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सीने में आंसुओं का समंदर, भाई की शहादत को मां-पिता से छुपाता रहा सुखबीर
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शाहजहांपुर। अपने बीच के भाई गुरप्रीत सिंह की शादी में पीछे खड़े है शहीद सारज सिंह और बाईं ओर बैठे ?
- फोटो : POWAYAN
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पुवायां (शाहजहांपुर)। फोन पर छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर सुखबीर सिंह का कलेजा कांप गया। आंखों से आंसुओं का समंदर बहने को बेताब हो उठा मगर मां-पिता का ख्याल आते ही सब कुछ सीने में दफन कर लिया। माता-पिता के सामने खुद को सामान्य रखने की कोशिश कर रहे सुखबीर कई बार धैर्य खोते मगर फिर कलेजा कड़ा कर लेते।
सुखबीर को सोमवार सुबह दस बजे ही छोटे भाई सारज सिंह की शहादत की खबर मिल गई थी। पूरा दिन और पूरी रात सुखबीर ने मां-पिता के सामने सच्चाई को छिपाकर रखा। बताया ही नहीं कि उनका बेटा अब कभी उनसे बात नहीं करेगा। माता-पिता अपने दिनभर के कामों में व्यस्त रहे और सुखबीर उनके सामने ऐसे ही व्यवहार करता रहा जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।
सुखबीर यह सोच-सोचकर भावनाओं के भंवर में घिरे रहे कि कैसे कह दें कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा। कैसे कह दे कि उनका लाड़ला आतंकवादी गोली का शिकार होकर मां भारती के कदमों पर सर्वोच्च बलिदान दे चुका है। धीरे-धीरे कर आसपास के लोगों को भी सारज सिंह की शहादत की खबर मिलने लगी थी। दोपहर बाद से आसपास के लोग घर आने लगे थे, लेकिन सुखबीर ने सबको घर के बाहर ही रोक दिया।
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गुजारिश करने लगा कि माता-पिता इतना बड़ा सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। लोग भी सुखबीर के हौसले को देखकर हैरान रह गए। लोगों के फोन आने पर वह बाहर निकलकर ही बात करता। अंदर बात करता तो न अपने आंसू रोक पाता और न ही माता-पिता से ऐसी सच्चाई छुपा पाता जो देर-सबेर पता चलनी ही थी। घर के बाहर लंबा सन्नाटा खिंचा हुआ था और सुखबीर के अंदर तूफान हिलोरे ले रहा था। कई बार तन्हाई में सुखबीर फफक कर रोते रहे। उनके अंदर का सैनिक बार-बार उन्हें खुद को संभालने का साहस देता रहा।
‘वीर जी की गल है तुसी मैंनू क्यूं नहीं दस दे...’
पुवायां। सैनिक सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी उनके पिता, मां और पत्नी को अभी इसलिए नहीं दी गई कि पिता, मां और पत्नी अभी परेशान न हों। उधर, सोशल मीडिया पर सारज सिंह की शहादत की खबरें चलने लगी हैं और कुछ लोगों ने शहीद से संबंधित स्टेटस भी लगाए हैं। सारज सिंह की पत्नी रजविंदर कौर मायके पिहानी में हैं, लेकिन उन्होंने स्टेटस देखे तो उनको अनहोनी का शक हो गया है। सोमवार रात में करीब दस बजे रजविंदर कौर ने अपने जेठ सुखबीर सिंह को फोन किया और पूछा ‘वीर जी की गल है तुसी मैंनू क्यूं नहीं दस दे।’ बहू की बात सुनकर सुखबीर की आंखों में आंसू आ गए और आवाज भर्रा उठी, लेकिन उन्होंने खुद पर काबू पाते हुए कहा कि कोई गल नहीं। फोन कटने के बाद सुखबीर सिंह घर से बाहर निकल आए और भाई की याद कर फफक उठे। संवाद
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सुखबीर को सोमवार सुबह दस बजे ही छोटे भाई सारज सिंह की शहादत की खबर मिल गई थी। पूरा दिन और पूरी रात सुखबीर ने मां-पिता के सामने सच्चाई को छिपाकर रखा। बताया ही नहीं कि उनका बेटा अब कभी उनसे बात नहीं करेगा। माता-पिता अपने दिनभर के कामों में व्यस्त रहे और सुखबीर उनके सामने ऐसे ही व्यवहार करता रहा जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।
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सुखबीर यह सोच-सोचकर भावनाओं के भंवर में घिरे रहे कि कैसे कह दें कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा। कैसे कह दे कि उनका लाड़ला आतंकवादी गोली का शिकार होकर मां भारती के कदमों पर सर्वोच्च बलिदान दे चुका है। धीरे-धीरे कर आसपास के लोगों को भी सारज सिंह की शहादत की खबर मिलने लगी थी। दोपहर बाद से आसपास के लोग घर आने लगे थे, लेकिन सुखबीर ने सबको घर के बाहर ही रोक दिया।
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गुजारिश करने लगा कि माता-पिता इतना बड़ा सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। लोग भी सुखबीर के हौसले को देखकर हैरान रह गए। लोगों के फोन आने पर वह बाहर निकलकर ही बात करता। अंदर बात करता तो न अपने आंसू रोक पाता और न ही माता-पिता से ऐसी सच्चाई छुपा पाता जो देर-सबेर पता चलनी ही थी। घर के बाहर लंबा सन्नाटा खिंचा हुआ था और सुखबीर के अंदर तूफान हिलोरे ले रहा था। कई बार तन्हाई में सुखबीर फफक कर रोते रहे। उनके अंदर का सैनिक बार-बार उन्हें खुद को संभालने का साहस देता रहा।
‘वीर जी की गल है तुसी मैंनू क्यूं नहीं दस दे...’
पुवायां। सैनिक सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी उनके पिता, मां और पत्नी को अभी इसलिए नहीं दी गई कि पिता, मां और पत्नी अभी परेशान न हों। उधर, सोशल मीडिया पर सारज सिंह की शहादत की खबरें चलने लगी हैं और कुछ लोगों ने शहीद से संबंधित स्टेटस भी लगाए हैं। सारज सिंह की पत्नी रजविंदर कौर मायके पिहानी में हैं, लेकिन उन्होंने स्टेटस देखे तो उनको अनहोनी का शक हो गया है। सोमवार रात में करीब दस बजे रजविंदर कौर ने अपने जेठ सुखबीर सिंह को फोन किया और पूछा ‘वीर जी की गल है तुसी मैंनू क्यूं नहीं दस दे।’ बहू की बात सुनकर सुखबीर की आंखों में आंसू आ गए और आवाज भर्रा उठी, लेकिन उन्होंने खुद पर काबू पाते हुए कहा कि कोई गल नहीं। फोन कटने के बाद सुखबीर सिंह घर से बाहर निकल आए और भाई की याद कर फफक उठे। संवाद