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बिजली की आपात कटौती ने छीन ली लोगों की नींद
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 19 Apr 2015 11:33 PM IST
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गर्मी का सीजन परवान चढ़ने के साथ ही बिजली ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शनिवार को आधी रात के बाद से रविवार को दिन निकलने तक पॉवर कट जारी रहने से शहर के लोग ठीक से सो नहीं पाए। खास यह है कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा लागू रोजाना नौ घंटे की नियमित कटौती में कोई रियायत नहीं मिल रही है। ऊपर से आपात कटौती भी झेलनी पड़ रही है। बिजली संकट से घरों में दैनिक कामकाज के साथ लोगों की सामान्य दिनचर्या में भी खलल पड़ने लगा है।
पॉवर कारपोरेशन के लखनऊ सिस्टम कंट्रोल ने बिजली उत्पादन और मांग मेें सामंजस्य बनाए रखने के लिए बीते वर्ष दिवाली से पहले शहरी क्षेत्र में रोजाना नौ घंटे का पॉवर रोस्टरिंग का शेड्यूल लागू किया था। कटौती के तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार सुबह चार से आठ बजे तक, दोपहर 11 से दो बजे तक और रात नौ से 11 बजे तक बिजली सप्लाई बंद रहना आम बात हो चुकी है। शहर के लोगों ने भी खुद को बिजली की नियमित कटौती के अनुरूप ढाल लिया, लेकिन आपात बिजली कटौती जन सामान्य के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
शनिवार की रात यही हुआ। रात में होने वाली नियमित कटौती में छूट मिलने पर लोगों ने काफी राहत महसूस की और खाना खाकर बिस्तरों पर सोने चले गए। लोग झपकी ले पाए थे कि रात साढ़े 12 बजे आपात कटौती लागू होने से सारे फीडर बंद हो गए और शहर अंधेरे में डूब गया। तीन घंटे की इमर्जेंसी रोस्टरिंग के बाद तड़के साढ़े तीन बजे सप्लाई चालू हुई, लेकिन आधा घंटे बाद से चार घंटे की नियमित कटौती थोप दी गई।
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नतीजा यह हुआ कि बिस्तरों पर लोग पूरा रात करवटें बदलते रहे। घरों में पानी का संकट पैदा हो गया क्योंकि सुबह के वक्त बिजली नहीं मिलने से छतों पर रखीं पानी की टंकियां खाली हो चुकी थीं। कामकाजी लोगों ने सनडे की छुट्टी में रात की नींद पूरी करने का मन बनाया, लेकिन दिन निकलने के बाद भी बिजली सप्लाई में सुधार नहीं हो पाया। दस बजे तक बार-बार लाइनों पर ओवरलोडिंग से ट्रिपिंग होती रही। दिन में 11 बजे से दो बजे तक तयशुदा कटौती मेें कोई रियायत नहीं मिलने से लोग गर्मी और उमस से बेहाल हो गए, क्योंकि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से इनवर्टर भी ठप हो गए।
नार्थ ग्रिड बचाने को हुई इमर्जेंसी रोस्टरिंग
‘बड़े शहरों में बिजली की मांग बढ़ने से शनिवार की रात नार्थ ग्रिड की पोजीशन खराब हो गई थी। ग्रिड की फ्रीक्वेंसी घटने से नार्थ ग्रिड के ट्रिप होने का खतरा पैदा हो गया, जिसे टालने के लिए पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल ने तीन घंटे की आपात कटौती प्रभावी की। आने वाले दिनों में आपात कटौती से बिजली सप्लाई की स्थिति और बिगड़ने के आसार हैं।’
-संजीव भास्कर, एक्सईएन ट्रांसमिशन, पैना सब स्टेशन
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पॉवर कारपोरेशन के लखनऊ सिस्टम कंट्रोल ने बिजली उत्पादन और मांग मेें सामंजस्य बनाए रखने के लिए बीते वर्ष दिवाली से पहले शहरी क्षेत्र में रोजाना नौ घंटे का पॉवर रोस्टरिंग का शेड्यूल लागू किया था। कटौती के तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार सुबह चार से आठ बजे तक, दोपहर 11 से दो बजे तक और रात नौ से 11 बजे तक बिजली सप्लाई बंद रहना आम बात हो चुकी है। शहर के लोगों ने भी खुद को बिजली की नियमित कटौती के अनुरूप ढाल लिया, लेकिन आपात बिजली कटौती जन सामान्य के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
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शनिवार की रात यही हुआ। रात में होने वाली नियमित कटौती में छूट मिलने पर लोगों ने काफी राहत महसूस की और खाना खाकर बिस्तरों पर सोने चले गए। लोग झपकी ले पाए थे कि रात साढ़े 12 बजे आपात कटौती लागू होने से सारे फीडर बंद हो गए और शहर अंधेरे में डूब गया। तीन घंटे की इमर्जेंसी रोस्टरिंग के बाद तड़के साढ़े तीन बजे सप्लाई चालू हुई, लेकिन आधा घंटे बाद से चार घंटे की नियमित कटौती थोप दी गई।
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नतीजा यह हुआ कि बिस्तरों पर लोग पूरा रात करवटें बदलते रहे। घरों में पानी का संकट पैदा हो गया क्योंकि सुबह के वक्त बिजली नहीं मिलने से छतों पर रखीं पानी की टंकियां खाली हो चुकी थीं। कामकाजी लोगों ने सनडे की छुट्टी में रात की नींद पूरी करने का मन बनाया, लेकिन दिन निकलने के बाद भी बिजली सप्लाई में सुधार नहीं हो पाया। दस बजे तक बार-बार लाइनों पर ओवरलोडिंग से ट्रिपिंग होती रही। दिन में 11 बजे से दो बजे तक तयशुदा कटौती मेें कोई रियायत नहीं मिलने से लोग गर्मी और उमस से बेहाल हो गए, क्योंकि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से इनवर्टर भी ठप हो गए।
नार्थ ग्रिड बचाने को हुई इमर्जेंसी रोस्टरिंग
‘बड़े शहरों में बिजली की मांग बढ़ने से शनिवार की रात नार्थ ग्रिड की पोजीशन खराब हो गई थी। ग्रिड की फ्रीक्वेंसी घटने से नार्थ ग्रिड के ट्रिप होने का खतरा पैदा हो गया, जिसे टालने के लिए पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल ने तीन घंटे की आपात कटौती प्रभावी की। आने वाले दिनों में आपात कटौती से बिजली सप्लाई की स्थिति और बिगड़ने के आसार हैं।’
-संजीव भास्कर, एक्सईएन ट्रांसमिशन, पैना सब स्टेशन