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मिर्च पाउडर व कांट में बनी आइसकैंडी समेत 19 चीजों के नमूने फेल

Sat, 05 Sep 2020 01:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 01:46 AM IST
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Samples of 19 things, including chilli powder and ice candy made in thorn, failed
शाहजहांपुर। होली के मौके पर जिले भर में खानपान की चीजों में खूब मिलावट की गई थी। इस बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अभियान चलाकर दूध, मिठाई, खोआ, पनीर, बेसन, मसाले, आइसकैंडी और खाद्य तेल नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में ओएमजी ब्रांड का मिर्च पाउडर और कांट में बनी आइसकैंडी समेत 19 वस्तुओं के नमूने फेल पाए गए। इनमें कई वस्तुएं मानव स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह असुरक्षित (अनसेफ) पाई गई गईं, जबकि अन्य कई वस्तुओं के नमूने अधोमानक (सब स्टैंडर्ड) और पैकेजिंग में गड़बड़ी वाले (मिस ब्रांडेड) पाए गए। मामले में एफएसडीए की ओर से संबंधित दुकानदारों के खिलाफ एडीएम प्रशासन के न्यायालय में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे।
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त्योहारों पर जिन चीजों की बाजार में खपत ज्यादा होती है, एफएसडीए के अफसरों ने उन्हीं को जांच के दायरे में लिया था। गत फरवरी/मार्च में चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान में सभी तहसीलों में विभागीय टीमों ने एक साथ दुकानों पर छापेमारी कर 26 नमूने लिए थे। इनमें से 19 सैंपलों में कई तरह की गड़बड़ी पाई गई। खास यह है कि जो नमूने गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं पाए गए, उनमें कई नामचीन प्रतिष्ठानों और कंपनियों के उत्पाद भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जो खाद्य वस्तुएं जांच में अनसेफ पाई गईं, उनकी बिक्री में लिप्त लोगों को अर्थदंड के साथ कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ेगी।
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मुनीम जी के खोया में कम निकली दुग्ध बसा
महानगर के कच्चा कटरा क्षेत्र में मिठाई विक्रेता मुनीम जी की दुकान देसी खोआ की मिठाइयों के लिए खासी मशहूर है। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वहां एक डलिया में रखा पाया करीब 50 किलो खोआ प्रथम दृष्टया मिलावटी पाए जाने पर नमूना लेने के बाद उसे नष्ट करा दिया था। प्रयोगशाला से मिली जांच रिपोर्ट के अनुसार नष्ट कराए गए खोआ में मिल्क फैट (दुग्ध वसा) मानक से कम पाई गई। मतलब प्रतिष्ठान पर चिकनाई रहित खोआ की मिठाइयों मेें खपत हो रही थी। लोधीपुर में मनोज की दुकान से लिए गए पनीर के नमूने में भी क्रीम का अंश कम मिला। बरतारा में असलम और सिंधौली में वसीम से लिए गए दूध के नमूनों में वसा रहित दुग्ध अंश (सॉलिड नॉट फैट अथवा एसएनएफ) की मात्रा कम पाए जाने से पानी की मिलावट उजागर हुई। केरूगंज खोया मंडी गढ़िया रंगीन के विक्रेता प्रेमपाल का खोआ भी अजधोमानक निकला।
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खाने योग्य नहीं ओएमजी ब्रांड की पिसी लाल मिर्च
