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खेतों से विश्वविद्यालय की ओर आना चाहिए : चिन्मयानंद
Fri, 23 Feb 2024 01:36 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 23 Feb 2024 01:36 AM IST
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कार्यशाला में रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के प्रोफेसर आशुतोष प्रिय। संस्था
शाहजहांपुर। एसएस कॉलेज के वाणिज्य संकाय और रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का मूल्यांकन एवं परिणाम विषय पर कार्यशाला की। इसका उद्देश्य परियोजना के निष्कर्षों के संबंध में जागरूक करना था।
कार्यशाला अध्यक्ष व मुमुक्षु संकुल के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि हमें विश्वविद्यालय से खेत की ओर नहीं बल्कि खेत से विश्वविद्यालय की ओर आना चाहिए, क्योंकि किसानों को खेती की असल समस्या पता होती है। मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी सतीश चंद्र पाठक ने कहा कि किसान सम्मान निधि विश्व की सबसे बड़ी योजना है। मुख्य वक्ता के रूप में चितकारा विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर धीरेश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कृषि हमारी सकल घरेलू उत्पाद में 14 से 16 प्रतिशत तक का योगदान देती है। योजना के समन्वयक प्रोफेसर आशुतोष प्रिय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शुरू हुई यह योजना बड़ी कारगर साबित हो रही है। करीब 2500 किसानों से मिलने के बाद यह पाया गया कि किसान इस योजना से खुश हैं। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि तकनीकी सत्रों में छात्रों की ओर से प्रस्तुत शोध पत्रों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनको पुरस्कृत किया जाएगा। इस मौके पर डॉ. सुनील विश्वकर्मा, डॉ. सुरेश मिश्रा, प्रोफेसर एके मिश्रा, डॉ. रुचि द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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कार्यशाला अध्यक्ष व मुमुक्षु संकुल के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि हमें विश्वविद्यालय से खेत की ओर नहीं बल्कि खेत से विश्वविद्यालय की ओर आना चाहिए, क्योंकि किसानों को खेती की असल समस्या पता होती है। मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी सतीश चंद्र पाठक ने कहा कि किसान सम्मान निधि विश्व की सबसे बड़ी योजना है। मुख्य वक्ता के रूप में चितकारा विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर धीरेश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कृषि हमारी सकल घरेलू उत्पाद में 14 से 16 प्रतिशत तक का योगदान देती है। योजना के समन्वयक प्रोफेसर आशुतोष प्रिय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शुरू हुई यह योजना बड़ी कारगर साबित हो रही है। करीब 2500 किसानों से मिलने के बाद यह पाया गया कि किसान इस योजना से खुश हैं। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि तकनीकी सत्रों में छात्रों की ओर से प्रस्तुत शोध पत्रों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनको पुरस्कृत किया जाएगा। इस मौके पर डॉ. सुनील विश्वकर्मा, डॉ. सुरेश मिश्रा, प्रोफेसर एके मिश्रा, डॉ. रुचि द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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