फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Scientists of Sugarcane Research Council will test seed species in private nurseries

गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिक निजी पौधशालाओं में परखेंगे बीज की प्रजातियां

Tue, 23 Aug 2022 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 12:36 AM IST
विज्ञापन
Scientists of Sugarcane Research Council will test seed species in private nurseries
शाहजहांपुर का गन्ना शोध संस्थान । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। प्रदेश के गन्ना किसानों को अनुमन्य प्रजातियों का गन्ना बीज उपलब्ध कराने के लिए गन्ना शोध परिषद ने तमाम उन्नतशील किसानों को बीज उत्पादन के लिए अधिकृत किया है। किसानों से पता चला है कि कई पंजीकृत बीज उत्पादक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से ऐसी प्रजातियों का गन्ना मंगाकर उससे बीज तैयार कर रहे हैं, जो जल्दी पकने के बावजूद उपज कम देती हैं। उनमें कीट-रोग लगने का खतरा भी ज्यादा होता है। इसे देखते हुए परिषद के निदेशक ने कृषि वैज्ञानिकों से निजी पौधशालाओं की जांच कराने का निर्णय किया है।
विज्ञापन

इन प्रजातियों का गन्ना बीज तैयार करने की अनुमति
कोयंबटूर गन्ना अनुसंधान केंद्र ने ही कुछ वर्ष पहले अधिक उत्पादन और ज्यादा चीनी परता देने वाली प्रजाति को.-0238 खोजी थी। इसे किसानों ओर चीनी मिलों ने हाथों-हाथ लिया, लेकिन उसमें गन्ना का कैंसर कहे जाने वाले रोग लाल सड़न (रेड रॉट) का प्रकोप होने के कारण उसकी बुआई पर रोक लगा दी गई। बीज उत्पादक किसानों को इस प्रजाति के स्थान पर केवल को.शा.-13235, को.-0118, को.लख.-14201, को.-15023, को.शा.-14233, को.शा.-13231 और को.शा.-10239 प्रजातियों का गन्ना बीज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सभी जल्दी पककर ज्यादा उत्पादन देने के साथ पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं।
विज्ञापन

सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार से खुला भेद
परिषद के प्रसार अधिकारी संजीव कुमार पाठक के अनुसार बीज उत्पादन और विक्रय के लिए अधिकृत कुछ पंजीकृत किसान सोशल मीडिया पर पंजीकरण प्रमाण पत्र के साथ अपनी पौधशाला को सरकार से अधिकृत नर्सरी बताते हुए पोस्ट डाल रहे हैं। ऐसी पोस्ट में उन किस्मों के बीज गन्ने की उपलब्धता का प्रचार किया जा रहा है, जो प्रदेश में बुआई के लिए अनुमोदित नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनमें मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की ऐसी प्रजातियां हैं, जिनका गन्ने की मोटाई ज्यादा होती है। उनका कहना है कि किसान भी गन्ने की मोटाई की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन प्रदेश की जलवायु इन प्रजातियों के अनुकूल नहीं होने से उत्पादन कम होता है। इसीलिए अन्य प्रदेशों की गन्ना प्रजातियों का यहां बुआई में प्रयोग नहीं हो रहा है।
पोर्टल पर किसानों को किया सचेत
बीज उत्पादकों द्वारा सोशल मीडिया पर किए जा रहे भ्रामक प्रचार से आम किसानों को बचाने के लिए गन्ना शोध परिषद ने अपने पोर्टल का सहारा लिया है। इसके जरिये किसानों को सचेत किया है कि वह सोशल मीडिया पर कतिपय लोगों के भ्रामक प्रचार के बहकावे में नहीं आएं और केवल उन्हीं किस्मों का गन्ना बीज व सीडलिंग (अभिजनक बीज) खरीदें जो प्रदेश के लिए स्वीकृत हैं। बीज गन्ना उत्पादकों को चेताया है कि वह किसी वैधानिक कार्रवाई अथवा पंजीकरण निरस्त होने से बचने के लिए अपनी नर्सरी स्वीकृत गन्ना किस्मों के उत्पादन व विक्रय तक ही सीमित रखें।

निजी पौधशालाओं में तैयार हो रहीं बीज प्रजातियों का परिषद के वैज्ञानिकों से परीक्षण कराया जाएगा। प्रतिबंधित प्रजाति प्रमाणित होने पर संबंधित बीज उत्पादक के खिलाफ बीज विक्रय अधिनियम 1966 और आईपीसी की धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई होगी। -वीके शुक्ला, निदेशक, उप्र गन्ना शोध परिषद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed