंका सता रही है। रोजा में प्लास्टिक उत्पादों की फैक्ट्री संचालित कर रहे गुरजीत सिंह मोंगा ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया से पानी का निकास पहले रोजा रेलवे लाइन की ओर था जिसे घुमाकर मंडी की ओर कर दिया गया। मंडी गेट के पास बने नाले की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण इंडस्ट्रियल एरिया का पानी नाले से टकराकर वहीं ठहर जाता है।
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पथप्रकाश और सफाई व्यवस्था लचर
रोजा इंडस्ट्रियल एरिया में पथ प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। धर्मकांटा मार्ग के बीच लगा विद्युत का पोल वाहनों के आवागमन में बाधा बन रहा है। धर्मकांटे को जाने वाले वाहन पोल से टकरा जाते हैं। कई बार विद्युत अभियंताओं से कहने पर भी पोल नहीं हटा। रात में सड़कों पर घोर अंधेरा पसरा रहता है, जिससे उद्यमियों को चोरियां और छिनैती की घटनाएं होने की आशंका सताती है। सफाई व्यवस्था इतनी लचर है कि जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आते है। सफाई नहीं होने से वहां के दोनों पार्क भी गंदगी से घिरे हैं। पार्कों की चहारदीवारी बनाकर गेट भी लगाया गया है, लेकिन वहां किसी प्रकार का पौधा नहीं लगा है। देखरेख के अभाव में वहां ऊंची झाड़ियां उग आई हैं और स्थानीय लोगों ने पार्कों को कूड़ा डालने का अड्डा बना लिया है। यही नहीं, लगभग चार दशक पूर्व बनी पानी की टंकी 20 वर्ष से बंद है।
औद्योगिक क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, सफाई जैसे प्राथमिक कार्य नहीं होना समझ से परे है। इस बारे में उद्योग बंधु की बैठकों में कई बार अवगत कराया जा चुका है। 11 जून को जनपद के दौरे पर आए प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन औद्योगिक आस्थान मेें समस्याएं यथावत हैं। -शुभम खन्ना, जिलाध्यक्ष, आईआईए
रोजा औद्योगिक आस्थान में बिजली, पानी, सड़क, सफाई आदि व्यवस्थाएं सुचारु रखने के लिए वहां के उद्यमियों की सहकारी समिति पुनर्जीवित की जा रही है। इस समिति के खाते में काफी धनराशि भी है, जिससे दो सफाई कर्मचारी रखे जाएंगे। बिजली व्यवस्था में सुधार को संबंधित अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। -दुर्गेश कुमार, उपायुक्त (उद्योग)
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प्रदेश सरकार ने वर्ष 1982 में रोजा क्षेत्र में ग्राम पंचायत बल्लिया और नेवाजपुर की जमीनों का अधिग्रहण कर वहां इंडस्ट्रियल इस्टेट (औद्योगिक आस्थान) विकसित किया था। वहां 49 औद्योगिक इकाइयां खोली गईं। इन उद्योगों को चलाने के लिये रोजा पावर स्टेशन के साथ ही सड़क, नाले, पीने के पानी की टंकी, पार्क आदि का निर्माण कराकर उद्यमियों को 99 साल की लीज पर भूखंड दिए गए थे। अब वहां कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं और जो उद्योग बचे हैं, उन्हें दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
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सड़क से ऊंची बनाई नाली, पानी का विकास नहीं
रोजा इंडस्ट्रियल एरिया में एक वर्ष पूर्व उद्योग विभाग ने सड़क व नाली बनाने का काम कराया। पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए सर्वे के दौरान किसी उद्यमी को जानकारी नहीं दी गई। नतीजे में नाली सड़क से ऊंची बना दी गई और उससे जुड़ने वाले नाला के पानी का निकास भी आगे किसी नदी अथवा निर्जन स्थान पर नहीं खोला गया। इस बार भी बारिश की झड़ी लगने पर जलभराव की आशंका सता रही है। रोजा में प्लास्टिक उत्पादों की फैक्ट्री संचालित कर रहे गुरजीत सिंह मोंगा ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया से पानी का निकास पहले रोजा रेलवे लाइन की ओर था जिसे घुमाकर मंडी की ओर कर दिया गया। मंडी गेट के पास बने नाले की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण इंडस्ट्रियल एरिया का पानी नाले से टकराकर वहीं ठहर जाता है।
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पथप्रकाश और सफाई व्यवस्था लचर
रोजा इंडस्ट्रियल एरिया में पथ प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। धर्मकांटा मार्ग के बीच लगा विद्युत का पोल वाहनों के आवागमन में बाधा बन रहा है। धर्मकांटे को जाने वाले वाहन पोल से टकरा जाते हैं। कई बार विद्युत अभियंताओं से कहने पर भी पोल नहीं हटा। रात में सड़कों पर घोर अंधेरा पसरा रहता है, जिससे उद्यमियों को चोरियां और छिनैती की घटनाएं होने की आशंका सताती है। सफाई व्यवस्था इतनी लचर है कि जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आते है। सफाई नहीं होने से वहां के दोनों पार्क भी गंदगी से घिरे हैं। पार्कों की चहारदीवारी बनाकर गेट भी लगाया गया है, लेकिन वहां किसी प्रकार का पौधा नहीं लगा है। देखरेख के अभाव में वहां ऊंची झाड़ियां उग आई हैं और स्थानीय लोगों ने पार्कों को कूड़ा डालने का अड्डा बना लिया है। यही नहीं, लगभग चार दशक पूर्व बनी पानी की टंकी 20 वर्ष से बंद है।
औद्योगिक क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, सफाई जैसे प्राथमिक कार्य नहीं होना समझ से परे है। इस बारे में उद्योग बंधु की बैठकों में कई बार अवगत कराया जा चुका है। 11 जून को जनपद के दौरे पर आए प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन औद्योगिक आस्थान मेें समस्याएं यथावत हैं। -शुभम खन्ना, जिलाध्यक्ष, आईआईए
रोजा औद्योगिक आस्थान में बिजली, पानी, सड़क, सफाई आदि व्यवस्थाएं सुचारु रखने के लिए वहां के उद्यमियों की सहकारी समिति पुनर्जीवित की जा रही है। इस समिति के खाते में काफी धनराशि भी है, जिससे दो सफाई कर्मचारी रखे जाएंगे। बिजली व्यवस्था में सुधार को संबंधित अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। -दुर्गेश कुमार, उपायुक्त (उद्योग)