मिर्जापुर की दुकान से लिए गए ओएमजी ब्रांड की पिसी लाल मिर्च में अखाद्य रंग की मिलावट होने के कारण जांच रिपोर्ट में नमूना स्वास्थ्य के लिए घातक बताया गया। इससे पहले, गत वर्ष दिवाली पर भी सदर बाजार की एक नामचीन स्वीट शॉप और पचराहा की मसाला चक्की से लिए गए पिसी लाल मिर्च के दो नमूनों की जांच में भी स्वास्थ्य के लिए घातक लाल रंग की मिलावट पाई जा चुकी है। इस बार ब्रांडेड पिसी लाल मिर्च फेल हुई, इसलिए मुकदमे में विक्रेता के साथ कानपुर की निर्माता कंपनी को भी प्रतिवादी बनाया जाएगा।
आइसकैंडी में सैक्रीन और रंगों की भरमार
बच्चे ऑरेंज फ्लेवर वाली आइसक्रीम बड़े चाव से खाते हैं। गांवों में इसकी खपत बहुत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए कांट के मोहल्ला गढ़ी पश्चिमी में आइसकैंडी की दो फैक्टरियों से आइसकैंडी घोल के दो नमूने लिए गए। जांच कराने पर पता चला उनमें मिठास के लिए शकर के बजाय अत्यधिक मात्रा में सैक्रीन और अखाद्य रंग घोला गया है।
कार्रवाई के दायरे में आया दुग्ध संग्रहकर्ता
अधिकांश दूध वाले और डेयरी संचालक दूध में पानी की मिलावट करने से बाज नहीं आते, लेकिन गूजरपुर (फर्रुखाबाद) के दुग्ध संग्रहकर्ता अरुण कुमार का दूध स्वास्थ्य के लिए घातक पाया गया। अरुण बरेली मोड़ पर अपना टैंकर खड़ा कर आसपास के ग्रामीणों से खरीदा गया दूध इकट्ठा कर उसकी पैकेजिंग करते हैं। दूध मेें किसी रसायन की मिलावट नहीं पाई गई, लेकिन उसे ठंडा रखने के लिए टैंक में डाली गई बर्फ दूषित पानी से बनी होने के कारण नमूना स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया गया तो एफएसडीए ने अन्य दुग्ध संग्रहकर्ताओं पर निगाहें टेढ़ी कर दी है।
रंगी हुई अरहर दाल से रहें सावधान
अरहर दाल में खेसारी की मिलावट आम बात है, लेकिन अब उसमें पालिश के लिए हानिकर अखाद्य रंग की मिलावट होने लगी है। जमौर मेें किराना व्यवसायी अशोक कुमार की दुकान से लिए गए दाल के नमूने में टाट्राजिन कलर पाया गया, जिसका खाद्य वस्तुओं के बजाय औद्योगिक उत्पादों में इस्तेमाल होता है। रंगी हुई दाल खाने का मतलब है अपना पाचन तंत्र खराब कर लेना।
इन नमूनों में भी पाई गईं तमाम कमियां
मदनापुर के शेरपाल सिंह से लिए गए बेसन मेें मटर आटा और सदर क्षेत्र के दिलावरपुर चौराहा की दुकान से लिए बेसन में गेहूं आटा की मिलावट पाई गई। लोधीपुर में मो. जीशान की दुकान से टाटा ब्रांड की नकल वाले टीट ब्रांड के नमक पैकेट में सोडियम का अंश मानक से अधिक पाया गया। पुवायां में खुटार रोड की दुकान से लिए गए श्यामल ब्रांड के देसी घी, रामपुर कस्बे की दुकान से लिए गए लोकल पैकिंग वाले रिफाइंड पामोलीन, जलालाबाद सीएचसी के सामने शीतल पेय फैक्टरी से नींबू मसाला पेय और मिर्जापुर के बहेरिया गांव की दुकान से लिए जय अंबे ब्रांड सरसों तेल की पैकिंग में गड़बड़ी पाई गई।

वर्जन
आइसकैंडी में प्रयुक्त होने वाली सैक्रीन बच्चों की स्वाभाविक वृद्धि रोक देती है और अखाद्य रंग लीवर, किडनी, आमाशय आदि तमाम अंगों को क्षति पहुंचाते हैं। खान-पान की वस्तुओं में खाद्य रंग 100 पीपीएम की नियत मात्रा अर्थात एक किलो वस्तु में एक मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो नमूने अनसेफ पाए गए हैं, उनसे संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी पैरवी करके जेल भिजवाया जाएगा। मुकदमा कार्रवाई के लिए फाइलें तैयार कराई जा रही हैं।
- वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
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