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बरामदे में बना दिया बाइक स्टैंड, बैठने के लिए भी पर्याप्त सीटे नहीं

Thu, 05 Mar 2020 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2020 12:51 AM IST
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roadways bad condition
शाहजहांपुर। शहर में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बना रोडवेज बस स्टैंड बदहाली से जूझ रहा है। यात्रियों के बैठने के लिए बनाए गए बरामदे में साइकिल स्टैंड बना दिया गया है। इस वजह से न तो यात्रियों के बैठने को यहां पर्याप्त सीटें हैं और न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त है। पानी की निकासी न होने की रोडवेज बस स्टैंड पर जलभराव भी हो गया है। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को यहां के हालात का जायजा लिया तो सूरत बदहाल नजर आई।
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शहर के बस स्टैंड से प्रतिदिन करीब 30 हजार लोगों का आना-जाना होता है। होली पर यह संख्या और भी बढ़ेगी। ऐसे में यात्रियों को खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ेगा या फिर फर्श पर बैठकर, लेकिन यहां बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि यात्रियों के बैठने की जगह को वाहन स्टैंड बना दिया गया है। कैंटीन के लिए निर्धारित स्थान पर रैन बसेरा बना दिया गया है। मजबूरन यात्रियों को कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए रोडवेज बस स्टैंड के बाहर दौड़ना पड़ता है। पानी की टंकी के सामने भी जलभराव के कारण हमेशा गंदगी रहती है। फर्श की टाइल्स भी उखड़ चुकी हैं।
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गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप
कहने के लिए पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन पर काम हो रहा है, लेकिन रोडवेज बस स्टैंड में जलभराव और गंदगी की वजह से मच्छरों की भरमार है। यदि किसी यात्री को मजबूरन यहां रात बितानी पड़ी तो मच्छर उसे चैन नहीं लेने देंगे।
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5.87 करोड़ से बनी थी बिल्डिंग
रोडवेज बस स्टैंड के नवीन भवन का निर्माण पांच करोड़ 87 लाख की लागत से वर्ष 2015 में शुरू हुआ जो वर्ष 2017 में अधूरा ही छोड़ दिया गया। इस वजह से रोडवेज ने कार्यदायी संस्था यूपी सिडको से अपने हाथ में लेने से इनकार कर दिया। तब से रोडवेज बस स्टैंड पर काम अधूरा पड़ा है। काम को पूरा करने के लिए रेट रिवाइज कर प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
बस स्टैंड के भवन को आधा-अधूरा बनाया गया था, इसलिए कार्यदायी संस्था से लेने से इनकार कर दिया गया। काम पूरा कराने के लिए कहा गया है, जो भी अव्यवस्थाएं हैं। उन्हें सही कराने का प्रयास किया जा रहा है।

- एसके वर्मा, एआरएम
कुछ काम अधूरे हैं, जो पूरे नहीं हो पाए हैं। जिस दर पर काम स्वीकृत हुआ था, बजट मिलने पर वह बढ़ गई। काम की ड्राइंग में भी बदलाव हुआ है। एस्टीमेट बनाकर परिवहन निगम को दे दिया है, शासन से रुपये स्वीकृत कराना उनकी जिम्मेदारी है। रुपये मिलने पर काम शुरू करा दिया जाएगा। - बाबूराम, जेई, यूपी सिडको कार्यदायी संस्था
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